उत्तराखंड का एक और वीर सपूत हुआ कश्मीर के आंतकी हमले में शहीद

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उत्तराखंड के वीर सपूत देश की रक्षा के लिए लगातार अपनी मौन मूक सहादत दिए जा रहे है ,आखिर कब थमेगा ये सिलसिला । इन वीर सपूतो ने अपनी जान की बाजी खेलकर अपने को देश के लिए बलिदान कर दिया । जम्मू कश्मीर में आतंकी हमले थमने के नाम नहीं ले रहे हैं , हर दूसरे दिन बॉर्डर पार से आतंकी सीमा के अंदर घुसपैठ कर रहे है । जम्मू के रिहायशी इलाके सुंजवां  में आर्मी कैम्प पर शनिवार को सुबह 5 आतंकियों ने हमला कर दिया। आर्मी के मुताबिक, आतंकी सेना की वर्दी पहनकर कैम्प में दाखिल हुए। उनके पास भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद थे। सुचना के अनुसार इस हमले में एक जेसीओ समेत 6 जवान शहीद हुए।

सुंजवान में हुई फ़िदायीन हमले में पौड़ी के राकेश रतूड़ी को भी गोली लगी थी, जिस से राकेश रतूड़ी घायल हुए थे। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां सोमवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। सोमवार की रात उन्हें राकेश की शहादत की ख़बर आई, इस दुखद खबर से पूरा शहर शोक से गमगीन हो गया। राकेश रतूड़ी मूलरूप से  पौड़ी  के सांकर गांव के रहने वाले थे। उनकी शहादत की खबर सुनते ही पूरा परिवार शौक में डुब गया। राकेश रतूड़ी का परिवार देहरादून के प्रेमनगर में रहता है। शहीद  के माता और पिता गांव में रहते हैं। अपने बेटे की ये दुखद खबर सुनकर माता पता स्तब्ध रह गए ,सबसे दुःख की बात तो ये है कि राकेश रतूड़ी अपने पीछे  अपनी पत्नी और दो बच्चों नितिन और किरण को छोड़ गए हैं। उनका बेटा नितिन (17 वर्ष) एसजीआरआर पटेलनगर में कक्षा ग्यारह का छात्र है। जबकि बेटी किरण(19 वर्ष) पत्राचार से बीए कर रही।






मूल रूप से पौड़ी के निवासी राकेश रतूड़ी 1996 में सेना में भर्ती हुए थे । साल 2010 में वह एनएसजी कमांडो बन गए और 2013 तक रहे ,इसके बाद 2013 में वह राष्ट्रीय राइफ़ल में शामिल हुए। सेना में एक साल की सेवा और करने के बाद उन्हें 2019 सेवानिवृत होना था । महार रेजिमेंट की छठी बटालिन में हवलदार रतूड़ी की पोस्टिंग कुपवाड़ा में थी,उनकी रेजिमेंट लद्दाख तैनात हो गई थी और रतूड़ी उन चंद लोगों में से थे जिन्हें रिलीव नहीं किया गया था।

सुजवां में शनिवार सुबह तीन से चार आतंकी सेना के कैंप में घुस गए। सबसे पहले आतंकियों ने संतरी के बंकर पर फायरिंग की थी। इसके बाद वो दो ग्रुपों में बंटकर कैंप के अंदर घुस गए। इस घटना ने तूल तब पकड़ा जब वो कैंप में सेना के परिवारों के लिए बनाए गए फ्लैट में जाकर छिप गए।

कश्मीर के उस पूरे शहर में रेड अलर्ट है। उधर, देर शाम सीएम महबूबा मुफ्ती ने जख्मी सैनिकों से मुलाकात की। बता दें कि इसी आर्मी कैम्प पर 2006 में भी आतंकवादी हमला हुआ था, जिसमें 12 जवान शहीद हो गए थे और सात अन्य जख्मी हुए थे।

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Devbhoomidarshan Desk

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