उत्तराखण्ड ऊधमसिंह नगर
उतरायणी कौतिक में अपने गीतों से दक्ष कार्की ने बाँधी ऐसी समा… कि हर कोई झूम उठा
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उधमसिंह नगर जिले के दिनेशपुर में आयोजित उत्तरायणी मेले में आज का दिन लिटिल स्टार दक्ष कार्की के नाम रहा। देखिए विडियो..

स्व• लोकगायक पप्पू कार्की के उत्तराखंड संगीत जगत से अलविदा कहने के बाद लोगों को अब दक्ष कार्की में एक उभरता हुआ सितारा नजर आता है.. और आए भी क्यों ना आखिर हुनरमंद दक्ष कार्की, छोटी सी उम्र में ही अपनी जादुई आवाज से अबतक लाखों लोगों का दिल जीत चुका है। हाल ही में पीके इंटरटेनमेंट चैनल से रिलीज हुआ दक्ष का गीत “काले कौवा काले” इस बात को साबित करता है कि लोगों को दक्ष की मधुर ध्वनि का इंतजार लोगों को बेशब्री से रहता है। लोगों को काफी लम्बे समय से दक्ष के लाइव प्रोग्राम का इंतजार था… दक्ष ने भी अपने श्रोताओं को निराश ना करते हुए आज मकर संक्रांति के दिन दिनेशपुर के उत्तरायणी मेले में अपनी सुरीली आवाज से ऐसा धमाल मचाया कि मैदान में उपस्थित सभी लोग थिरकने को मजबूर हो गए। हम भी आपको दक्ष के उसी प्रोग्राम की विडियो को दिखाने जा रहे हैं।
पहले काले कौवा काले से की शुरुआत फिर पिता का सुपरहिट गीत गाकर लोगों को दिलाई लोकगायक पप्पू कार्की की याद:-
उत्तरायणी मेलों का आयोजन होते ही खुद-ब-खुद स्व• लोकगायक पप्पू कार्की याद आ जाते हैं। ऐसा कोई भी उत्तरायणी मेला नहीं होगा जहां पप्पू कार्की अपनी छाप ना छोड़ी हों, कुछ समय के लिए तो ऐसा ही लगता था कि जैसे लोग केवल स्व• पप्पू कार्की को ही सुनने आते हों। अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए दक्ष ने भी आज उधमसिंह नगर जिले के दिनेशपुर में आयोजित उत्तरायणी मेले में अपनी मधुर आवाज पर लोगों को थिरकने को मजबूर कर दिया। दक्ष ने कार्यक्रम की शुरुआत हाल ही में 5 जनवरी को रिलीज हुए अपने गीत “काले कौवा काले” से की। बता दें कि दक्ष का यह गीत यूट्यूब में भी लोगों को बहुत पसंद आ रहा है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मात्र दस दिनों के अंदर ही इसे 5 लाख से अधिक लोग देख चुके हैं। दिनेशपुर में जैसे-जैसे कार्यक्रम बढ़ता गया वैसे-वैसे इस नन्हे कलाकार ने दर्शकों से खचाखच भरे पूरे मैदान को अपने नाम कर लिया। इस गीत के बाद जैसे ही दक्ष ने लोकगायक पप्पू कार्की के सुपरहिट गीत “उत्तरायणी कौतिक लागी रो, सरयू का बगड़ मां…” को अपनी मधुर आवाज में गाना शुरू किया, मैदान में उपस्थित सभी लोग तालियां बजाकर थिरकने को मजबूर हो गए।
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