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उत्तराखण्ड

पिथौरागढ़

स्वच्छता एवं विकास के मामले में उत्तराखण्ड का यह गांव है मिसाल, यहां के ग्राम प्रधान भी बेमिसाल

जहां उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र के गांव पलायन की मार झेल रहे हैं वहीं कुछ गांव ऐसे भी हैं जो स्मार्ट सिटी की तर्ज़ पर विकसित हो रहे हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही गांव से रूबरू करा रहे हैं हो सकता है आपको इसकी तस्वीर देखकर यकीन ना हो कि उत्तराखंड में ऐसे भी गांव है, परन्तु यह हकीकत है। हम बात कर रहे हैं राज्य के पिथौरागढ़ जिले के कुसौली ग्राम पंचायत की। इस ग्राम पंचायत और इसके ग्राम प्रधान ने एक ऐसी मिशाल पेश की है जो भविष्य में अन्य ग्राम पंचायतों एवं ग्राम प्रधानों के लिए नजीर बन सकती है। बता दें कि कुसौली ग्राम पंचायत को हाल ही में पिछले वर्ष स्वच्छता के क्षेत्र में पहला स्थान प्राप्त कर चुका है। इतना ही नहीं इससे पहले भी कुसौली ग्राम पंचायत अन्य अनेक पुरस्कार प्राप्त कर उत्तराखंड के साथ ही पूरे देश में अपना परचम लहरा चुका है। गांव के इस कायाकल्प का श्रेय गांव के ग्राम प्रधान रघुवीर सिंह को जाता है, जिनके अथक परिश्रम से ही यह संभव हुआ है। यहां तक कि यह बात गांव के ग्रामीण भी एक सुर में स्वीकार करते हैं कि रघुबीर सिंह क्षेत्र के अन्य ग्राम प्रधानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।




इसलिए खास है कुसौली ग्राम-
बता दें कि पिथौरागढ़ जिले के विण विकासखंड में एक सुंदर सा गांव है कुसौली, जिसको अगर स्मार्ट गांव बोला जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि कुसौली ग्राम पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखता है। विकास के लिए पैसों का सदुपयोग कैसे किया जाता है यह इस गांव में देखने को मिलता है। इतना ही नहीं स्वच्छ भारत अभियान भी इस गांव में पूरी तरह सार्थक सिद्ध हुआ है। 223 परिवारों के इस गांव में प्रत्येक परिवार के पास कूड़ा निस्तारण के लिए जहां अलग-अलग कूडादान मौजूद है वहीं गांव में 8 स्थानों पर सार्वजनिक कूड़ेदान भी रखें ग‌ए है और नालियों को भी पाटलों से पूरी तरह ढका हुआ है। गांव के रास्ते एवं सड़कों की साफ-सुथरी स्थिति को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां के ग्रामीण स्वच्छता के प्रति कितने जागरूक हैं क्योंकि यहां का कोई भी व्यक्ति गांव के रास्ते एवं सड़कों पर कूड़ा नहीं फेंकता। इसके अलावा जैविक खाद के लिए गांव में 80गड्डे एवं 25 सोकपिट भी लगाए गए हैं जिसके लिए जिले के विभिन्न अधिकारी ग्राम प्रधान के साथ ही ग्रामीणों को भी बधाई दे चुके हैं।




अब तक मिल चुके हैं ये पुरस्कार-
उपरोक्त सुविधाओं के अलावा गांव की सुंदरता को बढ़ाने एवं और अधिक आकर्षक बनाने के लिए गांव के विभिन्न सरकारी भवनों जैसे- स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र एवं पंचायत भवन आदि की दीवारों को सुंदर पेंटिंग के द्वारा भी सजाया गया है। इन सभी सुविधाओं के चलते कुसौली ग्राम पंचायत अब तक क‌ई महत्वपूर्ण पुरस्कार अपने नाम कर चुका है। जिनमें मुख्य रूप से साल 2012 में मिला निर्मल ग्राम पुरस्कार एवं 2018 में मिलें राज्य स्वच्छता गौरव पुरस्कार, उत्कृष्ट ग्राम पंचायत पुरस्कार शामिल हैं। इतना ही नहीं राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाले दीनदयाल उपाध्याय पंचायत संस्कृतिकरण पुरस्कार में भी वर्ष 2018 में कुसौली गांव उत्तराखंड के सभी गांवों में भी प्रथम स्थान प्राप्त कर सम्मानित हो चुका है। इसके अलावा वर्ष 2015 में कुसौली ग्राम पंचायत खुलें में शौच से मुक्त भी घोषित हो चुका है। ग्रामीणों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने एवं गांव में विकास का श्रेय जहां ग्रामीण ग्राम प्रधान को देते हैं वहीं ग्राम प्रधान रघुबीर सिंह का कहना है कि ग्रामीणों के सहयोग के बिना यह संभव नहीं था। हमें उम्मीद है कि क्षेत्र के अन्य ग्राम प्रधान भी रघुबीर सिंह से प्रेरणा लेकर अपने गांव का कायापलट करने की कोशिश करेंगे।




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