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उत्तराखण्ड

चम्पावत

कांस्‍टेबल सविता कोहली शिक्षिका बनकर संवार रहीं कूड़ा बीनते बच्‍चों का भविष्‍य, 52 बच्चो को ले चुकी हैं गोद

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अक्सर हम मंदिर मस्जिद या फिर अन्य सामाजिक स्थलों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनो पर न जाने कितने लोगो को भिक्षावृत्ति और कूड़ा बीनते हुए देखते है, जिन्हे लोग कपड़े ,पैसे इत्यादि दे देते है। जिस समय हमारे और आपके बच्चे कंधे पर बैग और हाथों में टिफिन बॉक्स के साथ बोटल लेकर स्कूल जाते हैं। ठीक उसी समय समाज में कुछ ऐसे बच्चे भी होते हैं। जो कूड़ा बीनने के लिए घरों से बाहर निकलते हैं। जिंदगी को जीने की जद्दोजहद और गरीबी से लड़ने के लिए इन बच्चों ने कूड़े को सहारा बनाया है। कूड़े के ढेर पर ही वो जिंदगी को अपनी दुनिया समझ लेते है और उसी नजरिये से जिंदगी जीते है। आज हम आपको रूबरू करा रहे है,चम्पावत जिले के बनबसा थाने में तैनात ट्रैफिक कांस्टेबल सविता कोहली से जो अपनी ड्यूटी पूरी करने के बाद हर रोज दो घंटे का समय कूड़ा बीनने वाले बच्चों को पढ़ाने में व्यतीत कर रही हैं।




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मूल रूप से पिथौरागढ़ जिले के जगतर गांव निवासी सविता की ससुराल कनालीछीना में है। 2017 में पुलिस सेवा में भर्ती हुई सविता के पति गोविंद राम कोहली भी पुलिस में हैं। इस समय वह चंपावत पुलिस कार्यालय में तैनात हैं। बता दे की सविता की जब बस स्टेंड के पास ड्यूटी लगी थी, इस दौरान छह-सात साल की उम्र के दो बच्चों को उन्होंने कूड़ा बीनते देखा। जब सविता ने उन बच्चो के पास जाकर प्रश्न किया की तुम लोग स्कूल क्यों नहीं जाते। ये सुनते ही बच्चे अपने को निशब्द सा महसूस करने लगे उनकी मज़बूरी उनके चेहरे पर पड़ी सिरवट से साफ़ झलक रही थी। बच्चो की खामोशी और लाचारी देख सविता का ह्रदय पिघल गया और उन्होंने बच्चो को खुद पढ़ाने की बात कह वापस जाने को कहा। दूसरे ही दिन सविता खुद टाट-चटाई, कॉपी, किताब, पेंसिल एवं अन्य स्टेशनरी खरीदकर मीना बाजार झोपड़-पट्टी इलाके में पहुंच गई।
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झोपड़-पट्टी में बाहर से आकर मजदूरी कर गुजर बसर करने वाले गरीब लोगों के परिवार रहते हैं। गरीब और अशिक्षित होने की वजह से माता पिता बच्चो को स्कूल नहीं भेज रहे थे। ताजुब्ब तो तब हुआ जब इनमे से कुछ परिवार ऐसे थे, जो बच्चों के श्रम से ही घर खर्च चलाते थे। सविता ने इन परिवारों से बात कर उन्हें समझाया और बच्चों को उनकी क्लास में भेजने को कहा। कुछ दिन मशक्कत के बाद सविता उन्हें समझाने में कामयाब हुई। इस तरह बनबसा नगर पंचायत परिसर का खुला मैदान एक पाठशाला में तब्दील हो गया। उसी दिन से ड्यूटी खत्म होने के बाद सविता शिक्षिका का भी दायित्व निभाती आ रही हैं। फिलहाल उनकी क्लास में इस समय 52 बच्चे शामिल हैं। दिनभर की भागादौड़ी वाली ड्यूटी के बाद एक शिक्षिका की ड्यूटी भी निभाना अपने आप में किसी पहाड़ तोड़ने से कम नहीं है। बनबसा थानाध्यक्ष राजेश पांडे को भी जब इस बात का पता चला तो उन्होंने सविता की ड्यूटी बदल उनके इस नेक काम में सहयोग ही किया।




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