उत्तराखण्ड पहाड़ी गैलरी
रोहित चौहान का खूबसूरत गीत “पौड़ी की बाजार कमला ना मार लटका” आपकी यादे ताजा कर देगा
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बचपन से ही अपनी मधुर आवाज में पहाड़ी गीतों को गुनगुनाने वाले रोहित चौहान आप सबके बीच एक बार फिर अपने बेहद खूबसूरत गीत के साथ हाजिर है। वैसे तो रोहित चौहान अब तक कई सारी एल्बम एवं गीत निकाल चुके हैं परन्तु इन सबमें उनकी बसन्ती नामक एल्बम सबसे ज्यादा हिट रही और इसी गीत ने रोहित को पहाड़ी जनमानस में एक ऐसी पहचान दिलाई कि आज वह देश-प्रदेश में किसी भी परिचय का मोहताज नहीं है। हिरका चेली और हे कांछी जैसे सुपरहिट गीतों को गाने वाले रोहित उत्तराखण्ड की स्वर कोकिला के नाम से विख्यात प्रसिद्ध लोकगायिका कल्पना चौहान के बेटे हैं। उनके पिता राजेंद्र चौहान एक म्यूजिक डायरेक्टर है। माता-पिता के हरसमय गीतों को गुनगुनाते रहने के कारण संगीतमय वातावरण में पले-बढ़े रोहित को बचपन से ही संगीत में रूचि होने लगी और छोटी उम्र में ही वह कई गीतों को अपनी मधुर आवाज दे चुके थे। बता दे की रोहित चौहान की पहली एल्बम शीला बौ 2005 में आयी थी जिसे लोगो ने काफी पसंद किया।
वैसे तो आज उत्तराखंड के बहुत से नए लोकगायक पुराने गीतों को नए रूप में पेश कर उनमें जान छिड़कने का प्रयास कर रहे हैं। जो कि उत्तराखंड की दम तोड़ती पहाड़ी संस्कृति के लिए संतोष की बात भी है। इस श्रेणी में ‘फ्वा बाघा रे’ जैसे देश-विदेश में प्रसिद्ध गीत भी शामिल है परंतु आज हम आपको जिस पुराने गीत की नए रूप में प्रस्तुत विडियो दिखाने जा रहे हैं उसकी सबसे खास बात यह है कि उसको एक ही गायक रोहित ने अपनी मधुर आवाज से नवाजा है। जी हां हम बात कर रहे हैं उस गीत की जिसको सुनकर 90 के दशक के सभी युवा बड़े हुए हैं। बचपन में तो यह गीत आपके होंठों से कई बार गुनगुनाया भी जा चुका है। ‘पौड़ी की बाजार कमला..’ गीत वैसे तो हम सभी अपने बचपन के दिनों में सुन चुके हैं परन्तु इस गीत के गायक रोहित चौहान ने इसे दुबारा एक नए कलेवर में अपने यूट्यूब चैनल से लांच किया है। लगभग 13 साल बाद दुबारा प्रस्तुत किए गए इस सुप्रसिद्ध गीत की सबसे बड़ी बात तो यह है कि इसमें दोनों बार अभिनय गौरव गैरोला ने ही किया है। धनतेरस के अवसर पर रिलीज हुए इस गीत के नाट्य रूपांतरण में गौरव का साथ देते हुए आइशा बिष्ट नजर आई है।
