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उत्तराखण्ड

रूद्रप्रयाग

एक परिचय एक मिसाल उषा मंगेश घिल्डियाल ,जिन्होंने वैज्ञानिक की नौकरी छोड़ चुनी एक स्वयंसेवी शिक्षिका की राह



देवभूमि दर्शन के लेखो में हम आपको ऐसे किसी ना किसी शख्सियत से जरूर रूबरू कराते है, जो अपने अनूठे कामो की वजह से समाज में लोकप्रिय हैं। हमारा उदेश्य सिर्फ यही नहीं हैं की आपको किसी कहानी से रूबरू कराये बल्कि यह भी उदेश्य हैं की आप समाज के ऐसे व्यक्तित्व की जीवनी से प्रेरित होकर समाज के उत्थान के लिए कार्य करे। आप अगर समाज में बदलाव लाना चाहते है तो उसके अनेक रास्ते है, ऐसे ही समाज में बदलाव का प्रयाश कर रही है, रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल की पत्‍नी ऊषा घिल्डियाल। ऊषा घिल्डियाल एक स्वयंसेवी शिक्षिका के रूप में ऐसी मुहिम में जुड़ गई हैं, जो ना जाने कितने बच्चो का भविष्य संवार रही है। दोनों पति पत्नी आज पुरे समाज के लिए एक मिसाल बन गये है।




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जी हाँ हम बात कर रहे है, सुर्खियों में रहने वाले डीएम मंगेश घिल्डियाल की पत्नी उषा घिल्डियाल की। डीएम घिल्डियाल ने जब राजकीय बालिका इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग का निरीक्षण किया था। यहां स्कूल में शिक्षिकाओं की कमी और छात्राओं की समस्याओ को देखते हुए काफी आहत हुए। घर आते ही उन्होंने अपनी पत्नी से इस बात पर चर्चा की। उनकी पत्नी स्वयंसेवी शिक्षक के रूप में इस मुहिम में जुड़ गईं। बता दे की रुद्रप्रयाग के डीएम मंगेश घिल्डियाल ने स्कूल लिया गोद जिले में कार्यभार संभालते ही शिक्षा की बेहतरी के प्रयास शुरू कर दिए थे। जिलाधिकारी ने शिक्षण सत्र 2018-19 के लिए रा.प्रा.वि सतेराखाल को गोद लिया है। जिलाधिकारी स्वयं निरीक्षण कर सभी व्यवस्थाओं का जायजा लेते है , शिक्षणेत्तर गतिविधियों से संबंधित सामग्री भी प्रदान करते है, जिसमे स्कूली बैग, स्वेटर, कापी व अन्य मूलभूत सुविधाएं रहती है। डीएम और उनकी पत्नी की इस पहल की रुद्रप्रयाग सहित अन्य स्थानों पर भी खूब सराहना हो रही है।




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साइंटिस्ट रह चुकी हैं उषा घिल्डियाल: उषा घिल्डियाल पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में साइंटिस्ट रह चुकी हैं। पहाड़ से पलायन रुके और यहां के छात्र-छात्राओं को अच्छी शिक्षा मिले इसके लिए वह खुद एक वैज्ञानिक के पद को छोड़कर पहाड़ के सरकारी विद्यालयों में बच्चों को विज्ञान विषय पढ़ाती है। उषा यह कार्य बिल्कुल मुफ्त में कर रही है। उषा करीब 2 से ढाई घंटे का समय बच्चों को देती हैं ताकि वह पढ़ लिख कर आगे अफसर बन सके। वे जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग स्थित राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में वह नवीं व दसवीं की छात्राओं को न सिर्फ नियमित रूप से अंग्रेजी पढ़ाती हैं, बल्कि उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण टिप्स भी देती हैं।




इससे पहले वह प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाने के साथ ही गणित, विज्ञान, अंग्रेजी के साथ-साथ बच्चों को राजीव गांधी व जवाहर नवोदय सहित सैनिक स्कूल प्रवेश परीक्षा की तैयारी करा चुकी हैं। वह रोज कई घंटे स्कूल में नियमित छात्राओं को पढ़ाती हैं। उन्हें पता है की बच्चो को पढाई के साथ साथ ,सामान्य ज्ञान की भी जानकारी होनी चाहिए इसलिए वो खुद उनके पाठ्यक्रम में उसका समावेश करती है। यहीं नहीं वह समय-समय पर छात्राओं के बीच किसी ज्वलंत विषय, मसलन साफ-सफाई, पर्यावरण, दहेज, बालिका शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा, पलायन, जल, जंगल और जमीन जैसे विषयों पर वाद-विवाद भी करवाती हैं।

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