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देवभूमि दर्शन स्पोर्ट्स/बैडमिंटन

उत्तराखण्ड के बेटे लक्ष्य सेन ने बैडमिंटन एशिया जूनियर चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीत कर रच दिया नया कीर्तिमान

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उत्तराखण्ड के बेटे लक्ष्य सेन ने बैडमिंटन एशिया जूनियर चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीत कर रच दिया नया कीर्तिमान



आज उत्तराखण्ड के युवा खेल जगत से लेकर सिनेमा जगत तक अपना और अपने प्रदेश का नाम रोशन कर रहे है। उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा जिले के बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने जकार्ता में चल रहे बैडमिंटन एशिया जूनियर चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीत कर उत्तराखण्ड के लिए ही नहीं वरन पूरे भारत के लिए नया कीर्तिमान रच दिया है। इसमें लक्ष्य ने पुरुष एकल वर्ग के फाइनल में थाईलैंड के खिलाड़ी कुनलावुत वितिदसार्न को मात दी। यह भी बता दे की इस चैम्पियनशिप में छठी सीड अंडर-19 के फाइनल में वितिदसार्न को 46 मिनटों के भीतर सीधे गेमों में 21-19, 21-18 से मात दी।





53 साल बाद लाया उत्तराखण्ड का बेटा गोल्ड मेडल – लक्ष्य एशिया जूनियर चैम्पियनशिप में स्वर्ण जीतने वाले तीसरे भारतीय बन गए हैं। लक्ष्य ने पिछले साल इस टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीता था। एशियाई पुरुष जूनियर वर्ग में 53 साल पहले 1965 में गौतम ठक्कर ने गोल्ड मेडल जीता था। उनके बाद पीवी सिंधु ने 2012 में महिला वर्ग का खिताब अपने नाम किया था। लक्ष्य सेन के गोल्ड जीतने के बाद भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) ने युवा खिलाड़ी लक्ष्य सेन को 10 लाख रुपये की नकद इनामी राशि देने की घोषणा की।









पिता की देखरेख में लक्ष्य ने सीखी बैडमिंटन की बारीकियां- बता दे की लक्ष्य के पिता डीके सेन बैडमिंटन के जाने-माने कोच हैं। और वर्तमान में प्रकाश पादुकोण अकादमी से जुड़े हैं। अपने पिता की देखरेख में लक्ष्य ने बचपन से ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया और वह मात्र चार साल की उम्र में स्टेडियम जाने लगे। लक्ष्य सेन के पिता के साथ साथ दादा सीएल सेन भी बैडमिंटन के उस्ताद है उन्हें अल्मोड़ा में बैडमिंटन का भीष्म पितामह कहा जाता है। उन्होंने कुछ दशक पहले अल्मोड़ा में बैडमिंटन की शुरुआत की। उनकी इस उपलब्धि से आज पुरे उत्तराखण्ड के नाम का परचम पूरे विश्व में लहराया है।

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