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उत्तराखण्ड

चम्पावत

उत्तराखण्ड : पहाड़ में चलती रोडवेज बस का तेल टैंक फटा,…. 40 यात्रियों में मची अफरा तफरी

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उत्तराखंड रोडवेज की बस में फिर एक बड़ा हादसा होने से टल गया अब इसे रोडवेज वर्कशाप कर्मियों की लापरवाही ही कहा जाएगा कि समय पर उसका रूटीन चेकअप नहीं किया गया जिसकारण सफर के बीच में ही बस का तेल टैंक फट गया। खबर राज्य के चम्पावत जिले से है जहां बीच रास्ते में तेल टैंक फट जाने से बस अनियंत्रित हो गई जिससे यात्रियों में अफरातफरी मच गई वो तो गनीमत रही कि बस चालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बस को सही जगह पर रोक लिया अन्यथा एक बार फिर एक बहुत बड़ा हादसा हो सकता था, जिसमें जान-माल के नुक़सान होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। बस के सही सलामत रूक जाने से यात्रियों ने उस समय तो राहत की सांस ली परंतु उनकी परेशानी यही समाप्त नहीं हुई अपितु रोडवेज प्रशासन के द्वारा यात्रियों को गंतव्य स्थान पर पहुंचाने के लिए भेजी गई दूसरी बस भी सड़क पर मलबा आने के कारण बीच रास्ते में ही फस गई, जिस कारण यात्रियों को सड़क में ही रात गुजारनी पड़ी।




प्राप्त जानकारी के अनुसार घटना राज्य के चम्पावत जिले के अमोड़ी में उस वक्त हुई जब रोडवेज के ‌पिथौरागढ़ डिपो की एक बस वाहन संख्या-यूके 07टीए 2849 यात्रियों को टनकपुर से पिथौरागढ़ की ओर लेकर जा रही थी। शनिवार शाम को यह हादसा अमोडी में उस वक्त हुआ जब अचानक बस का तेल टैंक फट गया। जिससे बस अनियंत्रित होकर हिचकोले खाने लगी। जिससे यात्री पूरी तरह सहमत ग‌ए और ऐसा लगा कि जैसे उनकी सास ही अटक गई हों। वो तो भला हो बस चालक किशोर का जिसने इस मुश्किल वक्त में भी अपने सूझबूझ का परिचय देते हुए बस को सुरक्षित स्थान पर रोक लिया, अन्यथा एक बड़ा हादसा टल गया। बताया गया है कि जिस वक्त यह घटना हुई उस समय बस में करीब 38-40 यात्री सवार थे। चालक द्वारा घटना की सूचना मिलने पर पिथौरागढ़ डिपो के अधिकारियों ने टनकपुर से दूसरी बस मंगवाई। टनकपुर से दूसरी बस वाहन संख्या- यूके 07 टीए 2817 के अमोडी पहुंचने पर यात्रियों ने राहत की सांस ली और उसी बस में यात्रियों को शिफ्ट कर उन्हें पिथौरागढ़ की ओर भेजा गया।




सड़क पर ही गुजारनी पड़ी यात्रियों को रात, सोया रहा प्रशासन और आपदा महकमा-:यात्रियों को पहले तो अमोडी‌ में रोडवेज प्रबंधन की लापरवाही से हुए हादसे का सामना करना पड़ा और फिर बरसात के कारण सड़क पर मलबा आने से उन्हें बीच सड़क में ही रात गुजारनी पड़ी। इस दौरान एक ओर तो यात्री सड़क पर रात गुजारने को मजबूर थे वहीं दूसरी ओर प्रशासन सहित पूरा आपदा महकमा चैन की नींद सो रहा था। यहां तक कि आपदा कंट्रोल रूम में बार-बार फोन कर सूचना देने पर भी उनकी नींद नहीं टूटी। कुल मिलाकर इस टनकपुर से पिथौरागढ़ तक के 150 किमी के सफर में यात्रियों की जमकर फजीहत हुई। हुआ यूं कि अमोडी से दूसरी बस में सवार होकर यात्री जैसे तैसे लोहाघाट तक तो पहुंच गए, लोहाघाट से जैसे ही उनकी बस बाराकोट में स्थित लीसा डिपो के पास पहुंची तो बरसात की वजह से सड़क पर मलबा आने गया और पूरी रोड बंद हो गई। जिस कारण चालक को बस को वहीं रोकना पड़ा, जिस कारण यात्रियों को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ा। यात्रियों का आरोप है कि कई बार आपदा कंट्रोल रूम एवं प्रशासन को घटना की जानकारी दी गई, लेकिन फिर भी यात्रियों को सुरक्षित निकालने के प्रयास नहीं किए गए। बहरहाल बस को रविवार सुबह मलबा हटाने के बाद गंतव्य की ओर रवाना किया गया।




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