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उत्तराखण्ड: दसवीं के छात्र ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर बताया कोरोना से जंग लड़ने का उपाय, देखें पत्र

uttarakhand: प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में सुझाएं ऐसे सुझाव कि पढ़कर आप भी करेंगे अभिनव की सूझबूझ की तारीफ..

हम जानते हैं कि डब्ल्यू एच ओ द्वारा कोरोना वायरस को वैश्विक महामारी घोषित किया जा चुका है। इस महामारी के प्रभाव से अपने नागरिकों को बचाने के लिए भारत समेत दुनिया के कई देशों में पूरी तरह लाॅकडाउन घोषित किया गया है क्योंकि अभी तक इस महामारी से निपटने का एक ही उपाय खोजा गया है और वो है समाजिक दूरी। देश के प्रधानमंत्री मोदी ने भी देश के नाम अपने संबोधन में इसका जिक्र करते हुए देशवासियों से हाथ जोड़कर समाज से दूरी बनाने की अपील की थी। इस समय जब देश इस महामारी के संकट से जूझ रहा है तो अनेक संस्थाएं एवं विभिन्न लोग मुश्किलों में घिरी भारत सरकार को आर्थिक रूप से मजबूती देने आगे आ रहें हैं। हर कोई अपनी तरफ से कोशिश कर रहा है कि वह इस मुश्किल घड़ी में भारत माता के काम आकर जन्मभूमि के प्रति अपना फर्ज निभाएं। आज हम आपको राज्य के ऐसे ही एक 15 वर्षीय बेटे से रूबरू करा रहे हैं जिसने देश के प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस महामारी से देश की अर्थव्यवस्था को बचाने का उपाय बताया है। जी हां.. हम बात कर रहे हैं राज्य के देहरादून निवासी अभिनव कुमार शर्मा की, जिन्होंने कोरोना के बढ़ते प्रभाव से देश की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए एक ऐसे उपाय के साथ प्रधानमंत्री मोदी के नाम ख़त लिखा है, जिससे आप भी अभिनव की छोटी सी उम्र में इतनी बड़ी सोच के कायल हो जाओगे।



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प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दी ऐसी सलाह कि हर कोई कर रहा तारीफ:-

प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के देहरादून जिले का रहने वाला 15 वर्षीय अभिनव कुमार शर्मा सेंट जोसेफ एकेडमी में दसवीं कक्षा का छात्र है। अभिनव के माता-पिता दोनों ही स्वास्थ्य सेवाओं में है। बता दें कि अभिनव ने बीते दिनों देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कोरोना वायरस से लडने की सलाह दी है। अभिनव का यह पत्र जहां एक ओर हम सभी को भावुक कर देने वाला है वहीं दूसरी ओर इसमें लिखे गए एक-एक शब्द से वर्तमान समय की गम्भीरता एवं अभिनव की दूरदर्शिता भी साफ-साफ झलकती है। देश के प्रधानमंत्री के नाम लिखे इस पत्र में अभिनव ने कहा है, “इस सम्भावना से बिल्कुल भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि कोरोना वायरस के कारण आया यह आपातकाल देश को वित्तीय आपातकाल की ओर ले जाएगा। इसलिए इस नाजुक वक्त में आर्थिक संकट को दूर करने के लिए यह आवश्यक है कि केंद्र सरकार देश की सभी धार्मिक संस्थाओं(मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारा, चर्च आदि) को आदेश दें कि भगवान के नाम पर जमा धन राशि में से 80 फीसदी राशि को प्रधानमंत्री राहत कोष में अनिवार्य रूप से यथाशीघ्र डोनेट करें।”


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भगवान को भी होगी खुशी यदि उनके दर पर दान किया गया पैसा उनके बच्चों को बचाने में काम आएं:-

भावुकता, गम्भीरता एवं दूरदर्शिता से भरे इस पत्र में अभिनव आगे लिखते हैं कि वो इस बात से है पूरी तरह आश्वस्त हैं कि भगवान भी अवश्य ही खुश होंगे यदि उनके बच्चों को बचाने में यह पैसा लगेगा और इससे हम सभी लोगों में मानवता के प्रति विश्वास और ज्यादा बढे़गा। इससे एक फायदा यह भी होगा कि लोग भविष्य में धार्मिक संस्थाओं को दान देने से बिल्कुल भी नहीं हिचकेंगे। सबसे बड़ी बात तो यह है कि 15 वर्ष की खेलने-कूदने की उम्र में जबकि हर किसी का ध्यान खेलने-कूदने में ही होता है कहीं और नहीं, ऐसे में अभिनव कोरोना वायरस पर तब से नजर रखे हुए हैं जबसे वह चीन के वुहान शहर में फैला है। यह बात महामारी के प्रति उनकी गम्भीरता को भी दिखाती है। इसलिए वह आगे लिखते हैं कि ऐसे में जबकि हमारे पास सामाजिक दूरी बनाए रखने के अलावा इस महामारी से निपटने का कोई उपाय नहीं है तब अगर आपके द्वारा लाॅकडाउन को कुछ दिन और बढ़ा दिया जाए तो किसी को कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए लेकिन आपको यह ध्यान रखना होगा कि इस दौरान बेहतर व्यवस्थाएं होनी चाहिए जिससे किसी को कोई परेशानी न हो।


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