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उत्तराखण्ड

पिथौरागढ़

पंचतत्व में विलीन हुए पंत, बेटे ने दी मुखाग्नि राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

उत्तराखंड की राजनीति के दिग्गज और कद्दावर नेता कहें जाने वाले राज्य के दिवंगत वित्त मंत्री प्रकाश पंत आज पंचतत्व में विलीन हो गए। संसदीय ज्ञान के भंडार भाजपा के कद्दावर नेता का प्रकाश अब सदा-सदा के लिए अस्त हो गया। दोपहर बाद करीब तीन बजे के आसपास समस्त अंतिम कार्य करने के बाद दिवंगत पंत के आवास से निकाली गई अंतिम यात्रा में भारी जनसमूह उमड़ पड़ा। जब तक सूरज चांद रहेगा, पंत जी आपका नाम रहेगा, प्रकाश पंत अमर रहे के नारो से गूंजायमान करीब पांच बजे के आसपास जिले के रामेश्वर स्थित श्मशान घाट पहुंची। अंतिम यात्रा में अपने लोकप्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए भारी जनसमूह के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत, लोकसभा सांसद अजय टम्टा, पिथौरागढ़ एवं चम्पावत जिलों के सभी विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों सहित भाजपा सहित विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के तमाम गणमान्य नेता मौजूद थे। नम आंखों के बीच करीब छः बजकर 15 मिनट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ दिवंगत वित्त मंत्री का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनके बेटे सौरभ ने पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी।




बता दें कि आज दोपहर बाद करीब एक बजे पिथौरागढ़ जिले के दिवंगत विधायक प्रकाश पंत का पार्थिव शरीर नैनीसैनी हवाई अड्डे पहुंचा। जिसके बाद उनके पार्थिव शरीर को सम्मान अंतिम दर्शनों के लिए देवसिंह मैदान लाया गया। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर मैदान में पहुंचा गगनभेदी नारों के बीच समूचा माहौल गमगीन हो गया। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मानव संसाधन एवं विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, राज्य सभा सांसद अनिल बलूनी, केन्द्रीय मंत्री अश्वनि चौबे, मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत लोकसभा सांसद अजय टम्टा, अजय भट्ट पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी जैसे क‌ई गणमान्य दिग्गजों ने स्व पंत के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। बताते चलें देवसिंह मैदान पर सुबह से ही विशाल संख्या में उमड़े जनसमूह ने भी नम आंखों से अपने लोकप्रिय नेता के अंतिम दर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद पंत के पार्थिव शरीर को उनके घर ले जाया गया। बेटे के पार्थिव शरीर को देखते ही बुजुर्ग माता-पिता सहित सभी पारिवारिक जन बेसुध हो ग‌ए। माता-पिता की आंखों से अश्रुओं की धारा रूकने का नाम ही नहीं ले रही थी।




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