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उत्तराखण्ड

नैनीताल

उत्तराखण्ड के बेटे ने की पहाड़ी रीती रिवाज से विदेशी लड़की से शादी , लड़की के परिजन हुए पहाड़ी रीती रिवाज के कायल




उत्तराखण्ड की संस्कृति और परम्परायें अपने में इतने खाश है की भारत के साथ साथ अब पूरी दुनिया यहाँ की संस्कृति की कायल हो गयी है। वैसे तो उत्तराखण्ड में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही लगी रहती है ,लेकिन ये खबर किसी पर्यटन से नहीं जुडी है बल्कि दो देशो की संस्कृति के मिलाप से आपको रूबरू कराने वाली है। जी हाँ सात समुंदर पार (अमेरिका) निवासी युवती जैनी हैमीलटन से हल्द्वानी के युवक रचित लोहनी ने सात फेरे लेकर युवती को भी पहाड़ी संस्कृति के बंधन में बांध दिया।




बता दे की हल्द्वानी निवासी उमेश चंद्र लोहनी का बेटा रचित लोहनी अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर है। अमेरिका में रचित की मुलाकात थॉमस इनग्रम हैमीलटन की बेटी जैनी हैमीलटन से हुई और दोनों एक दूसरे के काफी अच्छे मित्र बन गए , धीरे धीरे उनकी ये दोस्ती प्यार में तब्दील हो गयी।रचित के साथ बातचीत और यहाँ के रीती रिवाजो को जानकर जैनी हैमीलटन रचित के और भी करीब आ गयी बस फिर क्या था, एक दूसरे को समझने के बाद दोनों ने इस प्यार को शादी में बदलने का फैसला ले लिया। सबसे खाश बात तो ये है की दोनों ने पहले अमेरिका में शादी की। इसके बाद युवती अपने परिवार के 12 सदस्यों के साथ यहां भी रीति रिवाज के साथ के शादी करने पहुंची। रचित के परिजनों ने रामनगर छोई स्थित कॉर्बेट द ग्रेट रिजॉर्ट को शादी के लिए बुक किया। युवती का परिवार कुमाऊंनी रीति रिवाजों से बेहद प्रभावित हुए। युवती की माँ तो कुमाऊंनी रीति रिवाज से इस कदर प्रभावित हुई कि दुल्हन के साथ उसने भी यहां के पारंपरिक परिधान धारण किए। अब बुधवार को हल्द्वानी में रिसेप्शन का कार्यक्रम है।




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इस से पहले भी ऐसी विशेष शादी मार्च में नैनीताल के हल्द्वानी शहर में देखने को मिली थी। बता दे की हल्द्वानी की रहने वाली शिम्पी वर्मा अमेरिका में वार्नर ब्रदर्स कम्पनी में काम करती थी , जो की वहां की प्रतिष्ठित फिल्म बनाने वाले कंपनी है और इनके पिता हल्द्वानी में शशि कुमार वर्मा सेंचुरी पेपर मिल (लालकुआँ) से सीनियर मैनेजर के पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। अमेरिका में शिम्पी की मुलाकात हुई वहां के रहने वाले जे स्टेनहन से जो कि जीआईएसएफ स्पेशलिस्ट हैं। शिम्पी और जे स्टेनहन की मुलाकात और ये मुलाकात कब प्यार में बदल गयी उन्हें ही पता नहीं चला। हाँ  शिम्पी  ये जरूर चाहती थी की उनका विवाह कुमाऊंनी रीति रिवाजों से हो तो उसने ये बात जे स्टेनहन के साथ साझा की तो जे स्टेहन ने भी हामी भर दी।




देखते ही देखते 12 मार्च को शादी का दिन भी तय हो गया , तो फिर क्या था जे स्टेनहन और उनके साथ 40 अमेरिकी रिश्तेदार हल्द्वानी पहुँच गये,उसके बाद अमेरिकी दूल्हा और अमेरिकी बाराती भारतीय परिधान में हल्द्वानी में बारात की झांकी निकालते दिखे , ये नजारा इतना खूबसूरत था की लोग अपनी अपनी छतो से बस बारात को ही निहार रहे थे।




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