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उत्तराखण्ड: पिता पहाड़ में चलाते हैं दुकान…और बेटी वैशाली बनी सेना में लेफ्टिनेंट

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देश के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड की बेटियां भी आज पूरी दुनिया में छाई हुई है। आज ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां राज्य की बेटियों ने कदम ना रखा हों। बात सेना में भर्ती होकर देशसेवा करने की करें तो देवभूमि उत्तराखंड हमेशा ही इस क्षेत्र में अग्रणी रहा है। कुछ वर्ष पहले तक जहां इस क्षेत्र में पुरुषों का एकछत्र राज था वहीं बीते कुछ समय से राज्य की बेटियों ने भी इस कठिन परिश्रमी क्षेत्र को चुनकर यह साबित कर दिया है कि वह आज लड़कों से कहीं भी पीछे नहीं है। आज हम राज्य की एक और ऐसे ही होनहार बेटी से रूबरू करा रहे हैं जिसने न सिर्फ सेना में जाकर देशसेवा करने को अपने कैरियर के रूप में चुना बल्कि एक लेफ्टिनेंट बनकर माता-पिता के साथ ही ‌अपने सपने का एक शानदार मुकाम भी पाया। जी हां.. हम बात कर रहे हैं राज्य के अल्मोड़ा जिले की रहने वाली वैशाली हर्बोला की, जो बीते बृहस्पतिवार को मुम्बई में आयोजित हुई पासिंग आउट परेड के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने गई है। इस पासिंग आउट परेड में वैशाली के माता-पिता भी सम्मिलित हुए और उन्होंने खुद बेटी के कंधे पर सितारे लगाकर उसे सेना को समर्पित किया। इस दौरान उनके चेहरों की खुशी देखते ही बनती थी।




प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के अल्मोड़ा जिले के रानीखेत छावनी के कुंपुर लालकुर्ती में रहने वाले हरीश चंद्र हर्बोला की बेटी वैशाली हर्बोला बीते बृहस्पतिवार को चार साल की एमएनएस (मिलिट्री नर्सिंग सर्विस) की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सेना में लेफ्टिनेंट बन गई है। बता दें कि मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के ही चौखुटिया के महतगांव की रहने वाली वैशाली के पिता हरीश रानीखेत के ही सुभाष चौक में दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी माता मंजू देवी एक कुशल गृहिणी हैं। अपनी प्रारंभिक शिक्षा रानीखेत के कनोसा कांवेंट से पूरी करने वाली वैशाली ने केंद्रीय विद्यालय से इंटर करने के पश्चात एमएनएस के लिए आवेदन किया और इसमें भी वह पहले ही प्रयास में वह सफल हो गईं। जिसके बाद उसने मुंबई के कोलावा में चार साल का कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया और वहां से एक लेफ्टिनेंट बनकर निकली। उनकी इस उपलब्धि से जहां माता-पिता गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं वहीं पूरे क्षेत्र में भी खुशी की लहर है। उनकी पहली पोस्टिंग पंजाब के अंबाला में हुई है।




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