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उत्तराखण्ड: सरकारी अस्पताल ने किया था रेफर, 108 एंबुलेंस में कर्मियों ने कराया सुरक्षित प्रसव

सरकारी अस्पताल बनें रेफर सेंटर, 108 कर्मियों ने करवाया सुरक्षित प्रसव(delivery of baby)…
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उत्तराखण्ड के पर्वतीय जिलों में अस्पतालों की खस्ता हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस मरीज को अस्पतालों में बैठे डॉ• हायर सेंटर रेफर कर रहे हैं उसे 108 कर्मियों द्वारा सुरक्षित रूप से हैंडल किया जा रहा है। बात अगर गर्भवती महिलाओं के प्रसव (delivery of baby)कराने जैसे संवेदनशील मामलों की करें तो चिकित्सकों द्वारा थोड़ी भी जटिलता होने पर गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर कर दिया जा रहा है। ताज्जुब वाली बात तो यह है कि रेफर की गई महिलाओं के 108 एंबुलेंस में सफल प्रसव(delivery of baby) हो रहे हैं। इससे साफ-साफ पता चलता है कि सरकारी अस्पताल महिलाओं के प्रसव कराने के मामले में कितनी कोताही बरत रहे हैं। ताजा मामला राज्य के पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट के सरकारी अस्पताल का है, जहां एडमिट हुई एक गर्भवती महिला को चिकित्सकों ने खराब हालत का हवाला देते हुए महिला अस्पताल पिथौरागढ़ रेफर कर दिया। परंतु अस्पताल पहुंचने से पहले ही महिला की प्रसव पीड़ा बढ़ गई। जिस पर 108 कर्मियों ने रास्ते में ही महिला का प्रसव कराने का निर्णय लिया और वाहन को सड़क के किनारे खड़ा कर उन्होंने ‌महिला का सफल प्रसव (delivery of baby) भी करा दिया। अब यहां यह कहना बिल्कुल भी ग़लत नहीं होगा कि चिकित्सकों की भारी कमी से गुजर रहे पहाड़ों के अस्पताल अब मात्र रेफरल सेंटर बन कर रह गए हैं।


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प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट क्षेत्र के जेठी गांव की महिला लक्ष्मी देवी को बीते गुरुवार की सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई। जिस पर परिजनों ने महिला को डीडीहाट स्वास्थ केंद्र में भर्ती कराया। परिजनों का कहना है कि करीब साढ़े ग्यारह बजे अस्पताल में तैनात स्टाफ ने उन्हें बताया कि महिला का हीमोग्लोबीन काफी कम है जिस कारण महिला की हालत खराब है। इतना कहने के बाद चिकित्सकों ने उक्त गर्भवती महिला को महिला अस्पताल पिथौरागढ़ रेफर कर दिया और 108 एंबुलेंस महिला को लेकर पिथौरागढ़ जिला अस्पताल के लिए रवाना हुई। जैसे ही एम्बुलेंस सतगढ़ के पास पहुंची तो महिला की प्रसव पीड़ा और ज्यादा बढ़ गई।‌ महिला की हालत को देखते हुए 108 वाहन में तैनात ईएमटी सोनिया मेहरा और पायलट विजेंद्र धानिक ने सूझबूझ भरा निर्णय लेते हुए वहीं पर महिला का प्रसव (delivery of baby) कराने का फैसला लिया। जिस पर उन्होंने ‌108 ड्राइवर से वाहन‌ को रोककर सड़क किनारे खड़ा करने‌ को कहा और फिर दोनों ने महिला का सुरक्षित प्रसव(delivery of baby) करा दिया। 108 कर्मियों के इस सूझबूझ भरे फैसले और अभूतपूर्व कार्य की चर्चा आज पूरे क्षेत्र में हो रही है। बताया गया है कि जच्चा-बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है और उन्हें कनालीछीना स्वास्थ केंद्र में भर्ती कराया गया है।


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