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पिथौरागढ़ में प्रसव के 24 घंटे बाद महिला की मौत छोड़ गई दुधमुही बच्ची को, परिजनों में आक्रोश

महिला अस्पताल में चिकित्सकों की कार्यशैली पर सोशल मीडिया में फिर उठ रहे सवाल..
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अपने विवादों के कारण हमेशा सुर्खियों में रहने वाले पिथौरागढ़ जिले के महिला अस्पताल से दुखद खबर आ रही है। एक ऐसी खबर जिसको सुनकर कोई पत्थर दिल भी पिघल जाए। खबर है कि महिला अस्पताल में एडमिट एक गर्भवती महिला की प्रसव (delivery of baby) के एक दिन बाद ही मौत हो गई। प्रसव के बाद हुई इस घटना से जहां नवजात बच्ची के सर से मां का साया उठ गया वहीं वह मां की ममता के साथ ही उसके दूध से भी वंचित हो गई। अभी तो बच्ची को ढंग से मां की गोद भी नसीब नहीं हुई थी कि इससे पहले ही विधाता ने उसकी मां को उससे छिन लिया। नवजात बच्ची और उसके परिवार पर इस समय बीत रहे दुःखद समय की तो हम कल्पना भी नहीं कर सकते लेकिन उनकी एक छोटी-सी गलती इतनी भारी पड़ेगी ये तो कोई भी नहीं सोच सकता दर‌असल इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि उक्त महिला की मौत पानी पीने की वजह से हुई है, जिसमें उनकी कोई गलती नहीं है उल्टा उन्होंने तो महिला को बचाने की हरसंभव कोशिश की। परंतु परिजनों के द्वारा सोशल मीडिया में डाक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर लगाए जा रहे हैं कि उनकी लापरवाही के कारण महिला की मौत हुई। वैसे पिथौरागढ़ महिला अस्पताल में यह इस तरह का कोई पहला मामला नहीं है अपितु पिछले 2 महीने पहले भी प्रसव (delivery of baby) के दौरान 2 महिलाएं काल के ग्रास बन चुकी है।


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चिकित्सकों का कहना जीवन देने वाला पानी बना मृतका का काल:- प्राप्त जानकारी के अनुसार पिथौरागढ़ जिले के महिला अस्पताल में 1 फरवरी, शनिवार को रात के 9 बजे एक गर्भवती महिला नेहा उर्फ नीलम बोरा एडमिट हुई। नेहा जिले के डीडीहाट की रहने वाली थी और उसका पति डिगबर बोला ब्लाक में ही संविदा के पद पर कार्यरत हैं। बताया गया है कि उसी रात को ढाई बजे के आसपास डाक्टरों के द्वारा चेकअप के बाद उसे आपरेशन थियेटर में ले जाया गया। आपरेशन से उसने एक खूबसूरत बच्ची को जन्म दिया। लेकिन आपरेशन के बाद आंतरिक रक्तस्राव केकारण उसकी हालत बिगड़ती गई और उसने 3 फरवरी को सुबह करीब साढ़े आठ बजे अस्पताल परिसर में ही दम तोड दिया। परिजनों का आरोप है कि नेहा की मौत के बाद उन्हें न तो मृतका का मुंह दिखाया गया और ना ही मृतका नेहा के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। उन्हें मृतका का शव कपड़े से सील करके दिया गया और मौत का कारण पूछने जाने पर उन्हें दोषी ठहराते हुए मृतका के द्वारा पानी पीना बताया गया। वहीं इस मामले में चिकित्सकों का कहना है कि आपरेशन के बाद महिला की हालत को देखते हुए उसे बताया गया था कि अगले 3 दिनों न तो खाना है और ना ही पानी पीना है लेकिन महिला ने परहेज न करते हुए पानी पी लिया जिससे उसकी मौत हो गई। बहरहाल सच क्या है ये तो जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन महिला अस्पताल के पिछले रिकॉर्ड को देखते हुए परिजनों के आरोप को भी सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता। (delivery of baby)


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