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चम्पावत

दो नक्सलियों को ढेर करने वाले उत्तराखण्ड के लाल गणेश को मिला राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार

उत्तराखण्ड के लाल गणेश ने अपनी जान की बाजी लगाकर दो नक्सलियों को किया था ढेर, राष्ट्रपति ने किया सम्मानित..
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देवभूमि उत्तराखंड (uttarakhand) को यूं ही सैन्य धाम नहीं कहा जाता अपितु इसका सबसे बड़ा कारण उत्तराखण्डियों का देशसेवा में योगदान है। जहां जनसंख्या अनुपात के हिसाब से सेना में यहां के वाशिंदों की संख्या अन्य राज्यों की अपेक्षा काफी ज्यादा है वहीं राज्य ने क‌ई ऐसे वीर सपूत सेना को दिए जिन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर भी दुश्मनों से अपनी मातृभूमि को बचाया है। राज्य के इन बहादुर सपूतों की वीरता, साह और जज्बे को पूरा देश सलाम करता है। आज हम आपको राज्य के एक ऐसे ही जाबांज सपूत से रूबरू करा रहे हैं जिसने अपनी जान की बाजी लगाकर न सिर्फ दो नक्सलियों को मौत के घाट उतार दिया बल्कि राष्ट्रपति से वीरता का पुलिस मेडल प्राप्त कर सम्पूर्ण उत्तराखण्ड (uttarakhand) का मान भी बढ़ाया। जी हां.. हम बात कर रहे हैं राज्य के चम्पावत जिले के रहने वाले गणेश सिंह राणा की, जिन्होंने आमने-सामने की लड़ाई में अपनी जान की परवाह ना करते हुए दो नक्सलियों को मौत के घाट उतारकर अपनी वीरता का परिचय दिया। वर्ष 2015 से एस‌एसबी में तैनात गणेश को उनके इस साहसपूर्ण कार्य के लिए गणतंत्र दिवस के दिन राष्ट्रपति ने पुलिस पदक(वीरता) से सम्मानित किया। राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित होने पर गणेश के परिवार सहित पूरे क्षेत्र में हर्षोल्लास का माहौल है।

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बता दें कि राज्य के चम्पावत जिले के बनबसा निवासी गणेश सिंह राणा पुत्र स्व. नारायण सिंह को राष्ट्रपति ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर पुलिस मेडल (वीरता) से सम्मानित किया है। बताते चलें कि एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले गणेश एसएसबी की 35वीं बटालियन के स्माल एक्शन टीम के सदस्य हैं और वर्ष 2015 से झारखंड के सर्वाधिक नक्सल प्रभावित जिला दुम्का में तैनात हैं। बताया गया है कि वर्ष 2018 में गणेश और उनकी टीम नक्सल प्रभावित जंगलों में गश्त कर रही थी तभी अचानक से नक्सलियों ने सामने से उनकी टीम पर फायरिंग कर दी। सामने से अचानक हुई गोलीबारी से गणेश घबराए नहीं अपितु उन्होंने वही डटकर नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब दिया। आमने-सामने की लड़ाई में उन्होंने तुरंत एक पेड़ की आड़ लेकर दो नक्सलियों को मौके पर ही ढेर कर दियाया। जिससे हतोत्साहित होकर बाकी नक्सली जंगल की ओर भाग निकले। उनके इस वीरतापूर्ण एवं‌ साहसिक कार्य के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गणतंत्र दिवस पर उन्हें पुलिस मेडल (वीरता) से नवाजा। सबसे खास बात तो यह है कि अपने पांच वर्ष के सेवाकाल में ही गणेश अपनी बहादुरी के लिए अनेक पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं जिनमें वर्ष 2019 में एसएसबी के डीजी द्वारा स्वर्ण पदक एवं उनको मिले चार प्रशस्ति पत्र भी शामिल हैं।

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