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Pallavi goshwami of garur Bageshwar became Lieutenant in army
फोटो: पल्लवी गोस्वामी (सोशल मीडिया)

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उत्तराखण्ड बागेश्वर

उत्तराखंड: गरुड़ की पल्लवी गोस्वामी बनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बढ़ाया प्रदेश का मान

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Pallavi Goswami army Lieutenant: सैन्य परिवार से ताल्लुक रखती है पल्लवी गोस्वामी, चार वर्ष के कठिन प्रशिक्षण के बाद हासिल किया सेना में लेफ्टिनेंट बनने का मुकाम…

Pallavi Goswami army Lieutenant
राज्य की होनहार बेटियां आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। खासतौर पर देवभूमि की बेटियों का सैन्य क्षेत्रों में सम्मिलित होकर मां भारती की सेवा करने का जज्बा वाकई सराहनीय है। राज्य के बेटों के कंधे से कंधा मिलाकर सैन्य क्षेत्रों की राह चुनने वाली इन होनहार बेटियों से हम आपको आए दिन रूबरू कराते रहते हैं इसी कड़ी में आज हम आपको राज्य की एक और ऐसी ही होनहार बेटी से रूबरू कराने जा रहे हैं जो भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बन गई है। जी हां… हम बात कर रहे हैं मूल रूप से राज्य के बागेश्वर जिले के गरूड़ तहसील क्षेत्र के कफलढूंगा गांव निवासी पल्लवी गोस्वामी की, जिन्होंने 4 वर्ष के कठिन प्रशिक्षण के बाद भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनने का मुकाम हासिल किया है। पल्लवी की इस अभूतपूर्व उपलब्धि से जहां उनके परिवार में हर्षोल्लास का माहौल है वहीं उनके घर पर भी बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
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Pallavi Goswami Garur Bageshwar
प्राप्त जानकारी के अनुसार मूल रूप से राज्य के बागेश्वर जिले के गरूड़ तहसील क्षेत्र के देवनाई, कफलढूंगा गांव निवासी पल्लवी गोस्वामी ने अपनी इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई आर्मी पब्लिक स्कूल से की है। तदोपरांत उन्होंने मिलिट्री नर्सिंग की परीक्षा उत्तीर्ण कर ट्रेनिंग के लिए नर्सिग कमांड हॉस्पिटल कॉलेज लखनऊ से चार वर्षीय कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया। जिसके बाद लेफ्टिनेंट के लिए कमिशन लेकर उन्होंने शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा लिया। इस दौरान उनके माता-पिता ने स्वयं बेटी के कंधों पर सितारे सजाकर उन्हें भारतीय सेना को समर्पित किया। बता दें कि एक सैन्य परिवार से ताल्लुक रखने वाली पल्लवी के पिता नारायण गिरी गोस्वामी जहां भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सूबेदार है जबकि उनकी मां रेखा गोस्वामी एक कुशल गृहिणी हैं। पल्लवी ने अपनी इस अभूतपूर्व उपलब्धि का श्रेय अपने नाना नारायण गिरी, माता-पिता, एम्स पटना में नियुक्त नर्सिंग आफिसर बड़ी बहन दीक्षा और 94 वर्षीय दादा बालागिरी को दिया है।

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