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Uttarakhand: IAS Vandana Singh Chauhan success Story upsc success story

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IAS DM VANDANA SINGH

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IAS Vandana Singh success Story: कौन हैं आईएएस वंदना सिंह चौहान जानिए

IAS Vandana Singh Success story : वर्तमान में नैनीताल जिले की जिम्मेदारी संभाल रही हैं आईएएस अधिकारी वंदना सिंह चौहान, जाने इनकी कामयाबी की दास्तां….

उत्तराखंड शासन द्वारा हाल ही में IAS, PCS और 3 जिलों में कार्यरत जिलाधिकारियों (डीएम) के तबादले किए गए हैं। वर्तमान में नैनीताल के डीएम के रूप में रह रहे आईएस धीराज सिंह गर्ब्याल की जगह अल्मोड़ा के डीएम रह चुकी आईएस वंदना सिंह चौहान को नैनिताल जिले की कमान सौंपी गई है। आईएएस वंदना सिंह चौहान नैनीताल जिले की 48 डीएम एवं जिले के पांचवीं महिला जिला अधिकारी (DM) बनी है। बेहद कर्मठ जुझारू एवं हर हाल में अपने सपनों को पूरा करने वाली आईएस वंदना सिंह चौहान एक मेहनती एवं अपने वादों के प्रति ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ आईएएस अफसर (IAS OFFICER) एवं डीएम (DM) है जो वर्तमान में कई लड़कियों की प्रेरणा स्रोत है। इन्होंने अपने दम पर डीएम बनने का सफर पूरा किया है और देश की सबसे कठिन परीक्षा यूपीएससी (UPSC) पास कर सभी का गौरव बढ़ाया है जिसके लिए आज हर कोई इनको प्रेरणा स्रोत के रूप में देखता है। तो चलिए नैनीताल जिले के डीएम के रूप में पदभार संभालने वाली वंदना सिंह चौहान के जीवन के कुछ पहलू पर नजर डालते हैं।
(IAS Vandana Singh success Story)
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बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली वंदना सिंह चौहान बचपन से ही बहुत जुनूनी थी। वह हरियाणा की रहने वाली है इनका जन्म अप्रैल 1990 को हरियाणा के नसरुल्लागढ़ में हुआ है। बचपन में ही पढ़ाई लिखाई की शौकीन आईएएस वंदना सिंह चौहान आंखो में ऊंची उड़ान भरने वाली सपना देखा करती थी और आईएएस बन देश के लिए कुछ कर गुजरने का सोचा करती थी। मगर उनके गांव और घर में रूढ़िवादी सोच के कारण लड़कियों को पढ़ाई करने की इजाजत नहीं दी जाती थी। आईएस वंदना सिंह अपने पिता महिपाल सिंह से पूछा करती थी कि मुझे पढ़ाई के लिए बाहर कब भेज रहे हो, मुझे भी और लड़कियों की तरह आगे पड़ना है। पिता के सामने बार–बार आगे पढ़ने की जिद ने उनके पिता महिपाल सिंह को सोचने के लिए मजबूर किया और बेटी की जिद देख पिता महिपाल ने भी वंदना सिंह को आगे पढ़ाने और गांव से बाहर भेजने की ठान ली।
(IAS Vandana Singh Success story )
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आईएस वंदना सिंह की शुरुआती पढ़ाई उनके गांव के सरकारी स्कूल में ही हुई है बाद में पिता से बार-बार आगे पढ़ाने की जिद उन्हें गांव से बाहर मुरादाबाद में स्थित कन्या गुरुकुल में शिक्षा हासिल करने के लिए ले आई। उन्होंने अपनी 6 से 12वीं तक की पढ़ाई मुरादाबाद की कन्या गुरुकुल में हासिल की है। 12वीं के बाद वंदना सिंह ने अपने भाई और पिता के समर्थन से अपनी लॉ की पढ़ाई पूरी की और इसी के साथ-साथ घर पर रहते ही यूपीएससी की तैयारी भी की। यूपीएससी देश की सबसे कठिन परीक्षा में से एक मानी जाता है। जिसको करने के लिए लोग दिन-रात मेहनत और कई बड़े बड़े संस्थानों से कोचिंग भी करते हैं। मगर IAS वंदना सिंह चौहान ने बिना किसी कोचिंग सेंटर के घर पर ही 15 से 18 घंटे जी तोड़ मेहनत करके पहले ही प्रयास में UPSC की परीक्षा में ना सिर्फ सफलता हासिल की बल्कि हिंदी मीडियम की छात्रा होने के बावजूद भी पहली ही बार में सफलता अर्जित की और 24 साल की उम्र में 2012 में ऑल इंडिया यूपीएससी की 8 वी रैंक हासिल करके अपना आईएस बनने का सपना पूरा किया।
(IAS Vandana Singh Success story )
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DM वंदना सिंह चौहान देश कि उन लड़कियों में शामिल है जो महिला सशक्तिकरण के लिए मिसाल है और सभी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। जिन्होंने अपने गांव और घर परिवार के सभी लोगों की रूढ़िवादी सोच को बदल कर जी तोड़ मेहनत से अपना आईएएस बनने का सपना पूरा किया और अपने साथ-साथ अपने गांव और समाज की अन्य लड़कियों और महिलाओं को रूढ़िवाद सोच से आगे बढ़ कुछ कर गुजरने की प्रेरणा दी। आज सभी लोग इनको अपनी प्रेरणा स्रोत मानते हैं और इनके जैसा जुनून लेकर आईएएस बनने का सपना देखते हैं। नैनीताल जिले की 48 वी डीएम बनी वंदना सिंह चौहान बताती है कि उन्हें आईएएस बनने का जुनून इस प्रकार सर पर सवार था कि उन्होंने अपने घर पर कूलर तक नहीं लगाया, क्योंकि कूलर से ठंडी हवाएं चलने के कारण पढ़ाई लिखाई में मन नहीं लगता और नींद आने लगती है जिसमें मन एकाग्र नहीं हो पाता। वंदना सिंह चौहान पिथौरागढ़ की पहली महिला मुख्य विकास अधिकारी भी रह चुकी है। साल 2017 में वह पिथौरागढ़ जिले की पहली महिला सीडीओ (CDO) भी बनी थी और साल 2020 तक उन्होंने पिथौरागढ़ में सेवाएं दी और इसी दौरान वह बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रॉड अंबेसडर भी रही थी।

बता दें कि 2020 में उन्हें सबसे पहले रुद्रप्रयाग का डीएम बनाया गया था। जिसके बाद 12 नवंबर को उन्हें के KMVN (कुमाऊं मंडल विकास निगम) का एमडी बनाया गया। लेकिन उन्होंने KMVN में नियुक्ति नहीं दी तो उन्हें ग्राम विकास का अपर सचिव बनाया गया। उसके बाद साल 2021 में वह अल्मोड़ा की जिला अधिकारी के रूप में कार्यरत हुई थी। जिसके बाद ठीक 2 साल बाद और 2023 में वह नैनीताल की 48 DM बनी है और वर्तमान में वह नैनीताल जिले की डीएम के रूप में कार्यभार संभाल रही हैं। वर्तमान में वह नैनीताल जिले की पांचवीं महिला डीएम है। तो यह थी अपने जिद और जुनून से आईएएस बनने का सपना पूरा करने वाली वर्तमान में नैनीताल जिले की डीएम और होनहार जिला अधिकारी IAS वंदना सिंह चौहान जो आज हर किसी के लिए प्रेरणा के स्रोत है। जिन्होंने यह साबित कर दिखाया कि अगर आप में भी कुछ करने का जुनून है तो कोई भी चीजें आपको उसे पाने से नहीं रोक सकती बस शर्त यह है कि आपने उसे पाने के लिए जी तोड़ मेहनत की हो और अपने सपने को लेकर पूरी तरह से ईमानदार हो।
(IAS Vandana Singh Success story )

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