Gobaradi village Pithoragarh cave: पिथौरागढ़ के गोबराडी गांव में मिली दूसरी रहस्यमई गुफा, समुद्र मंथन के मेरु पर्वत जैसा आकार….
Gobaradi village Pithoragarh cave: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गोबराडी गांव मे एक हफ्ते के भीतर दूसरी रहस्यमई गुफा मिली है जिसका आकार समुद्र मंथन के मेरु पर्वत जैसा प्रतीत हो रहा है। गोबराडी गांव में मिलने वाली इस गुफा को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं होने शुरू हो गई है जिस पर कुछ लोगों का मानना है कि यह सुरंग नैनीताल अल्मोड़ा जैसे अन्य स्थानों पर भी मौजूद है जिसे लोग कत्यूरी शासन काल का मान रहे है ।
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बता दें पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट क्षेत्र के गोबराड़ृी गांव में एक नई सुरंग प्रकाश में आई है जो पूर्व मध्य कत्यूरी काल की बताई जा रही है । जिसे लोग कत्यूरी शासन काल के एक सैन्य मोर्चा का प्रतीत मान रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि इस तरह की सुरंग नैनीताल अल्मोड़ा आदि स्थानों पर भी है। गोबराड़ी की यह सुरंग समुद्र मंथन के समय प्रयोग में लाए गए मेरु पर्वत की तरह दृश्य मान है जिसके अंदर मलवा जमा था जिसे हटा दिया जाए तो यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन सकता है। बीते गुरुवार को क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉक्टर चंद्र सिंह चौहान के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम निरीक्षण के लिए पहुंची जहाँ पर निरीक्षण के बाद डॉक्टर चौहान ने बताया कि यह सुरंग कत्यूरी शासन काल के दौरान सैन्य मोर्चा के रूप में प्रयोग में लाई जाती थी। जिसके चारों तरफ बहने वाली नदी के मध्य ऊंचाई पर स्थित इस स्थल से चारों तरफ नजर जाती है।
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didihat Pithoragarh cave news सुरंग के निरीक्षण के दौरान देखा गया कि यह सिंगल लाइन फॉर्मेशन वाली सुरंग है जबकि नैनीताल के कल्याणपुर की सुरंग में डबल लाइन परफॉर्मेंस है। जिससे अंदेशा लगाया जा रहा है की सिंगल लाइन पर सैनिक एक लाइन में एक तरफ चलते होंगे। इतना ही नहीं बल्कि इसके चारों तरफ का भूगोल स्थित है जिससे स्पष्ट होता है कि सैन्य दृष्टि से मोर्चा बंदी के लिए उपयुक्त है। सुरंग में सिर्फ एक व्यक्ति सामान के साथ चल सकता है हालांकि सामान उठाने के लिए दूसरे की मदद की आवश्यकता होगी। सुरंग के अंदर जमा मलवा हटाया जाए तो इसके अंदर दो मुहाने हो सकते हैं जिससे प्रकाश भी मिलता होगा जो पर्यटन के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि एक तरफ लगभग 15 मीटर और दूसरी तरफ 7 से 8 मीटर तक सुरंग मौजूद है जिसका मलवा हटाए जाने के बाद ही इसकी वास्तविक लंबाई का पता लग पाएगा।
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