UPSC CIVIL SERVICES EXAM RESULT उत्तराखण्ड
उत्तराखंड: शैलजा पांडे ने यूपीएससी परीक्षा में हासिल की 61वीं रैंक बनी आईएएस अफसर
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शैलजा पांडे ने बढ़ाया देवभूमि उत्तराखंड का मान, सिविल सेवा परीक्षा 2020 में 61 वीं रैंक प्राप्त कर हासिल किया आईएएस अधिकारी बनने का मुकाम..
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने बीते शुक्रवार शाम को सिविल सेवा परीक्षा 2020 का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया है। यूपीएससी द्वारा घोषित इन परीक्षा परिणामों की मेरिट सूची में उच्च स्थान प्राप्त कर देवभूमि उत्तराखंड के होनहार वाशिंदों ने भी अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। खासतौर पर राज्य की बेटियों ने बाजी मारकर न केवल आईएएस अधिकारी बनने के अपने बचपन के सपनों को साकार किया है बल्कि अपने माता-पिता के साथ ही समूचे उत्तराखंड का नाम भी रोशन किया है। आज हम आपको राज्य की एक और ऐसी ही होनहार बेटी से रूबरू कराने जा रहे हैं, जो संघ लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित सिविल सेवा परीक्षा 2020 के अंतिम परिणामों की मेरिट सूची में 61वीं रैंक हासिल कर आईएएस बनने जा रही है। जी हां.. हम बात कर रहे हैं मूल रूप से राज्य के नैनीताल जिले की रहने वाली शैलजा पांडे की, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन के बलबूते यूपीएससी द्वारा घोषित सिविल सेवा के परीक्षा परिणामों में सफलता प्राप्त की है। उनकी इस अभूतपूर्व उपलब्धि से जहां उनके परिवार में हर्षोल्लास का माहौल है वहीं पूरे क्षेत्र में भी खुशी की लहर है।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार मूल रूप से राज्य के नैनीताल जिले के गरमपानी के मझेड़ा (प्रेमपुर) निवासी शैलजा पांडे ने यूपीएससी द्वारा घोषित सिविल सेवा परीक्षा 2020 की मेरिट सूची में समूचे देश में 61वीं रैंक हासिल की है। बता दें कि वर्तमान में उनका परिवार लोअर डांडा कंपाउंड जू रोड नैनीताल में रहता है। उनके पिता दीप चंद्र पांडे ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता है जबकि उनकी मां डॉक्टर शोभा पांडेय बीडी पांडेय अस्पताल नैनीताल में कार्यरत हैं। बताते चलें कि वर्तमान में अहमदाबाद से इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट सर्विस (आईएएएस) की ट्रेनिंग ले रही शैलजा ने एनआईटी हमीरपुर से इलेक्ट्रिक एंड इलेक्ट्रानिक्स में इंजीनियरिंग किया है। इससे पूर्व उन्होंने सेंटमेरी कान्वेंट स्कूल नैनीताल से 2011 में हाईस्कूल और 2013 में इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की और दोनों ही परीक्षाओं में वह परीक्षाओं में वह टॉपर रहीं। उन्होंने अपनी इस अभूतपूर्व उपलब्धि का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत और लगन के साथ ही माता-पिता, नानी रेवती लोहनी, नाना स्व. पूरन चंद्र लोहनी और मौसी हेमा लोहनी को दिया है।
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