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Operation Health protest Janandolan Chaukhutia almora rally Uttarakhand news Hindi live
फोटो सोशल मीडिया Operation Health protest Chaukhutia

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चौखुटिया में आपरेशन स्वास्थ्य की गूंज बदहाल सिस्टम सुधारने को महिलाओं बुजुर्गो ने भरी हुंकार

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Operation Health protest Janandolan Chaukhutia almora rally Uttarakhand news Hindi live: चौखुटिया में उबाल: असोज के कामकाजी महीने में भी सड़कों पर उतरे गांव के लोग, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं पर फूटा आक्रोश

Operation Health protest Janandolan Chaukhutia almora rally Uttarakhand news Hindi live: अल्मोड़ा जनपद का चौखुटिया क्षेत्र इन दिनों सरकार की नीतियों और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश का केंद्र बना हुआ है। जहां एक ओर बीते 14 दिनों से आमरण अनशन चल रहा है वहीं दूसरी ओर आज पहाड़ की मातृशक्ति, बड़े बुजुर्गो, पुरूषों और युवाओं ने सड़क पर उतरकर बदहाल सिस्टम के प्रति अपना आक्रोश व्यक्त किया। वैसे तो पहाड़ में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली किसी से भी छिपी नहीं है। विकास के प्रचार-प्रसार में करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद वास्तविकता यही है कि धरातल पर पहाड़ के अस्पताल आज महज रेफरल सेंटर बनकर रह ग‌ए हैं।
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हालात कितने गंभीर है इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जिस असोज का महीने में जब पहाड़ में खेती-बाड़ी, शादी-विवाह और घरेलू कामकाज चरम पर होते हैं, लोगों को घास धान आदि काटने में खाने तक की फुर्सत नहीं मिलती हैं। उस दौरान भी ग्रामीणों ने अपने खेत-खलिहान छोड़कर सड़कों पर उतर आने का फैसला लिया है। यह दृश्य अपने आप में बता देता है कि जनता का सब्र अब टूट चुका है।
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“स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करो, डॉक्टर दो—अस्पताल बचाओ” के गगनचुंबी नारों से गूंजा चौखुटिया 

आपको बता दें कि आपरेशन स्वास्थ्य के बैनर तले बीते 2 अक्टूबर से चल रहे इस आंदोलन में आंदोलनकारियों ने आज बुधवार 15 अक्टूबर को एक जनाक्रोश रैली निकालकर सरकार को चेताने का फैसला लिया था। आंदोलनकारियों की एक पुकार पर बुधवार को क्षेत्र के दूर-दूर के गांवों से मातृशक्ति, युवा और बुजुर्गों का जनसैलाब चौखुटिया नगर की गलियों में उमड़ पड़ा। चौखुटिया बाजार “स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करो, डॉक्टर दो—अस्पताल बचाओ” जैसे नारों से गूंज उठा। लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद करते नज़र आए। यह आंदोलन अब लगातार 14वें दिन में पहुंच गया है, और आमरण अनशन पर बैठे आंदोलनकारियों की हालत बिगड़ती जा रही है, मगर सरकार अब तक मौन बनी हुई है। जहां सरकार के कानों पर अभी तक जूं नहीं रेंगी है वहीं करोड़ों रुपए के सरकारी विज्ञापन डकारने वाले बड़े -बड़े मीडिया घरानों को भी सरकार की सेखी बघारने से फुर्सत नहीं है।‌

वैसे चौखुटिया सहित राज्य के सभी पर्वतीय क्षेत्रों की इस बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महज वर्तमान सरकार को दोषी ठहराना भी उचित नहीं है क्योंकि अब तक की सभी सरकारों ने बीते 25 वर्षों में उत्तराखण्ड के पर्वतीय इलाकों में विकास की ऐसी इबादत लिखी है कि आज स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। हां इतना जरूर हुआ है कि इस सरकार की ओर से एक बार फिर आश्वासन की गेंद फेंकी गई है। दरअसल उत्तराखंड शासन की ओर से बीते दिनों चौखुटिया सीएचसी में दस दिनों के भीतर 3 विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती ओर इसका उच्चीकरण कर उप जिला अस्पताल बनाने का दांव जरूर खेला है, जैसा कि सरकारें आंदोलन को तोड़ने के लिए हमेशा करती आई है।

परंतु भुवन कठायत के नेतृत्व में आंदोलनकारियों ने दो टूक कहा है कि जब तक धरातल पर सीएचसी में डाक्टरों की तैनाती नहीं होगी उनका आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि उन्हें अस्पताल के उच्चीकरण से कोई सरोकार नहीं है उन्हें केवल सीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सक, आवश्यक उपकरण, दवाई चाहिए ताकि इलाज को तरसते लोगों को यहां से रेफर ना किया जाए और पहाड़ के किसी अभागे को अब और सिस्टम की बदहाली का खामियाजा भुगतते हुए अपनी जान ना गंवानी पड़े।
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असोज में खेत नहीं, सड़कों पर जुटे लोग

आम तौर पर इस मौसम में पहाड़ की महिलाएं घर के काम और खेतों की व्यस्तता में उलझी रहती हैं, लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। सिर पर पल्लू संभाले महिलाएं, लाठी टेकते बुजुर्ग और जोश से लबरेज़ युवा—सभी सरकार की नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। यह सिर्फ आंदोलन नहीं, बल्कि उस उपेक्षा का प्रतिकार है जो वर्षों से चौखुटिया के हिस्से में आई है।आंदोलनकारी बताते हैं कि चौखुटिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं, न ही आधुनिक उपकरण। प्रसव के मामलों में महिलाओं को कई किलोमीटर दूर रेफर कर दिया जाता है, और आपातकालीन स्थिति में मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं। क्षेत्रवासियों का कहना है — “हम इलाज मांग रहे हैं, एहसान नहीं।”
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सरकार से बढ़ता जनआक्रोश

बुधवार को “ऑपरेशन स्वास्थ्य” के तहत एक विशाल रैली निकाली गई, जिसमें सैकड़ों महिलाएं, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय संगठन शामिल हुए। चौखुटिया बाजार से तहसील कार्यालय तक जुलूस निकालकर लोगों ने अस्पताल के उच्चीकरण, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति और बुनियादी संसाधनों की उपलब्धता की मांग की। व्यापारियों ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए अपने प्रतिष्ठान दोपहर तक बंद रखे। प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया, मगर प्रदर्शन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
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सरकार की चुप्पी पर तल्ख़ सवाल

आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार का रवैया बेहद लापरवाह और असंवेदनशील है। 14 दिन से लोग भूख हड़ताल पर हैं, मगर किसी अधिकारी ने मौके पर आकर हालात जानने की ज़रूरत तक नहीं समझी। “सरकार कागजों में योजनाएं बनाती है, ज़मीनी हकीकत में जनता मरहम को तरसती है,” एक महिला प्रदर्शनकारी ने रोष में कहा
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हर दिन जुड़ रहे नए चेहरे

भूख हड़ताल पर बैठे लोगों की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक टीम तैनात की है, लेकिन जनता के आक्रोश में कोई कमी नहीं आई। आंदोलन अब गांव-गांव फैल रहा है। हर दिन नए चेहरे, नए गांव और नए स्वर इस आंदोलन में जुड़ रहे हैं। चौखुटिया की यह लड़ाई अब सिर्फ एक अस्पताल की नहीं रह गई है — यह उस पूरे पहाड़ की पुकार है जो वर्षों से उपेक्षा और वादों की आड़ में दम तोड़ रही है। असोज के इस कामकाजी महीने में जब खेतों में हल चलने चाहिए थे, तब पहाड़ की मातृशक्ति सड़कों पर न्याय के लिए डटी है। शायद अब पहाड़ का धैर्य अपनी अंतिम सीमा पर है — और यह आंदोलन उसी टूटी हुई उम्मीद की गूंज है।
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