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Tanakpur news today: टनकपुर में डॉक्टरों ने 2 वर्षीय बच्चे की नाक से निकाला विदेशी धातु का बटन….
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Tanakpur news today champawat news hindi Champawat news live Champawat news today Tanakpur sub district hospital news टनकपुर अस्पताल में डॉक्टरों की सूझबूझ से बची मासूम की जान, बिना ऑपरेशन नाक से निकाला धातु का बटन
Champawat news today: doctor removed a foreign metal button from a 2-year-old child’s nose in sub district hospital Tanakpur: चंपावत जिले के टनकपुर उपजिला अस्पताल में डॉक्टरों की तत्परता और सूझबूझ से एक दो वर्षीय मासूम को बड़ी परेशानी से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। बच्चे की नाक में गहराई तक धातु का बटन फंस गया था, जो धीरे-धीरे गले की ओर खिसक रहा था। समय रहते उपचार मिलने से संभावित गंभीर खतरा टल गया और बिना किसी ऑपरेशन या बेहोशी के बटन को सुरक्षित निकाल लिया गया।
समय रहते अस्पताल पहुंचने से टला बड़ा खतरा (uttarakhand health services Foreign Body in Nose)
जानकारी के अनुसार, दो वर्षीय बच्चे को परिजन नाक में किसी वस्तु के फंसने की शिकायत के बाद उपजिला अस्पताल टनकपुर के आपातकालीन विभाग लेकर पहुंचे। चिकित्सकीय जांच में पता चला कि बच्चे की नाक के भीतर धातु का एक बटन काफी अंदर तक फंसा हुआ है और वह नासोफैरिंक्स (गले की ओर जाने वाले हिस्से) की तरफ बढ़ रहा है। यदि समय पर इसे नहीं निकाला जाता तो बच्चे को सांस लेने सहित अन्य गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता था।
बिना ऑपरेशन अपनाई गई विशेष तकनीक (Tanakpur news today Mother’s Kiss Technique)
आपातकालीन विभाग में तैनात डॉ. ज्ञानेश्वर यादव और डॉ. आफताब ने बच्चे की स्थिति का सावधानीपूर्वक आकलन किया। इसके बाद उन्होंने बच्चे की मां की मदद से “मदर्स किस (Mother’s Kiss)” तकनीक का इस्तेमाल किया। इस आधुनिक और सुरक्षित विधि की मदद से बिना ऑपरेशन, बिना किसी चीरा लगाए और बिना बेहोश किए धातु का बटन सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चा सुरक्षित रहा और उसे किसी प्रकार की अतिरिक्त जटिलता का सामना नहीं करना पड़ा।
अभिभावकों को डॉक्टरों की महत्वपूर्ण सलाह (uttarakhand Child Safety health issues)
चिकित्सकों ने बताया कि छोटे बच्चों में खेल-खेल में नाक या कान के भीतर सिक्का, बटन, मोती या अन्य छोटी वस्तुएं डाल देने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ऐसी स्थिति में अभिभावकों को घबराकर स्वयं वस्तु निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इससे वस्तु और अधिक अंदर जा सकती है तथा बच्चे की जान को खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने सलाह दी कि ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से उपचार कराना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। डॉक्टरों की सतर्कता और सही समय पर अपनाई गई तकनीक की बदौलत इस मासूम को बिना किसी सर्जरी के सुरक्षित उपचार मिल गया, जिसकी अस्पताल प्रशासन और परिजनों ने भी सराहना की।
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