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Uttarakhand: रानीखेत में ललित फिजिकल एकेडमी के युवाओं ने तड़पते सियार को दी नई जिंदगी
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रानीखेत में ललित बिष्ट और उनकी टीम ने बचाई सियार की जान, तीन दिन बाद मुंह से निकाला प्लास्टिक का जार(Ranikhet News Today)
Ranikhet News Today: Lalit Bisht and Team Rescue Jackal Trapped in Plastic Jar After Three Days : उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रानीखेत क्षेत्र से इंसानियत और वन्यजीव प्रेम की एक मिसाल सामने आई है। यहां पिछले करीब तीन दिनों से एक सियार प्लास्टिक के जार में मुंह फंस जाने के कारण जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा था। जार उसके सिर में इस तरह फंस गया था कि वह न ठीक से खाना खा पा रहा था, न पानी पी पा रहा था और न ही सामान्य रूप से देख पा रहा था। उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। इसी दौरान ललित बिष्ट और ललित फिजिकल एकेडमी के युवाओं की नजर उस बेबस सियार पर पड़ी। उन्होंने बिना समय गंवाए उसे बचाने का निर्णय लिया और अपनी सूझबूझ, साहस और टीमवर्क से बेजुबान की जान बचा ली।
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तीन दिनों तक दर्द में भटकता रहा सियार
(Jackal Rescue)
जानकारी के अनुसार, खाने की तलाश में सियार ने जंगल के आसपास पड़े एक प्लास्टिक के जार में अपना मुंह डाल दिया। लेकिन जार उसके सिर में बुरी तरह फंस गया। काफी कोशिशों के बाद भी वह खुद को इससे मुक्त नहीं करा सका। पिछले तीन दिनों तक वह जंगल और आसपास के इलाकों में इधर-उधर भटकता रहा। मुंह बंद होने के कारण वह न भोजन कर पा रहा था और न ही पानी पी पा रहा था, जिससे उसकी जान पर बन आई थी।
ललित बिष्ट और युवाओं ने दिखाई मानवता
(Lalit Physical Academy)
बुधवार को ललित बिष्ट के नेतृत्व में ललित फिजिकल एकेडमी के युवाओं ने जब सियार को तड़पते हुए देखा तो उन्होंने तुरंत रेस्क्यू शुरू किया। काफी मशक्कत और सावधानी के बाद टीम ने सियार को सुरक्षित काबू में लिया और उसके सिर में फंसा प्लास्टिक का जार बाहर निकाल दिया। पूरे अभियान के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि सियार को किसी प्रकार की चोट न पहुंचे।
नई जिंदगी मिलते ही जंगल की ओर दौड़ पड़ा सियार
(Wildlife Rescue News)
जैसे ही सियार के सिर से प्लास्टिक का जार हटाया गया, उसने राहत की सांस ली और कुछ ही क्षणों बाद तेजी से जंगल की ओर सुरक्षित भाग गया। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोगों ने भी राहत महसूस की। ललित बिष्ट और उनकी टीम के इस सराहनीय कार्य की पूरे क्षेत्र में जमकर प्रशंसा हो रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते यह रेस्क्यू नहीं होता तो सियार की जान भी जा सकती थी।
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प्लास्टिक कचरे से वन्यजीवों को बड़ा खतरा
(Plastic Pollution Awareness)
यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि जंगलों और आसपास फेंका गया प्लास्टिक कचरा वन्यजीवों के लिए कितना घातक साबित हो सकता है। लोगों से अपील की जा रही है कि जंगलों, सड़क किनारों और खुले स्थानों पर प्लास्टिक के डिब्बे, बोतलें और अन्य कचरा न फेंकें। छोटी-सी लापरवाही किसी बेजुबान की जिंदगी छीन सकती है। वहीं ललित बिष्ट और ललित फिजिकल एकेडमी के युवाओं का यह मानवीय प्रयास समाज के लिए एक प्रेरणा बन गया है कि समय पर उठाया गया एक कदम किसी बेजुबान को नई जिंदगी दे सकता है।
