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ऋषिकेश के विमल पांडेय ने चाईना की युवती से भारतीय रीती रिवाज से रचाई शादी



वैसे तो उत्तराखंड के कई पहाड़ी युवा भी अमेरिका और स्पेन इत्यादि से दुल्हने ला चुके है , जिसमे की पुरे पहाड़ी रीती रिवाज से शादी की रश्मे निभाई गयी ऐसा ही एक और विवाह हुआ है, ऋषिकेश में। ऋषिकेश गंगा का तट गुरुवार को एक ऐसे ही विवाह का साक्षी बना, जिसमे युवक भारतीय और युवती चीन के संघाई से है किसी ने सही ही कहा है की प्रेम की कोई जाती ,धर्म और सीमा नहीं होती है। सरहदी बंधन को भी इस प्रेम बंधन के सामने झुकना पड़ा और कल चीन के संघाई से ऋषिकेश पहुंची युवती ने भारतीय युवक के साथ भारतीय वैदिक संस्कृति से विवाह रचाया।




बता दे की विमल पांडेय मुनिकीरेती स्थित योग निकेतन आश्रम ऋषिकेश में योग शिक्षक है। दिल्ली में जन्मे विमल पांडेय का परिवार मूल रूप से नेपाल का रहने वाला है। विमल के योग संस्थान में विदेशो से योग सिखने के लिए काफी लोग आते है। बात है करीब ढाई वर्ष पूर्व की जब संघाई चीन निवासी युवती “लेन” उनके संस्थान में योग सीखने आई थी। दोनों के बिच धीरे धीरे बातचीत से काफी अच्छी दोस्ती हो गयी , और दोनों एक दूसरे के रीती रिवाजो को भी जानने और समझने लगे थे। इसी दौरान दोनों के बीच प्रेम हो गया। जब योगा का सत्र पूरा हुआ तो योग सीखने के बाद लेन अपने देश लौट गई, लेकिन दोनों के बीच फोन पर बातचीत जारी रही। बातचीत काफी दिनों तक लम्बी चलने के बाद दोनों ने अपने प्रेम संबंध को विवाह के पवित्र रिश्ते में बदलने का फैसला लिया। सबसे खाश बात तो ये है की लेन ने जब यह बात अपने परिजनों को बताई तो उन्होंने भी स्वीकृति दे दी।




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दोनों परिवार उपस्थित रहे : गुरुवार को मुनिकीरेती स्थित योग निकेतन आश्रम में वैदिक पद्धति के अनुसार अग्नि को साक्षी मानकर दोनों ने सात फेरे लिए और वैदिक मंत्रों के बीच दोनों ने एक-दूजे के गले में वरमाला डाली। इस विवाह समारोह में दोनों परिवार के लोग उपस्थित थे। विवाह के दौरान विमल पांडेय के पिता केदारनाथ पांडेय, मां यमकला सहित रिश्तेदारों व परिजनों ने दोनों नव दंपती को आशीर्वाद दिया। इतना ही नहीं विवाह के इस पवित्र बंधन के साक्षी बनने के लिए चीन के संघाई से लेन के पिता हो शुंगनियन, मां लियू पिंग व उनके चचेरे भाई भी यहां पहुंचे थे। देखते ही देखते दोनों देश के युवक और युवती परिणय सूत्र में बंध गए ।




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