Connect with us
Nihang Sikh Uttarakhand News: Who are Nihang Sikhs Nagrasu Gurudwara Rudraprayag karnprayag controversy.
फोटो सोशल मीडिया Nihang Sikh Uttarakhand News

Home / UTTARAKHAND NEWS / Nihang Sikh uttarakhand news: कौन है निहंग सिख? जिन्होंने रूद्रप्रयाग नगरासू गुरूद्वारे में किया विवाद

UTTARAKHAND NEWS रूद्रप्रयाग

Nihang Sikh uttarakhand news: कौन है निहंग सिख? जिन्होंने रूद्रप्रयाग नगरासू गुरूद्वारे में किया विवाद

1 min read

Nihang sikh Khalsa panth guru gobind singh nagrasu Rudraprayag news today निहंग साधु कौन हैं? कर्णप्रयाग में हुए घटनाक्रम के बाद अब रूद्रप्रयाग नगरासू गुरूद्वारे में विवाद आखिर आम सिखों से कैसे अलग हैं ये नीले वस्त्रधारी योद्धा?

Nihang Sikh Uttarakhand News: Who are Nihang Sikhs Nagrasu Gurudwara Rudraprayag karnprayag controversy: कल्पना कीजिए…हाथ में विशाल भाला, कमर में तलवार, सिर पर ऊंची नीली पगड़ी, जिसमें लोहे के चक्र लगे हों…
घोड़े पर सवार एक ऐसा योद्धा, जो मौत से नहीं डरता…
जिसका जीवन धर्म, सेवा और युद्ध-कौशल को समर्पित हो… ये हैं निहंग। दरअसल पहले उत्तराखंड के चमोली जिले के कर्णप्रयाग और अब रूद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरूद्वारे में चल रहे घटनाक्रम के बाद यह शब्द चारों ओर गूंज रहा है…. निहंग। आपको बता दें कि निहंग, सिख धर्म की वह अनोखी परंपरा, जिसने मुगल शासन से लेकर अफगान आक्रमणकारियों तक के खिलाफ संघर्ष किया और सिख इतिहास में वीरता की नई इबारत लिखी। लेकिन सवाल यह है कि आखिर निहंग होते कौन हैं? क्या ये साधु हैं? क्या ये सैनिक हैं? या फिर दोनों का अद्भुत संगम? आइए जानते हैं निहंगों की पूरी कहानी।

निहंग शब्द का अर्थ क्या है? (Origin Of Nihang sikh)

“निहंग” शब्द के अर्थ को लेकर अलग-अलग मत हैं।
कुछ इतिहासकार इसे फारसी शब्द “निहंग” से जोड़ते हैं, जिसका अर्थ होता है “मगरमच्छ” या “निडर योद्धा”।
जबकि कई विद्वान इसे संस्कृत के “निशंक” शब्द से जोड़ते हैं, जिसका अर्थ है “निर्भय”। और सच भी यही है…
निहंगों की पहचान ही निर्भयता है। मौत का भय नहीं…
संपत्ति का मोह नहीं… और अन्याय के सामने झुकना तो बिल्कुल नहीं।

निहंगों की शुरुआत कैसे हुई? (History Of Nihangs hindi)

निहंग परंपरा की जड़ें सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के समय से जुड़ी हैं। सन 1699 में जब गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की, तब उन्होंने सिखों को केवल धार्मिक अनुयायी नहीं, बल्कि संत-सिपाही बनने का संदेश दिया। अर्थात… एक ऐसा इंसान जो ईश्वर की भक्ति भी करे और जरूरत पड़ने पर धर्म व समाज की रक्षा के लिए हथियार भी उठाए। इसी विचारधारा से निहंग परंपरा विकसित हुई। गुरु गोबिंद सिंह जी के बाद निहंगों ने मुगलों और अहमद शाह अब्दाली जैसे आक्रमणकारियों के खिलाफ कई युद्ध लड़े।

आम सिख और निहंग में क्या अंतर है? (Difference Between Sikh And Nihang)

बहुत से लोग सोचते हैं कि निहंग और आम सिख अलग धर्म हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। निहंग भी सिख धर्म का ही हिस्सा हैं। फर्क केवल जीवनशैली और परंपराओं का है। जहां अधिकांश सिख सामान्य पारिवारिक जीवन जीते हैं… वहीं निहंग योद्धा परंपरा को जीवित रखते हैं। उनका जीवन अधिक अनुशासित, सैन्य और धार्मिक होता है। वे आज भी सदियों पुरानी खालसा योद्धा संस्कृति का पालन करते हैं।

निहंगों का पहनावा इतना अलग क्यों होता है? (Nihang Dress)

निहंगों की सबसे बड़ी पहचान उनका नीला वस्त्र है। दरअसल नीला रंग वीरता, त्याग और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी पगड़ी सामान्य सिखों की तुलना में काफी ऊंची होती है। इस विशेष पगड़ी को “दस्तार बुंगा” कहा जाता है। पगड़ी में लोहे के चक्र यानी चक्कर लगाए जाते हैं। इनका उपयोग कभी युद्ध में हथियार के रूप में भी किया जाता था। निहंग अक्सर अपने साथ रखते हैं: तलवार, भाला, कृपाण, कटार, चक्र, ढाल। आज भी कई निहंग इन्हें अपनी पहचान और परंपरा का हिस्सा मानते हैं।

निहंगों का रहन-सहन (Lifestyle Of Nihangs)

निहंगों का जीवन बेहद सादा होता है। उनका अधिकांश समय
गुरबाणी पाठ में, घुड़सवारी में, शस्त्र प्रशिक्षण में और सेवा कार्यों में बीतता हैं। वे अक्सर गुरुद्वारों या अपने डेरों में रहते हैं। कई निहंग विवाह नहीं करते, हालांकि सभी के लिए यह अनिवार्य नहीं है। उनका मुख्य उद्देश्य खालसा परंपरा और सिख विरासत की रक्षा करना होता है।

निहंगों का भोजन कैसा होता है? (Nihang Food Tradition)

निहंग परंपरा में लंगर का विशेष महत्व है। वे सामूहिक भोजन और सेवा को बहुत पवित्र मानते हैं। पारंपरिक भोजन में शामिल होते हैं: दाल, रोटी, सब्जियां, देसी घी और कढ़ाह प्रसाद। कुछ निहंग परंपराओं में “शहीदी देग” या “सुखा” का भी उल्लेख मिलता है, जिसे लेकर अलग-अलग मत और धार्मिक बहसें मौजूद हैं। हालांकि सभी निहंग एक जैसी परंपराओं का पालन नहीं करते।

युद्ध कला में क्यों प्रसिद्ध हैं निहंग? (Gatka Martial Art)

निहंगों की पहचान केवल उनके वस्त्र नहीं हैं। वे अपनी युद्ध कला के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। “गटका” सिखों की पारंपरिक मार्शल आर्ट है। निहंग बचपन से ही सीखते हैं:
तलवारबाजी, भाला चलाना, घुड़सवारी और आत्मरक्षा तकनीकें आज भी होला मोहल्ला जैसे आयोजनों में निहंग अपनी अद्भुत युद्ध कला का प्रदर्शन करते हैं।

होला मोहल्ला क्या है? (Hola Mohalla)

यदि आप निहंग संस्कृति को करीब से देखना चाहते हैं, तो होला मोहल्ला सबसे बड़ा अवसर है। यह त्योहार पंजाब के आनंदपुर साहिब में मनाया जाता है। इस दौरान हजारों निहंग एकत्रित होते हैं। यहां देखने को मिलता है: घुड़सवारी, तलवारबाजी, गटका प्रदर्शन, धार्मिक कीर्तन और विशाल लंगर. दुनिया भर से लोग इस आयोजन को देखने आते हैं। आज के समय में निहंगों की भूमिका (Nihangs Today)
आज भले ही युद्ध का दौर नहीं है। लेकिन निहंग अब भी सिख परंपराओं के संरक्षक माने जाते हैं। वे धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं, ऐतिहासिक गुरुद्वारों की सेवा करते हैं, युवाओं को गटका सिखाते हैं, खालसा परंपरा को जीवित रखते हैं, उनकी उपस्थिति आज भी सिख इतिहास और संस्कृति की जीवित पहचान मानी जाती है।

आइए अब जानते हैं कहां तक पहुंचा नगरासू गुरूद्वारा विवाद nihang sikh nagrasu Rudraprayag

रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारा साहिब में पिछले दो दिनों से चल रहे विवाद के बीच सोमवार को स्थिति कुछ हद तक सामान्य होती नजर आ रही है। प्रशासन और पुलिस की लगातार वार्ता के बाद गुरुद्वारे की छत पर मौजूद सात निहंगों में से दो नीचे उतर आए हैं, जबकि पांच अन्य अभी भी गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर मौजूद हैं। जिला प्रशासन को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए जल्द ही पूरे मामले का समाधान निकाल लिया जाएगा। घटनाक्रम के मद्देनजर एहतियातन बंद की गई इंटरनेट सेवा भी दोबारा बहाल कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।
यह भी पढ़ें- Uttarakhand news: कर्णप्रयाग में 27 जून तक धारा 163 लागू, नगरासू गुरुद्वारे के बाहर पुलिस फोर्स तैनात

👉👉उत्तराखंड की सभी ताजा खबरों के लिए देवभूमि दर्शन के WHATSAPP CHANNEL को Follow कीजिए on

👉👉TWITTER पर जुडिए।

Continue Reading

More in UTTARAKHAND NEWS

To Top