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Pithoragarh news today: Divyang Shamsher Singh munsiyari Pithoragarh, viral social media engineering without degree.
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Pithoragarh: सोशल मीडिया पर छाए पिथौरागढ़ के शमशेर बिना किसी डिग्री के छोड़ी इंजीनियरिंग की छाप

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Shamsher Singh Pithoragarh news today munsiyari Pithoragarh news today engineer shamsher singh Pithoragarh Uttarakhand talent सुन नहीं सकता, बोल नहीं सकता… लेकिन बना दिए उड़ने वाले जहाज; पिथौरागढ़ के शमशेर ने हुनर से सबको किया हैरान

Pithoragarh news today: Divyang Shamsher Singh munsiyari Pithoragarh, viral social media engineering without degree: उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के एक छोटे से गांव से ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो यह साबित करती है कि प्रतिभा किसी भाषा, डिग्री या शारीरिक क्षमता की मोहताज नहीं होती। मुनस्यारी विकासखंड के राया गोल गांव का रहने वाला एक मूक-बधिर युवक अपने अद्भुत तकनीकी हुनर से आज हर किसी को हैरान कर रहा है। 30 वर्षीय शमशेर सिंह बचपन से न तो सुन सकते हैं और न ही बोल सकते हैं, लेकिन उनके बनाए मॉडल देखकर अच्छे-अच्छे इंजीनियर भी दंग रह जाते हैं। उनके हाथों से तैयार रिमोट संचालित बसें, ट्रक, जेसीबी, रोपवे और उड़ने वाले विमान न केवल चलते हैं, बल्कि तकनीकी समझ और रचनात्मकता की मिसाल भी पेश करते हैं।

बचपन की जिज्ञासा बनी पहचान की वजह (Pithoragarh news today Assistive Technology Innovation Story)

पिथौरागढ़ मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित सीमांत मुनस्यारी तहसील के नाचनी क्षेत्र के राया गोल गांव में रहने वाले शमशेर सिंह बचपन से ही अलग सोच रखते थे। परिवार के लोग बताते हैं कि जब दूसरे बच्चे खिलौनों से खेलते थे, तब शमशेर उन्हें खोलकर यह जानने की कोशिश करते थे कि आखिर वे चलते कैसे हैं। खिलौनों के भीतर छिपी तकनीक को समझने की यही उत्सुकता धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन गई। समय बीतने के साथ मशीनों और वाहनों को समझने का उनका जुनून और गहरा होता गया।

बिना किसी प्रशिक्षण के सीखी तकनीक (Self Learning Mechanical Engineering Robotics Technology)

शमशेर ने कभी किसी तकनीकी संस्थान या प्रशिक्षण केंद्र में पढ़ाई नहीं की। सुनने और बोलने में असमर्थ होने के बावजूद उन्होंने दुनिया को अपने तरीके से समझा। मोबाइल फोन पर वीडियो देखकर उन्होंने मशीनों की कार्यप्रणाली को समझना शुरू किया और फिर अपने प्रयोगों को आकार देना शुरू कर दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। गत्ता, लकड़ी, पुरानी मोटरें और आसपास उपलब्ध सामान की मदद से छोटे-छोटे मॉडल तैयार करने लगे।

बस से शुरू हुआ सफर, फिर बन गए कई मॉडल (Creative Engineering Skill Development Program)

शमशेर का पहला बड़ा प्रयोग उत्तराखंड परिवहन निगम की बस का मॉडल था। इसके बाद उन्होंने कार, ट्रक, डंपर और जेसीबी जैसी मशीनों के मॉडल बनाए। हर नए मॉडल के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया। धीरे-धीरे उनके प्रयोग और अधिक जटिल होते गए। आज उनके द्वारा तैयार किए गए अधिकांश मॉडल रिमोट से संचालित होते हैं और उनमें लाइट, हॉर्न तथा इंडिकेटर जैसी सुविधाएं भी काम करती हैं।

टैंक, रोपवे और पानी में चलने वाले जहाज भी बनाए ( shamsher singh Pithoragarh Youth Innovation Story Mechanical Models)

शमशेर की कल्पनाशीलता सिर्फ सड़क पर चलने वाले वाहनों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने चैन से चलने वाले टैंक का मॉडल तैयार किया। इसके अलावा रोपवे ट्रॉली और पानी में तैरने वाले घर का मॉडल भी बनाया। उन्होंने ऐसे जहाज भी बनाए जो वास्तव में पानी में चलते हैं। स्थानीय भुजगढ़ नदी में इन मॉडलों का सफल परीक्षण भी किया गया है। यही नहीं, उनके बनाए रोपवे मॉडल और मशीनें स्थानीय लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

घर के आसपास ही बना डाली पहाड़ की सड़कें (Divyang Youth Created Aircraft Model Mountain Road Models)

शमशेर ने अपने घर के आसपास खाली जगहों और दीवारों का उपयोग करके पहाड़ी सड़कों की तरह घुमावदार ट्रैक तैयार किए हैं। इन रास्तों पर उनके बनाए वाहन चलते हैं और पहाड़ की वास्तविक परिस्थितियों को दर्शाते हैं। इन मॉडलों के जरिए वह दिखाते हैं कि तीखे मोड़ों पर वाहन कैसे मुड़ते हैं, खड़ी चढ़ाई पर भारी गाड़ियां किन चुनौतियों का सामना करती हैं और पहाड़ी क्षेत्रों में ड्राइविंग कितनी कठिन हो सकती है।

विमान के टूटने से टूटा मन, लेकिन नहीं छोड़ा सपना (Munsiyari Young Innovator Never Give Up)

शमशेर ने एक बार उड़ने वाले विमान का मॉडल भी तैयार किया। इसे बनाने में उन्होंने लंबा समय और मेहनत लगाई थी। परीक्षण के दौरान विमान कुछ ऊंचाई तक उड़ने के बाद अचानक तेज आवाज के साथ फट गया। यह घटना उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। निराशा से उबरकर दोबारा नए प्रयोग शुरू किए और अपने काम को आगे बढ़ाते रहे।

पिता का साया जल्दी छूटा, फिर भी नहीं रुके कदम (Uttarakhand Engineering Talent)

शमशेर सिंह के जीवन का सफर आसान नहीं रहा। वह जन्म से ही मूक-बधिर हैं। परिवार में चार भाई-बहन हैं, जिनमें दोनों बहनों की शादी हो चुकी है। करीब 12 वर्ष पहले उनके पिता भगत सिंह का निधन हो गया था। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी बड़े भाई चंद्रभानु सिंह के कंधों पर आ गई, जो राजमिस्त्री का काम करके परिवार का पालन-पोषण करते हैं। शमशेर ने गांव के जूनियर हाईस्कूल बजेता से आठवीं तक पढ़ाई की, लेकिन विशेष परिस्थितियों के कारण आगे शिक्षा जारी नहीं रख सके। आज भी वह अपनी बात लोगों तक कागज पर लिखकर पहुंचाते हैं।

सोशल मीडिया ने दिलाई पहचान (Rural Engineering Innovation Social Media Success startup India)

करीब दो वर्ष पहले स्थानीय यूट्यूबर कम्मू पहाड़ी की मदद से शमशेर ने सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी बनाई। इसके बाद उन्होंने अपने मॉडलों के वीडियो इंटरनेट पर साझा करने शुरू किए। धीरे-धीरे उनके काम को पहचान मिलने लगी और अब उनके हुनर की चर्चा दूर-दूर तक होने लगी है। सोशल मीडिया के जरिए हजारों लोग उनके नवाचारों को देख रहे हैं और उनकी सराहना कर रहे हैं।

दूसरे दिव्यांग युवाओं को सिखाना चाहते हैं हुनर (Skill Development Program Inspiration)

शमशेर का सपना केवल खुद आगे बढ़ना नहीं है। वह चाहते हैं कि भविष्य में बड़े स्तर पर मॉडल तैयार करें और अन्य दिव्यांग युवाओं को भी यह कला सिखाएं, ताकि वे भी अपनी छिपी प्रतिभा को पहचान सकें। उनकी मां मोहिनी देवी कहती हैं कि उनका बेटा भले ही सुन और बोल नहीं सकता, लेकिन उसके भीतर असाधारण प्रतिभा है। यदि उसे सही मंच और सहयोग मिले तो वह बहुत आगे जा सकता है।

पहाड़ से निकली एक प्रेरणादायक मिसाल (Pithoragarh Shamsher Singh Success Story)

जहां अधिकांश लोग संसाधनों की कमी को अपनी सीमाएं मान लेते हैं, वहीं शमशेर सिंह ने अपनी कमजोरी को ही ताकत बना लिया। बिना तकनीकी शिक्षा, बिना किसी विशेष प्रशिक्षण और सीमित साधनों के बीच उन्होंने जो कर दिखाया है, वह न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है। राया गोल गांव का यह युवा आज यह संदेश दे रहा है कि सपनों को उड़ान देने के लिए आवाज की नहीं, बल्कि हौसले की जरूरत होती है।
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