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नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्टिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, 6 सप्ताह में जमीन संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के आदेश
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|Supreme Court Orders Uttarakhand Government to Complete Land Transfer for High Court Relocation Within Six Weeks Nainital to Gaulapar Haldwani| उत्तराखंड हाईकोर्ट शिफ्टिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सरकार को जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश
|Supreme Court Orders Uttarakhand Government to Complete Land Transfer for High Court Relocation Within Six Weeks Nainital to Gaulapar Haldwani| उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी गौलापार स्थानांतरित किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट को स्थानांतरित करने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराने का निर्देश देना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को नए हाईकोर्ट परिसर के लिए चिन्हित भूमि से जुड़ी सभी औपचारिकताएं तय समय सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
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जनमत संग्रह संबंधी आदेश किया निरस्त (Uttarakhand High Court Shifting)
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की संयुक्त पीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट की ओर से 4 मई 2024 को दिए गए उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिसमें हाईकोर्ट के स्थानांतरण के मुद्दे पर जनमत संग्रह कराने की बात कही गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार का आदेश न्यायालय के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और अदालत का कार्य जनमत संग्रह कराना नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की टिप्पणी पर जताई असहमति (Supreme Court Hearing)
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जे. बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की संयुक्त पीठ ने कहा कि अदालतों को इस प्रकार के प्रशासनिक और नीतिगत विषयों में जनमत संग्रह कराने के निर्देश नहीं देने चाहिए। पीठ ने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे और संस्थानों के स्थान परिवर्तन से जुड़े मामलों के समाधान के लिए एक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया होती है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड हाईकोर्ट की तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ऋतु बाहरी और न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने पहले गौलापार (हल्द्वानी) में प्रस्तावित भूमि को हाईकोर्ट परिसर के लिए उपयुक्त नहीं माना था।
प्रशासनिक स्तर पर समाधान निकालने के निर्देश (Haldwani High Court Campus)
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अब इस पूरे मामले का समाधान प्रशासनिक स्तर पर निकाला जाना चाहिए। इसके लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट और राज्य सरकार आपसी समन्वय और परामर्श के साथ अदालत परिसर से जुड़े सभी बुनियादी ढांचे और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर ठोस निर्णय लें, ताकि स्थानांतरण की प्रक्रिया सुचारु रूप से आगे बढ़ सके।
सरकार को छह सप्ताह में पूरी करनी होगी प्रक्रिया (Land Transfer for High Court)
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हल्द्वानी में हाईकोर्ट के नए परिसर के निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि पहले ही चिन्हित की जा चुकी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि भूमि से संबंधित सभी आवश्यक स्वीकृतियां, अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) और अन्य औपचारिक प्रक्रियाएं छह सप्ताह के भीतर पूरी की जाएं, ताकि परियोजना में अनावश्यक देरी न हो।
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बार एसोसिएशन ने दी थी चुनौती (High Court Bar Association Petition)
यह मामला उस समय सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जब उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर हाईकोर्ट के पूर्व आदेश को चुनौती दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हाईकोर्ट के स्थानांतरण से जुड़े मुद्दे को प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाने का रास्ता साफ माना जा रहा है।
