UTTARAKHAND BOARD TOPPER पिथौरागढ़
बधाई: अंजू बनी पिथौरागढ़ की तीसरी टॉपर, मेरिट सूची में भी शामिल, पिता मजदूर, मां बेचती है दूध
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Anju Bisht Pithoragarh Topper: अंजू ने विषम परिस्थितियों से जूझते हुए हासिल किया मुकाम, बेहद गरीब परिवार से रखती है ताल्लुक, गांव में अभी तक नहीं है संचार सुविधा…
Anju Bisht Pithoragarh Topper
बीते रोज घोषित हुए उत्तराखण्ड बोर्ड के परीक्षा परिणामों में जहां मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा पर्वतीय जिलों में अध्यनरत छात्र छात्राओं ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया है वहीं राज्य की बेटियों ने भी अपनी काबिलियत का परचम लहराकर एक बार यह साबित कर दिखाया है वह किसी भी कीमत पर लड़कों से पीछे नहीं हैं। हर बार की तरह इस बार भी परीक्षा परिणामों में बेटियों ने बाजी मारी है। सबसे खास बात तो यह है कि उत्तराखंड बोर्ड जारी मेरिट सूची में ऐसे छात्र छात्राएं भी शामिल हैं जिन्होंने अपनी परिवार की विषम परिस्थितियों से जूझते हुए यह मुकाम हासिल किया है। आज हम आपको राज्य की एक और ऐसी ही होनहार बेटी से रूबरू कराने जा रहे हैं। जी हां… हम बात कर रहे हैं मूल रूप से राज्य के सीमांत पिथौरागढ़ जिले के धारचूला क्षेत्र के ग्राम पंचायत गलाती निवासी अंजू बिष्ट की, जिन्होंने इंटर की परीक्षा में 91.8 प्रतिशत अंक हासिल कर न केवल प्रदेश की मेरिट सूची में 24वां और जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है।
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आपको बता दें कि अंजू ने यह अभूतपूर्व उपलब्धि परिवार की विषम परिस्थितियों से जूझते हुए बिना किसी ट्यूशन के हासिल की है। जहां एक ओर सुविधा संपन्न जगहों पर निवास करने वाले अमीर परिवारों के अधिकांश बच्चे अच्छे अंक हासिल करने को मोहताज है वहीं एक बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली अंजू ने अपनी इस अभूतपूर्व उपलब्धि से यह साबित कर दिखाया है कि प्रतिभा सुविधाओं और अमीरी की मोहताज नहीं होती। राजकीय इंटर काॅलेज गलाती की छात्रा अंजू बिष्ट ने 500 में से 459 अंक प्राप्त किए हैं। बताते चलें कि एक बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली अंजू के पिता पान सिंह जहां मनरेगा में मजदूरी करते हैं वहीं उनकी मां मां विमला देवी गांव में ही दूध और सब्जी बेचकर परिवार की आजीविका चलाने में पति का हाथ बंटाती है। इससे भी बड़ी बात तो यह है कि जिस गलाती गांव में अंजू रहती है वहां अभी तक संचार सुविधा नहीं है, आज जहां अधिकांश युवा डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई कर अपने ज्ञान को बढ़ा रहे हैं ऐसे में सेल्फ स्टडी और कड़ी मेहनत के दम पर अंजू द्वारा हासिल की गई यह अभूतपूर्व उपलब्धि कई मायनों में अहम है।
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