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Uttarakhand Dhami govt Introduce Scientific Farm Fencing Policy to Protect Crops

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UTTARAKHAND NEWS देवभूमि दर्शन

Uttarakhand: उत्तराखंड में किसानों को बड़ी राहत, फसलों की सुरक्षा के लिए बनेगी नई घेरबाड़ नीति

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|Uttarakhand Farm Fencing Policy|Uttarakhand Crop Protection Policy | Scientific Fencing Policy | Wildlife Crop Damage | Stray Animal Control | Dhami Government| उत्तराखंड में फसलों की सुरक्षा के लिए बनेगी वैज्ञानिक घेरबाड़ नीति, वन्यजीव और आवारा पशुओं से किसानों को मिलेगी राहत

|Uttarakhand Farm Fencing Policy|Uttarakhand Crop Protection Policy | Scientific Fencing Policy | Wildlife Crop Damage | Stray Animal Control |

उत्तराखंड में किसानों की फसलों को वन्यजीवों और आवारा पशुओं से बचाने के लिए राज्य सरकार एक बड़ा और दीर्घकालिक कदम उठाने जा रही है। धामी सरकार अब केवल घेरबाड़ योजना तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसके प्रभावी और वैज्ञानिक क्रियान्वयन के लिए अलग से व्यापक घेरबाड़ नीति तैयार की जा रही है। इस नीति का उद्देश्य पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों के किसानों की फसलों को सुरक्षित रखना, खेती को लाभदायक बनाना और पलायन जैसी गंभीर समस्या पर अंकुश लगाना है।

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कृषि विभाग तैयार कर रहा है नई नीति का मसौदा(Scientific Fencing Policy Draft)

नई घेरबाड़ नीति का प्रारूप कृषि विभाग द्वारा तैयार किया जा रहा है। मसौदा तैयार होने के बाद इसे नियोजन और वित्त विभाग के सुझावों के लिए भेजा जाएगा। सभी आवश्यक सुझाव शामिल किए जाने के बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाएगा। सरकार का प्रयास है कि नीति ऐसी हो जो प्रदेश के अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप प्रभावी साबित हो।

खेती पर कई चुनौतियां, सरकार ने शुरू किया बड़ा अभियान

(Agriculture Challenges in Uttarakhand)

 

उत्तराखंड में खेती पहले से ही कई समस्याओं का सामना कर रही है। लगातार बढ़ते पलायन के कारण अनेक गांव खाली हो रहे हैं और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि बंजर होती जा रही है। वहीं जो किसान खेती कर रहे हैं, उन्हें मौसम की अनिश्चितता के साथ-साथ जंगली जानवरों और आवारा पशुओं से फसलों को बचाने की चुनौती भी झेलनी पड़ रही है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सरकार ने फसल सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए घेरबाड़ योजना को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है।

घेरबाड़ योजना के लिए करोड़ों रुपये का बजट(Crop Protection Budget)

राज्य सरकार ने इस योजना के लिए कृषि और उद्यान विभाग के बजट में 10-10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके अलावा केंद्र सरकार ने भी योजना के लिए 90 करोड़ रुपये की सहायता देने का आश्वासन दिया है। इस राशि में से कृषि विभाग को 25 करोड़ रुपये प्राप्त भी हो चुके हैं। अब जिलों को धनराशि जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे चयनित गांवों में किसानों के खेतों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ का कार्य तेजी से शुरू किया जाएगा।

क्षेत्र के अनुसार लगाए जाएंगे अलग-अलग प्रकार के सुरक्षा घेर(Modern Fencing Solutions)

सरकार इस बार एक जैसी व्यवस्था लागू करने के बजाय क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई विकल्प उपलब्ध कराएगी। नई नीति में कांटेदार तारबाड़, चेन लिंक फेंसिंग, पत्थरों की दीवार, जैविक बाड़ और सोलर फेंसिंग जैसे आधुनिक विकल्प शामिल किए जा रहे हैं। जिस क्षेत्र में जो व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी, वहां उसी प्रकार की घेरबाड़ को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे फसलों की सुरक्षा अधिक मजबूत और टिकाऊ बनने की उम्मीद है।

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सब्सिडी और अन्य प्रावधानों पर भी होगा फैसला(Farmers Subsidy for Fencing)

नई नीति में किसानों को मिलने वाली सब्सिडी सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि किसानों पर आर्थिक बोझ कम पड़े और अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकें। नीति लागू होने के बाद घेरबाड़ कार्य को एक तय मानक और व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत संचालित किया जाएगा।

कृषि निदेशक ने दी जानकारी(Official Statement)

कृषि निदेशक दिनेश कुमार ने बताया कि घेरबाड़ नीति का मसौदा तैयार किया जा रहा है। नियोजन एवं वित्त विभाग से सुझाव प्राप्त होने के बाद इसे कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि नई नीति लागू होने के बाद वन्यजीवों और आवारा पशुओं से फसलों को होने वाले नुकसान में कमी आएगी, किसानों की आय बढ़ेगी और खेती के प्रति लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।

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