UTTARAKHAND NEWS पौड़ी गढ़वाल
Laldhang Chillarkhal road kotdwar: कोटद्वार लालढांग चिल्लरखाल सड़क पर सुप्रीम रोक हटी
1 min read
Laldhang Chillarkhal road kotdwar : 6 साल से अटकी लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग का रास्ता हुआ साफ, सुप्रीम कोर्ट ने मार्ग पर लगी रोक हटाई..
Laldhang Chillarkhal road kotdwar: Supreme Court stay lifted of dream project road pauri Garhwal Uttarakhand breaking news today : उत्तराखंड के पौडी जिले मे स्थित कोटद्वार के लालढांग-चिल्लरखाल सड़क निर्माण को लेकर काफी समय से बाधा उत्पन्न हो रही थी। जिसको लेकर लोगों ने कई बार धरने व आंदोलन भी किए, वहीं इस बीच लालढांग- चिल्लरखाल सड़क निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सड़क निर्माण पर लगी रोक को हटा दिया है।
बताते चले सुनवाई के दौरान गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी ने इंटीग्रेशन एप्लीकेशन दायर कर पक्ष रखा , जबकि इस मामले पर नई दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज ने वकील के रूप में अदालत में प्रभावी पैरवी की जिसके बाद करीब 6 साल के बाद इस अटकी परियोजना का रास्ता साफ हुआ।
यह भी पढ़े :Kainchi dham bypass update: 15 जून से पहले शुरू हो जाएगा कैंची धाम बाईपास मार्ग
बता दें पौड़ी जिले के कोटद्वार में लालढांग-चिल्लरखाल सड़क निर्माण को लेकर लंबे समय से लोग मांग कर रहे थे। हालांकि करीब 11.5 किलोमीटर लंबी इस मोटर मार्ग परियोजना का 4.7 किलोमीटर हिस्सा सेंट्रल फॉरेस्ट एरिया से होकर गुजरता है। इसी वन क्षेत्र से गुजरने वाले हिस्से को लेकर पर्यावरणीय स्वीकृतियों और आपत्तियों के कारण इस निर्माण को काफी समय तक बाधित रखा गया। मामले में पहले पर्यावरण संबंधी चिंता को देखते हुए रोक लगाई गई थी जिसके कारण क्षेत्रीय जनता को सालों तक असुविधा झेलनी पड़ी क्योंकि यह सड़क कोटद्वार क्षेत्र को सीधे लालढांग से जोड़ती है जो हरिद्वार व मैदानी इलाकों तक पहुंच को सुगम बनाती है। वर्तमान में लोगों को लंबा और घुमावदार रास्ता तय करना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन दोनों की खपत होती है। इसके अलावा बरसात के मौसम में स्थितियां ज्यादा गंभीर हो जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जनता ने लंबे समय से इस सड़क को ऑल रोड के रूप में विकसित करने की मांग की ताकि उन्हें समस्याओं से ना गुजरना पड़े।
सांसद अनिल बलूनी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर इंटरवेंशन
सांसद अनिल बलूनी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर इंटरवेंशन एप्लीकेशन के माध्यम से क्षेत्रीय जनहित का पक्ष रखते हुए कहा कि यह सड़क केवल परिवहन सुविधा नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक विकास की जीवन रेखा है, जिस पर अदालत ने सभी पक्ष की दलील सुनने के बाद स्टे को समाप्त कर दिया है। जिससे निर्माण कार्य फिर से शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। बताते चले इस निर्णय से 18 गांव और 40, 000 से ज्यादा की आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। सड़क निर्माण पूरा होने के बाद क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा तो मिलेगा ही लेकिन इसके साथ ही कृषि दुग्ध उत्पादों को बाजार तक पहुंचने में आसानी होगी। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला मील का पत्थर साबित होने वाला है।
स्पीकर ऋतु खंडूरी ने बताया ऐतिहासिक निर्णय
कोटद्वार विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए, कहा की यह केवल एक सड़क नहीं बल्कि कोटद्वार और आसपास के समस्त ग्रामीण अंचलों के लिए जीवन रेखा है जो पिछले 4 सालों से लगातार इसके लिए प्रयासरत थी।
फॉरेस्ट क्लियरेंस का फंस सकता है पेंच
दरअसल लालढांग चिल्लरखाल सड़क की फाइनल मंजूरी केंद्र से ही मिलनी है, लेकिन इसमें फॉरेस्ट क्लियरेंस का पेंच फंस सकता है। विशेषज्ञों की माने तो इसके लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस जरूरी है। हालांकि वन विभाग का कहना है कि ये सडक 1980 से वन मार्ग के रूप में चल रही है इसको केवल पक्का किया जाना है, जिसके लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस की जरूरत नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में इसी तथ्य के आधार पर सड़क को लेकर स्टे हुआ था ऐसे में दोबारा यही पेंच फंस सकता है।
