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उत्तराखंड: शहादत के दो दिन बाद भी पैतृक गांव नहीं पहुंच सका शहीद देव बहादुर का पार्थिव शरीर..

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rifleman bahadur uttarakhand: दो दिन बाद भी घर नहीं पहुंच सका शहीद राइफलमैन का पार्थिव शरीर, अब सैन्य अधिकारियों ने जताई बुधवार को पहुंचने की संभावना..

जम्मू-कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में अपने सर्वोच्च बलिदान देने वाले मां भारती के वीर सपूत शहीद राइफलमैन देव बहादुर (rifleman Dev bahadur) का पार्थिव शरीर सोमवार को भी उनके पैतृक गांव नहीं पहुंच पाया। अब पार्थिव शरीर के बुधवार को पैतृक गांव पहुंचने की संभावना सेना के अधिकारियों द्वारा जताई गई है। शहीद के परिजनों का कहना है कि सेना के अधिकारियों द्वारा कोई ठोस जानकारी नहीं दी जा रही है। जहां पहले उन्होंने रविवार को पार्थिव शरीर गांव में पहुंचने की संभावना जताई थी वहीं उसके बाद बताया गया कि सोमवार देर रात तक देव का पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचेगा। लेकिन सोमवार को भी शहीद का पार्थिव शरीर घर नहीं पहुंच पाया। जवान बेटे की शहादत की खबर से बेसुध परिजनों को बेटे के अंतिम दर्शन करने के लिए अब दो दिन और इंतजार करना पड़ेगा। परिजनों ने बताया कि सोमवार देर शाम सेना के अधिकारियों के साथ बातचीत हुई। जिस पर अधिकारियों का कहना था कि शहीद राइफलमैन देव बहादुर का पार्थिव शरीर मंगलवार को दिल्ली लाया जाएगा और सैन्य अधिकारी शहीद को अंतिम श्रद्धांजलि देंगे। जिसके बाद शहीद राइफलमैन का पार्थिव शरीर बुधवार की सुबह गांव पहुंचाया जाएगा।
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पार्थिव शरीर के इंतजार में बीते दो दिन से नहीं जला शहीद के घर पर चूल्हा, बोली बहन इस बार कैसे बांधूंगी भाई की कलाई में राखी:-
गौरतलब है कि राज्य के उधमसिंह नगर जिले के किच्छा तहसील के गौरीकलां निवासी राइफलमैन देव बहादुर थापा(rifleman Dev bahadur) बीते शनिवार को जम्मू-कश्मीर के कारगिल क्षेत्र में पेट्रोलिंग के दौरान शहीद हो गए थे। पेट्रोलिंग करते समय जमीन में बिछी माइंस में हुए विस्फोट की चपेट में आकर वीरगति प्राप्त करने वाले देव बहादुर 2016 में सेना में भर्ती हुए थे और वर्तमान में महज 24 वर्ष के थे। उनकी शहादत की खबर से ही परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। शहीद के माता-पिता पथराई आंखों से बेटे के अंतिम दर्शनों की राह देख रहे हैं। लेकिन शहादत की खबर मिलने के दो दिन बाद भी पार्थिव शरीर पैतृक गांव नहीं पहुंच पाया है। पार्थिव शरीर के इंतजार में बीते दो दिनों से शहीद के घर पर चूल्हा नहीं जला है। बीते दो दिनों से जहां शहीद देव बहादुर की मां लक्ष्मी देवी और छोटे भाई अनुज का रो-रोकर बुरा हाल है वहीं शहीद की इकलौती बहन गीता की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। भाई को याद करती हुए वह बार-बार यह कहकर विलाप कर रही है कि इस बार रक्षाबंधन में देव की कलाई पर राखी कैसे बांधूंगी। यह कहते-कहते उसकी आंखें आंसूओं से भर जा रही है। आस-पास के ग्रामीण परिजनों को ढांढस बंधा रहे हैं।

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