UTTARAKHAND NEWS नैनीताल
Uttarakhand highcourt: उत्तराखण्ड कांट्रेक्ट आउटसोर्स कर्मियों के लिए नियमितीकरण नियमावली बनाए सरकार
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Uttarakhand highcourt order to govt regulation policy contract outsource workers under 6 month Latest news today उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा आदेश: कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य पर 6 माह में नियम बनाए सरकार
Uttarakhand highcourt order to govt regulation policy contract outsource workers under 6 month Latest news today: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य में कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा है कि राज्य सरकार छह माह के भीतर नियम तैयार कर प्रक्रिया को अंतिम रूप दे। बीते दिनों एक मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंद्र और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार को दिए हैं।
हाईकोर्ट का यह आदेश को उन हजारों कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए राहत की किरण माना जा रहा है, जो लंबे समय से स्थायी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं। कर्मचारियों की नजर अब सरकार पर टिकी है कि वह कितनी जल्दी अदालत के आदेश का पालन करते हुए नियम बनाकर उनकी मुराद पूरी करती है।
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नर्सिंग कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर का मामला
दरअसल यह मामला देहरादून स्थित स्टेट नर्सिंग कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर मयंक कुमार जामिनी से जुड़ा है। जामिनी ने अदालत में बताया है कि उन्हें वर्ष 2010 में लेक्चरर पद पर कॉन्ट्रैक्ट आधार पर नियुक्त किया गया था। पिछले 15 वर्षों से वह लगातार सेवा दे रहे हैं। इस बीच पद का नाम बदलकर असिस्टेंट प्रोफेसर कर दिया गया, लेकिन उनकी नियुक्ति अब तक स्थायी नहीं हुई।
जामिनी ने याचिका दायर कर कहा कि उनकी सेवा हर साल बिना रुके बढ़ाई जाती रही है, फिर भी उन्हें न तो नियमित किया गया और न ही समान कार्य के लिए समान वेतन दिया गया। हाल ही में सरकार ने 14 जुलाई 2025 को 16 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला, जिसमें वह पद भी शामिल था जिस पर वे कार्यरत हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि वह सभी योग्यताओं और अनुभव की शर्तें पूरी करते हैं, फिर भी न तो आयु सीमा में छूट दी गई और न ही अनुभव का लाभ दिया गया।
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सरकार की दलील और हाईकोर्ट का रुख
राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि विज्ञापन नियमों के अनुरूप जारी किया गया है। साथ ही यह भी बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो कॉन्ट्रैक्ट और आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण पर रिपोर्ट तैयार करेगी। हालांकि, सरकार ने स्वीकार किया कि अभी तक नियमों का मसौदा तैयार नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने इसे गंभीर मानते हुए स्पष्ट आदेश दिए कि नियम बनने तक याचिकाकर्ता का पद खाली रखा जाए और उनकी सेवा जारी रहे। अदालत ने सरकार को सख्त हिदायत दी कि छह माह के भीतर नियमितीकरण संबंधी नियम बनाकर कर्मचारियों की स्थिति स्पष्ट की जाए।
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