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Yogesh Jeena IIT BOMBAY: नैनीताल के योगेश जीना ने रचा इतिहास आटो ड्राइवर का बेटा बना टॉपर
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yogesh jeena IIT Bombay : गरीबी को मात देकर योगेश जीना बने JEE टॉपर, रिविजन विधि को बनाया सफलता का हथियार
nainital yogesh jeena iit Bombay success story became topper with special revision method uttarakhand breaking news today : एक कहावत है कि सफलता उन्हे मिलती है जिनके हौसलों मे जान होती है। ऐसी ही कुछ कहावत को सच साबित किया है नैनीताल जिले के योगेश जीना ने जिन्होंने अपनी काबिलियत और मजबूत इरादों के दम पर JEE जैसी कठिन परीक्षा में सफलता का परचम लहराया है। योगेश की इस विशेष उपलब्धि के बाद से वह सोशल मीडिया मे चर्चा का विषय बन गए है।
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बता दें नैनीताल जिले के रामगढ़ ब्लॉक के सिरसा गांव के निवासी 19 वर्षीय योगेश जीना ने JEE परीक्षा में टॉप किया इतना ही नहीं बल्कि वह आज IIT बाम्बे से पढ़ाई कर रहे हैं। योगेश ने बचपन से ही इंजीनियर बनने का सपना देखा था ,हालांकि उनकी पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं थी लेकिन बावजूद इसके उन्होंने अपने सपनों की ऊंची उड़ान भरी जिसमे उन्हे सफलता हासिल हुई। योगेश को 19 साल की उम्र में एंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस नामक गंभीर बीमारी का सामना भी करना पड़ा, जिसमें रीढ़ और जोड़ों में तेज दर्द व अकड़न रहती है। कई बार हालात ऐसे थे कि वे खुद बिस्तर से भी नहीं उठ पाते थे जिसके कारण बीमारी का असर उनकी 12वीं की पढ़ाई और अंकों पर भी पड़ा।
बीमारी के कारण कॉलेज जाना नहीं हुआ संभव ( nainital yogesh jeena)
योगेश ने हरगोविंद सुयाल सरस्वती विद्या मंदिर से हाई स्कूल और 12वीं की पढ़ाई पूरी की। JEE मेन व jee एडवांस दोनों परीक्षा क्वालीफाई भी की लेकिन 12वीं में कम अंक आने के कारण उन्हें आईआईटी में एडमिशन नहीं मिला। वर्ष 2023 मे योगेश को 74.8 % अंक मिले थे हालांकि वे स्टेट बोर्ड के टॉप 20 प्रतिशत में थे लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण उनका कॉलेज जाना संभव नहीं हो पाया।
10 -12 घण्टे रोजाना की पढाई ( nainital news today)
निराश होने के बजाय योगेश ने 1 साल ड्रॉप लिया और उसी साल उन्होंने सिर्फ परीक्षा की तैयारी नहीं बल्कि सेहत सुधारने और आत्मविश्वास वापस पाने के लिए भी लिया जिन्होंने IIT मे जाने का सपना पूरा करने की ठानी। कोचिंग की फीस देना योगेश के लिए संभव नहीं था इसलिए उन्होंने यूट्यूब और सेल्फ स्टडी को अपना हथियार बनाया। मैथ्स और फिजिक्स उनके मजबूत विषय थे जबकि केमिस्ट्री पर उन्होंने अतिरिक्त मेहनत की और सोशल मीडिया से दूरी बनाए रख 10 12 घंटे रोजाना पढ़ाई की।
रिवीजन से मिली योगेश को सफलता
योगेश ने रिवीजन को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया हर हफ्ते वह किताब बंद कर जो याद है उसे लिखते थे। इस आदत ने उनके कांसेप्ट को और अधिक मजबूत बनाया तथा उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। jee परीक्षा के दौरान उन्होंने पहले फिजिक्स फिर केमिस्ट्री और अंत में मैथ्स के आसान सवालों को पहले निपटा कर समय और मानसिक दबाव दोनों को संतुलित रखा। योगेश के आत्मविश्वास और मेहनत की बदौलत आज वह आईआईटी बॉम्बे में एनवायरनमेंट साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक कर रहे हैं। बताते चलें योगेश के पिता ऑटो रिक्शा चलाते हैं जबकि उनकी माता खेती बाड़ी का काम करती है।
