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Uttarakhand: Tehri maletha Family Welcomes Baby Girl with a Flower-Decorated Car Beti Bachao Beti Padhao
Image : social media ( Beti Bachao Beti Padhao)

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Uttarakhand news: टिहरी में बेटी के जन्म पर अनोखा जश्न, फूलों से सजी कार पर लिखा- ‘बेटी हुई है’

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Uttarakhand: Tehri maletha Family Welcomes Baby Girl with a Flower-Decorated Car Beti Bachao Beti Padhao: बेटी के जन्म पर मलेथा में अनोखा जश्न, फूलों से सजी कार पर लिखा- ‘बेटी हुई है

Uttarakhand: Tehri maletha Family Welcomes Baby Girl with a Flower-Decorated Car Beti Bachao Beti Padhao: टिहरी गढ़वाल के कीर्तिनगर ब्लॉक स्थित मलेथा गांव में एक परिवार ने बेटी के जन्म को ऐसे उत्सव में बदल दिया, जो पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। परिवार ने नवजात बच्ची के स्वागत के लिए कार को फूलों और मालाओं से सजाया और उसके पीछे बड़े अक्षरों में ‘बेटी हुई है’ का पोस्टर लगाया। यह दृश्य न केवल परिवार की खुशी को दर्शा रहा था, बल्कि बेटियों के प्रति सम्मान और समाज की बदलती सोच का भी संदेश दे रहा था।

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पहली संतान के रूप में आई नन्ही खुशियां (Baby Girl Celebration)

मलेथा गांव निवासी सुंदर लाल और शंकुतला देवी के बड़े पुत्र आशीष कुमार की पत्नी प्रीति ने अपनी पहली संतान के रूप में बेटी को जन्म दिया है। यह खुशी का अवसर शुक्रवार को श्रीकोट-श्रीनगर स्थित बेस चिकित्सालय में आया। डॉक्टरों के अनुसार मां और नवजात दोनों स्वस्थ हैं। जैसे ही परिवार को बेटी के जन्म की सूचना मिली, घर में खुशी की लहर दौड़ गई और सभी सदस्य इस पल को यादगार बनाने की तैयारियों में जुट गए।

फूलों से सजी कार बनी आकर्षण का केंद्र (Girl Child Welcome)

शनिवार को मां और बच्ची को अस्पताल से घर लाने के लिए विशेष तैयारी की गई। जिस कार से दोनों को घर लाया जाना है, उसे रंग-बिरंगे फूलों और मालाओं से सजाया गया। कार के पीछे लगे ‘बेटी हुई है’ पोस्टर ने श्रीकोट बाजार में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। राहगीर इस अनोखे स्वागत को देखकर परिवार की सोच की सराहना करते नजर आए।

परिवार की थी बेटी की चाहत (Daughter Happiness)

नवजात बच्ची के चाचा अंकित कुमार ने बताया कि परिवार में बेटी के जन्म से सभी बेहद खुश हैं। उन्होंने कहा कि आशीष और प्रीति दोनों चाहते थे कि उनकी पहली संतान बेटी हो। अब उनकी यह इच्छा पूरी हो गई है, इसलिए पूरे परिवार के लिए यह पल किसी त्योहार से कम नहीं है।

अंकित ने बताया कि वह स्वयं कार को सजाने में लगे हैं और परिवार की खुशी शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। उनके अनुसार बेटी का जन्म उनके लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं है।

बहन की विदाई के बाद महसूस होती थी कमी (Family Joy)

अंकित कुमार ने बताया कि उनके परिवार में तीन भाई-बहन हैं और बहन की शादी हो चुकी है। बहन की विदाई के बाद घर में बेटी की कमी महसूस होती थी। परिवार को लगता था कि घर की रौनक कहीं कम हो गई है। अब नवजात बेटी के आगमन से घर में फिर से वही खुशियां लौट आई हैं।

उन्होंने बताया कि बच्ची का नामकरण संस्कार भी धूमधाम और भव्य तरीके से आयोजित किया जाएगा, ताकि इस खुशी को रिश्तेदारों और गांव के लोगों के साथ साझा किया जा सके।

समाज को सकारात्मक संदेश दे रही पहल (Gender Equality)

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डा. जेपी भट्ट ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि खुशियां बेटे और बेटी में कोई भेद नहीं करतीं। बेटियों के जन्म पर जश्न मनाने से समाज में समानता और संवेदनशीलता की भावना मजबूत होती है। ऐसे प्रयास समाज को नई दिशा देने का काम करते हैं।

बेटियां हैं घर की सबसे खूबसूरत मुस्कान (Girl Child Importance)

बेटियां केवल परिवार का हिस्सा नहीं होतीं, वे घर की मुस्कान, रिश्तों की मिठास और भविष्य की सबसे खूबसूरत उम्मीद होती हैं। जिस आंगन में बेटी की किलकारी गूंजती है, वहां खुशियां खुद-ब-खुद अपना रास्ता बना लेती हैं। बेटियों को सम्मान और अवसर देना केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सभ्य और संवेदनशील समाज की पहचान है।

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बेटी का जन्म है खुशियों की सौगात (Daughter Blessing)

बेटियां भाग्य से मिलती हैं। वे बोझ नहीं, बल्कि ईश्वर का सबसे सुंदर आशीर्वाद बनकर घर आती हैं। वे पिता के सपनों को नई उड़ान देती हैं, मां की ममता को नया अर्थ देती हैं और पूरे परिवार को प्रेम के एक अनमोल धागे में बांध देती हैं। बेटी का जन्म उत्सव है, क्योंकि वह अपने साथ अनगिनत खुशियों की सौगात लेकर आती है।

बदलती सोच की मिसाल बना मलेथा का परिवार (Beti Bachao)

मलेथा गांव का यह परिवार आज समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है। फूलों से सजी कार और ‘बेटी हुई है’ का संदेश केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान, समान अधिकार और सकारात्मक सोच का प्रतीक है। यह पहल बताती है कि जब बेटियों का स्वागत गर्व और प्रेम के साथ किया जाता है, तभी एक बेहतर, संवेदनशील और समानता पर आधारित समाज का निर्माण संभव हो पाता है।

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