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Uttarakhand UCC new rules: Jail for marrying while hiding identity, live-in also become strict latest news today
Image : सांकेतिक फोटो ( Uttarakhand UCC new rules)

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UTTARAKHAND NEWS देहरादून

Uttarakhand UCC new rules: पहचान छिपाकर शादी पर जेल, लिव इन के नियम भी हुए सख्त

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Uttarakhand UCC new rules : पहचान छिपाकर की शादी तो होगी जेल, लिव इन के नियम हुए सख्त, लागू हुआ ucc संशोधन अध्यादेश...

Uttarakhand UCC new rules: Jail for marrying while hiding identity, live-in also become strict latest news today  : उत्तराखंड में पहचान छिपाकर शादी करने वालों की अब खैर नही होगी। जी हां दरअसल यदि प्रदेश में अब कोई भी पहचान छिपाकर शादी करता हुआ पाया जाता है तो उसे जेल होगी। इसके अलावा प्रदेश में समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश 2026 लागू हो गया है। बताते चले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ucc को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

यह भी पढ़े :Uttarakhand UCC rules change: समान नागरिक संहिता में बदलाव संसोधित अध्यादेश लागू

बता दें उत्तराखंड में ucc को प्रभावी बनाने के लिए राज्यपाल लेफ्टिनेंट गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने समान नागरिक संहिता संशोधन अध्यादेश को मंजूरी दी है। इसके अलावा विवाह पंजीकरण और लिव इन रिलेशनशिप से जुड़े नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव हो गए है। अब यदि कोई भी विवाह का पक्षकार अपनी पहचान के विषय में गलत जानकारी देता है तो इसे विवाह शून्य करने का आधार माना जाएगा। इसके साथ ही अपनी पहचान या वैवाहिक स्थिति छुपाकर शादी करने वाले व्यक्ति के खिलाफ भारतीय संहिता के तहत दंडनीय कार्रवाई की जाएगी।

लिव इन रिलेशनशिप का कड़ा रुख 7 साल की सजा का प्रावधान

यदि कोई व्यक्ति बल दबाव या धोखाधड़ी के माध्यम से लिव इन संबंध स्थापित करता है तो उसे 7 साल तक के लिए जेल और जुर्माने की सजा होगी। धारा 380 2 के उल्लंघन जैसे खून के रिश्ते प्रतिबंधित श्रेणियों मे लिव इन मे रहने पर 7 साल की जेल का प्रावधान है। किसी वयस्क द्वारा नाबालिग के साथ लिव-इन में रहने पर छह माह की सजा और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। लिव-इन संबंध समाप्त होने पर निबंधक की ओर से दोनों पक्षों को निर्धारित प्रपत्र में प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा। जबकि विवाह, तलाक या लिव-इन के पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति महानिबंधक के पास होगी। लेकिन इससे पहले संबंधित पक्ष को सुनवाई का पूरा मौका दिया जाएगा।

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