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Dehradun guldar news देहरादून: पिंजरे में कैद हुआ गुलदार, मासूम बच्चे को बनाया था निवाला, शिकारियों ने किया बड़ा खुलासा
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Dehradun Guldar News: शिकारियों ने टारगेट किलिंग का अंदेशा जताते हुए किया बड़ा खुलासा, कहा तीन महीने पहले भी मृतक बच्चे पर ही इसी गुलदार ने की थी हमले की कोशिश….
बीते छः मई को राज्य के देहरादून जिले के सहसपुर क्षेत्र में चार वर्षीय मासूम बच्चे को अपना निवाला बनाने वाला गुलदार आखिरकार पिंजरे में कैद हो गया है। बता दें कि मासूम बच्चे की मौत के बाद हरकत में आए वन विभाग ने सहसपुर के शंकरपुर स्थित राम खाली के पास गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया था, जिसमें आज बृहस्पतिवार को गुलदार कैद हो गया। गुलदार के पिंजरे में कैद होने की खबर से जहां दहशतग्रस्त लोगों ने चैन की सांस ली है वहीं इस दौरान पिंजरे में कैद गुलदार को देखने के लिए क्षेत्रवासियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हालांकि इस बीच शिकारियों की ओर से किए जा रहे एक दावे ने क्षेत्र वासियों के साथ ही वन विभाग को भी चौंका दिया है। गुलदार की टारगेट किलिंग के बारे में बताते हुए शिकारियों ने कहा है कि महमूदनगर बस्ती में चार साल के मासूम को निवाला बनाने वाले गुलदार ने इस दुखद घटना से तीन महीने पहले भी उसी बच्चे पर हमले की कोशिश की थी। हैरानी की बात यह भी है कि छः मई को भी गुलदार ने 5 बच्चों के बीच से उसी बच्चे को अपना शिकार बनाया, जिससे शिकारी खुद भी हैरान हैं।
(Dehradun Guldar News)
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शिकारियों की ओर से यह दावा भी किया जा रहा है कि इतिहास के पन्नों में अभी तक एक शिकार पर दो बार हमला करने की एकमात्र घटना जिम कार्बेट की किताब में दर्ज है। गुलदार के बारे में विस्तृत जानकारी देने वाली शिकारियों की टीम में हिमाचल प्रदेश के सोलन के रहने वाले आशीष दास गुप्ता के अतिरिक्त मुरादाबाद के राजीव सोलोमन, मेरठ के सैय्यद अली बिन हादी शामिल हैं। गौरतलब है कि मूल रूप से राज्य के देहरादून जिले के सहसपुर क्षेत्र के शंकरपुर महमूद नगर गांव निवासी जोशिन के चार वर्षीय पुत्र अहसान को आदमखोर गुलदार ने बीते छः मई की देर शाम उस वक्त अपना निवाला बना लिया था जब वह चार अन्य बच्चों के साथ घर के आंगन पर ही खेल रहा था। आपको बता दें अहसान की मां अर्जिना ने तीन माह पूर्व भी गुलदार द्वारा बेटे पर हमले की कोशिश की पुष्टि करते हुए बताया कि तीन महीने पहले जिस समय गुलदार ने अहसान पर हमले की कोशिश की थी उस वक्त वह अपने भाई के साथ बैठकर चूल्हे पर चाय बना रही थीं और उन्होंने जलती लकड़ी फेंककर अहसान को बचाया था।
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