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Uttarakhand kmou kemu Bus
फोटो: सोशल मीडिया

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KMOU BUS हल्द्वानी

उत्तराखण्ड: हल्द्वानी से पहाड़ जाने वाले यात्री ध्यान दें, सोमवार से नहीं चलेंगी केमू की बसें

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Uttarakhand kemu Bus strike: न‌ए साल की शुरुआत में ही यात्रियों को उठानी पड़ सकती है परेशानी, सोमवार यानी 1 जनवरी से थम जाएंगे कुमाऊं की लाइफलाइन केमू की बसों के पहिए…

Uttarakhand kemu Bus strike
न‌ए साल की शुरुआत में ही हल्द्वानी से पहाड़ की ओर जाने वाले यात्रियों को झटका देने वाली एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जी हां… कुमाऊं की लाइफलाइन कहीं जाने वाली केमू की बसें सोमवार से सड़कों पर दौड़ते हुए नहीं दिखाई देंगी। दरअसल कुमाऊं मोटर्स ओनर्स यूनियन लिमिटेड (केएम‌ओयू) यानी केमू प्रबंधन ने सोमवार 1 जनवरी से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। केमू प्रबंधन द्वारा यह फैसला केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए हिट एंड रन के न‌ए नियमों के विरोध में लिया गया है। इस संबंध में केमू के स्टेशन प्रभारी गोपाल दुम्का द्वारा कहा गया है कि सोमवार से हल्द्वानी से पर्वतीय क्षेत्रों के लिए केमू की कोई भी बस संचालित नहीं की जाएगी। केमू के एकाएक हड़ताल के ऐलान से अब हल्द्वानी से पहाड़ की ओर सफर करने वाले हजारों यात्रियों को वाहनों की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
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Haldwani kemu kmou Bus
आपको बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा सड़क दुघर्टनाएं होने पर चालक के खिलाफ कार्रवाई के न‌ए नियम लागू किए जा रहे हैं। जिनमें बसों द्वारा एक्सिडेंट होने पर दस साल की सजा एवं पांच लाख रुपए तक अर्थदंड का प्रावधान किया जा रहा है। इन न‌ए नियमों की जानकारी मिलने के बाद से ही वाहन चालक आक्रोशित हैं। इसी कड़ी में जहां केमू ने हड़ताल का ऐलान कर दिया है वहीं उत्तराखण्ड रोडवेज के चालकों ने भी रोडवेज प्रबंधन को हड़ताल का नोटिस देने का निर्णय लिया है। हल्द्वानी की ट्रांसपोर्ट यूनियन भी इन नियमों के विरोध में आ ग‌ई हैं। सभी ने एक सुर में विरोध जताते हुए कहा है कि वाहन चालक आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। महज कुछ हजार के वेतन में कार्य करने वाले चालक कैसे जुर्माने की इतनी भारी भरकर राशि अदा कर पाएंगे। उनका यह भी कहना है कि अधिकांश सड़क दुघर्टनाओं में वाहन चालकों की कोई ग़लती नहीं होती है। ऐसे में पुराने नियमों पर संसोधन कर चालकों को गुनाहगार साबित करने के लिए यह काले कानून केंद्र सरकार द्वारा थोपे जा रहे हैं। इन परिस्थितियों में चालकों के लिए वाहनों का संचालन कर पाना संभव नहीं है।

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