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Dehradun News: 100 Trees Felled Amid Protests for Bhaniyawala–Rishikesh Four-Lane Project
Image : social media ( Bhaniyawala Rishikesh Four Lane Project)

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Uttarakhand: भानियावाला-ऋषिकेश में पेड़ों की कटाई विरोध के बीच छलके पर्यावरण प्रेमियों के आंसू

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|Dehradun Bhaniyawala–Rishikesh Four-Lane Project: Tree Felling Restarts Under Heavy Police Security| भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन के लिए शुरू हुआ पेड़ों का कटान, विरोध के बीच पहले दिन गिरे करीब 100 पेड़

|Dehradun Bhaniyawala–Rishikesh Four-Lane Project: Tree Felling Restarts Under Heavy Police Security| उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब नए दौर में पहुंच गया है। कई दिनों के विरोध-प्रदर्शन और धरने के बाद सोमवार को भारी पुलिस सुरक्षा के बीच पेड़ों की कटाई दोबारा शुरू कर दी गई। पहले दिन करीब 100 पेड़ों का कटान किया गया। वर्षों पुराने पेड़ों को गिरते देख मौके पर मौजूद कई पर्यावरण प्रेमी भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। इस दौरान विरोध के स्वर भी उठे, लेकिन प्रशासन की मौजूदगी में कटान का कार्य जारी रहा।

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चार दिन बाद फिर चली आरी, भारी पुलिस बल रहा तैनात (Rishikesh Tree Cutting)

जानकारी के अनुसार भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन निर्माण परियोजना के तहत करीब 19 किलोमीटर के दायरे में संरक्षित प्रजाति के तीन हजार से अधिक पेड़ों को हटाने का प्रस्ताव है। करीब डेढ़ सप्ताह पहले पेड़ों की कटाई शुरू हुई थी, लेकिन लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शन के चलते बीते गुरुवार को वन निगम ने यह कहते हुए कटान रोक दिया था कि पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। सोमवार सुबह नौ बजे से पहले ही बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को मौके पर तैनात कर दिया गया, जिसके बाद पेड़ों की कटाई फिर शुरू हुई और देर शाम तक जारी रही।

पेड़ गिरते ही भावुक हुए पर्यावरण प्रेमी (Environmental Protest)

कटान शुरू होते ही मौके का माहौल बेहद भावुक हो गया। जैसे ही वर्षों पुराने एक विशाल पेड़ पर आरी चली और वह जमीन पर गिरा, कई पर्यावरण प्रेमी खुद को रोक नहीं सके। कुछ लोगों की आंखों से आंसू निकल आए, कुछ सड़क किनारे बैठकर रोने लगे, जबकि कुछ लोगों ने अंतिम समय तक पेड़ों को बचाने की कोशिश की। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि विकास आवश्यक है, लेकिन हजारों पेड़ों की बलि देकर विकास करना भविष्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

बरसात में कटान पर उठे सवाल, वन विभाग के कर्मचारी भी असहज (Forest Department)

फोरलेन परियोजना के लिए बरसात के मौसम में हो रही पेड़ों की कटाई को लेकर वन विभाग के भीतर भी असहजता की चर्चा है। विभाग के कई कर्मचारियों ने अनौपचारिक बातचीत में माना कि वर्षा ऋतु पौधरोपण और हरियाली बढ़ाने का सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। ऐसे मौसम में बड़ी संख्या में पेड़ों का कटान होना उन्हें भी उचित नहीं लगता, हालांकि किसी अधिकारी ने आधिकारिक तौर पर इस पर टिप्पणी नहीं की।

विरोध करने वालों पर पुलिस की कार्रवाई (Police Action)

कटान के दौरान एक पर्यावरण प्रेमी पेड़ से चिपक गया, जबकि एक अन्य युवक हाईवे के बीच बैठकर विरोध करने लगा। पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों ने दोनों को काफी देर तक समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे नहीं माने तो उन्हें मौके से हटाकर कोतवाली ले जाया गया। प्रभारी निरीक्षक यशपाल सिंह बिष्ट ने बताया कि कुंदन सिंह बिष्ट और रणविजय सिंह के खिलाफ शांति भंग करने के आरोप में चालानी कार्रवाई की गई। इस दौरान एक महिला पर्यावरण प्रेमी भावुक होकर बोलीं कि अब हम इन कटे हुए पेड़ों की “लाशों” के बीच खड़े होकर सिर्फ रो ही सकते हैं।

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स्थानीय लोगों की मांग, विकास के साथ पर्यावरण का भी हो संरक्षण (Road Project)

भानियावाला-ऋषिकेश फोरलेन परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि सड़क निर्माण और विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि हजारों पेड़ों की कटाई अपरिहार्य है तो उसके बदले प्रभावी पुनर्वनीकरण और पर्यावरण संरक्षण के ठोस उपाय भी सुनिश्चित किए जाने चाहिए। फिलहाल परियोजना के तहत आगामी दिनों में शेष पेड़ों के कटान की प्रक्रिया भी जारी रहने की संभावना है।

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