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Diwan kanwal singer uttarakhand: नहीं रहें लोकगायक दीवान कनवाल उत्तराखण्ड में शोक की लहर
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Diwan Kanwal singer Uttarakhand: Folk singer Diwan Kanwal died in almora: अल्मोड़ा स्थित अपने घर में ली अंतिम सांस, कुछ दिन पहले ही हल्द्वानी में उपचार कराकर लौटे थे घर….
Diwan Kanwal singer Uttarakhand: Folk singer Diwan Kanwal died in almora: समूचे उत्तराखण्ड के लिए एक बेहद दुखद खबर राज्य के अल्मोड़ा जिले से सामने आ रही है जहां लोकगायक दीवान कनवाल का निधन हो गया है। अपने सुरों की धुनों से आम जनमानस को थिरकने को मजबूर कर देने वाले लोकगायक दीवान कनवाल ने बुधवार को अपने अल्मोड़ा स्थित घर में अंतिम सांस ली। बताया गया है कि वे कुछ दिन पूर्व ही हल्द्वानी अस्पताल से उपचार कराकर घर लौटे थे। उनके निधन की खबर से समूचे उत्तराखण्ड संगीत जगत के साथ ही पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई है।
आपको बता दें कि मूल रूप से अल्मोड़ा खत्याड़ी गांव निवासी चौसठ वर्षीय दीवान कनवाल का हाल ही में गाया एक लोकगीत दुई दीना का ड्यार शेरुवा य दूणी में , ना त्यार ना म्यार शेरुवा य दूणी में… सुपरहिट हुआ था, जिसे लोगों द्वारा खासा पसंद किया जा गया। बात अगर उनके अन्य गीतों की करें तो बचपन में रेडियो से गीत आता था “ओ नंदा सुनंदा तू दैणी है जाए” उसके बाद वीसीडी का जमाना आया तो “आज कुछि मैत जा ” और “के लेखूं अपणा हिया का हाल” जैसे गाने काफी लोकप्रिय रहे । बलि वेदना फिल्म में गाया गया उनका गीत “हिमाले सुकीली काया ” भी लोगों की जुबां पर छाया रहा। बताते चलें कि सन 1980 में आकाशवाणी नजीबाबाद से संगीत में बी ग्रेड किया। रामलीला से जुड़े रंगमंच के क्षेत्र से और यही से संगीत जगत की शुरुआत हुई। वर्तमान में आकाशवाणी दूरदर्शन के ए ग्रेड के कलाकार थे। इसके साथ ही अल्मोड़ा आकाशवाणी में उनकी कई गीतों की रिकॉर्डिंग हैं और अक्सर प्रसारित होती रहती हैं।
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