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Haridwar news today: Asha reached Haridwar on foot, with her differently-abled husband carried on her back.
Image : social media ( Haridwar news today)

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Haridwar news today: दिव्यांग पति को पीठ पर बैठाकर 180 किमी दूर पैदल हरिद्वार पहुंची आशा

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Haridwar news today uttarakhand news live haridwar breaking news today uttarakhand hindi news haridwar live दिव्यांग पति को पीठ पर बैठाकर 180 किलोमीटर पैदल हरिद्वार पहुंचीं आशा, बोलीं- ‘ये बोझ नहीं, मेरा जीवनसाथी है’

Haridwar news today: Asha reached Haridwar on foot, with her differently-abled husband carried on her back uttarakhand news live today: कांवड़ यात्रा के बीच हरिद्वार पहुंचा एक दंपती श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। गाजियाबाद जिले के मोदीनगर की रहने वाली आशा अपने दिव्यांग पति सचिन को पीठ पर बैठाकर करीब 180 किलोमीटर पैदल चलकर हरिद्वार पहुंचीं। लगातार दूसरे साल उन्होंने पति की कांवड़ यात्रा की इच्छा को पूरा करने का संकल्प निभाया। रास्ते की थकान, मौसम की मुश्किलें और लंबा सफर भी उनके हौसले को कमजोर नहीं कर सका। हरकी पैड़ी पहुंचकर दंपती ने गंगाजल भरा और शनिवार को कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया। अब परिवार मोदीनगर लौटेगा, जहां अपने धाम में अंतिम जलाभिषेक के बाद उनकी कांवड़ यात्रा पूरी होगी।

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12 साल पहले हादसे ने बदली सचिन की जिंदगी (uttarakhand news live Disability)

गाजियाबाद के मोदीनगर स्थित ग्राम बखरावा निवासी सचिन पहले हर साल कांवड़ यात्रा में शामिल होते थे। करीब 12 साल पहले रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई। सर्जरी के बावजूद वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गए। शारीरिक अक्षमता के बाद भी भगवान शिव के प्रति उनकी आस्था और कांवड़ यात्रा में शामिल होने की इच्छा कम नहीं हुई। सचिन की इसी इच्छा को उनकी पत्नी आशा ने अपना संकल्प बना लिया।

पति की इच्छा पूरी करने के लिए पत्नी ने उठाया जिम्मा (haridwar Kanwar Yatra)

वर्ष 2025 में जब सचिन ने कांवड़ लाने की इच्छा जताई, तब आशा ने उन्हें कभी अपनी जिम्मेदारी या बोझ नहीं माना। उन्होंने पति को अपनी पीठ पर बैठाया और करीब 180 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी कराई। इस साल भी आशा ने लगातार दूसरी बार उसी हिम्मत और विश्वास के साथ पति को पीठ पर बैठाकर हरिद्वार तक का सफर तय किया। इस यात्रा में दंपती के दोनों बच्चे भी उनके साथ पैदल चल रहे हैं, जिससे यह सफर पूरे परिवार के लिए आस्था और साथ निभाने का अनुभव बन गया है।

हरकी पैड़ी से भरा गंगाजल, दक्षेश्वर महादेव का किया जलाभिषेक (haridwar Ganga Jal Abhishek)

हरिद्वार पहुंचने के बाद दंपती ने सबसे पहले हरकी पैड़ी से गंगाजल भरा। इसके बाद शनिवार को कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। हरिद्वार में धार्मिक अनुष्ठान पूरा करने के बाद परिवार अब मोदीनगर के लिए रवाना हो गया है। वहां अपने धाम में अंतिम जलाभिषेक के साथ उनकी कांवड़ यात्रा संपन्न होगी।

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राहगीरों ने बढ़ाया हौसला, किसी ने दिया पानी तो किसी ने फल (uttarakhand breaking news Devotion)

180 किलोमीटर के इस सफर में जब राहगीरों और अन्य श्रद्धालुओं की नजर इस दंपती पर पड़ी तो कई लोग रुककर उनका हौसला बढ़ाने लगे। कुछ लोगों ने उन्हें पानी और फल देकर यात्रा में सहयोग भी किया। आशा के लिए यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि पति-पत्नी का रिश्ता विश्वास, प्रेम और सम्मान पर टिका होता है। वह अपने पति को बोझ नहीं बल्कि अपना जीवनसाथी मानती हैं और इसी भावना के साथ उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।

रील बनाना गलत नहीं, लेकिन रिश्तों का सम्मान भी दिखना चाहिए’ (uttarakhand Social Media)

आशा ने सोशल मीडिया पर रील बनाने वाली महिलाओं को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आजकल कई पत्नियां सोशल मीडिया पर तरह-तरह की रील बनाती हैं। उनके अनुसार, रील बनाना गलत नहीं है, लेकिन उसमें पति और परिवार के प्रति सम्मान भी दिखाई देना चाहिए।उन्होंने कहा कि कुछ लोगों के व्यवहार की वजह से पूरे महिला समाज को गलत नजर से देखा जाने लगता है, जो उचित नहीं है। उनका मानना है कि पति-पत्नी और बच्चों के बीच प्रेम, विश्वास और सम्मान के साथ परिवार चलाने में ही वास्तविक खुशी है। आशा ने यह भी कहा कि कुछ महिलाओं की गलतियों का असर पूरे समाज की महिलाओं की छवि पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका संदेश है कि रिश्तों में मर्यादा और एक-दूसरे के प्रति सम्मान बना रहना जरूरी है। आशा और सचिन की यह यात्रा अब मोदीनगर में अंतिम जलाभिषेक के साथ पूरी होगी। लेकिन 180 किलोमीटर के इस सफर में दोनों ने जिस तरह एक-दूसरे का साथ निभाया, वह उनके लिए सिर्फ कांवड़ यात्रा नहीं, बल्कि वैवाहिक जीवन में विश्वास और साथ की एक ऐसी मिसाल बन गई है, जिसे रास्ते में मिले श्रद्धालु भी लंबे समय तक याद रखेंगे।

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