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Rishikesh stamp duty scam: Major action sub-registrar suspended dehradun breaking news today
फोटो सोशल मीडिया DM सविन बंसल औचक निरीक्षण करते हुए Rishikesh stamp duty scam

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Rishikesh stamp duty scam: ऋषिकेश में बड़ा एक्शन स्टांप चोरी मामले में उप निबंधक निलंबित

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Rishikesh stamp duty scam: Major action sub-registrar suspended dehradun breaking news today: ऋषिकेश सब रजिस्ट्रार कार्यालय में करोड़ों की स्टांप चोरी का खुलासा, उप निबंधक निलंबित

Rishikesh stamp duty scam: Major action sub-registrar suspended dehradun breaking news today: उत्तराखण्ड से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर देहरादून जिले से सामने आ रही है जहां ऋषिकेश के सब रजिस्ट्रार कार्यालय में लंबे समय से पनप रही अनियमितताओं पर आखिरकार प्रशासन का शिकंजा कस गया है। जिला प्रशासन की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर शासन ने ऋषिकेश के उप निबंधक हरीश कुमार को निलंबित कर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है। उनके विरुद्ध विधिवत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है। यह कार्रवाई उस औचक निरीक्षण के बाद हुई, जिसने कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

आपको बता दें कि यह मामला तब तूल पकड़ा जब आम नागरिकों की लगातार शिकायतों के बाद जिलाधिकारी सविन बंसल ने उप निबंधक कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान एसडीएम ऋषिकेश और जिला शासकीय अधिवक्ता देहरादून भी मौजूद रहे। मौके पर जो तस्वीर सामने आई, वह चिंताजनक थी।

जांच में पाया गया कि उप निबंधक की अनुपस्थिति में लिपिक स्तर पर ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया संचालित की जा रही थी। इतना ही नहीं, एक बाहरी व्यक्ति की भूमिका भी सामने आई, जिसके माध्यम से विलेख पंजीकरण कराए जाने के संकेत मिले। यह व्यवस्था न केवल नियमों के विपरीत थी, बल्कि पूरे तंत्र की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगाने वाली भी थी।

कार्यालय में वर्षों से आमजन के मूल दस्तावेज लंबित पड़े मिले। नियम के अनुसार तीन दिन में लौटाए जाने वाले अभिलेख महीनों तक वापस नहीं किए गए। अर्जेंट नकल, जिसे 24 घंटे में उपलब्ध कराया जाना चाहिए, वह भी लंबित पाई गई। फरियादियों ने निरीक्षण के दौरान अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि दस्तावेजों की वापसी और नकल प्राप्त करने के लिए उन्हें बार-बार चक्कर लगाने पड़े।

सबसे गंभीर पहलू करोड़ों रुपये की संभावित स्टांप चोरी का है। दून घाटी विशेष महायोजना-2031 के अंतर्गत औद्योगिक भूखंडों को आवासीय दर्शाकर छोटे-छोटे हिस्सों में रजिस्ट्री कराए जाने के मामले सामने आए। इस तरह की प्रवृत्ति से न केवल राजस्व हानि की आशंका है, बल्कि खरीदारों के साथ भविष्य में धोखाधड़ी की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। जांच रिपोर्ट में संपत्ति मूल्यांकन संबंधी ज्ञान की कमी, अभिलेखों के रखरखाव में लापरवाही और प्रक्रियात्मक अनुशासन के अभाव को भी रेखांकित किया गया। उप निबंधक की बिना सूचना अनुपस्थिति को भी गंभीर प्रशासनिक त्रुटि माना गया है।

जिलाधिकारी ने निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजते हुए कड़ी कार्रवाई की संस्तुति की थी। शासन ने इसे राजस्व हितों से खिलवाड़ और भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में मानते हुए तत्काल निलंबन का आदेश जारी किया। प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत की गई है और अन्य रजिस्ट्रार कार्यालयों में भी इसी प्रकार के औचक निरीक्षण जारी रहेंगे।
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