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Tehri Uttarakhand marriage mehndi: शादियों में नहीं होगी मेहंदी रस्म, टिहरी के 11 गांवों का फैसला
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Tehri Uttarakhand marriage mehndi ceremony will not in weddings, decision of 11 villages Nainbagh garhwal: शादी में नहीं होगी मेहंदी रस्म, टिहरी गढ़वाल के नैनबाग क्षेत्र के 11 गांवों का ऐतिहासिक फैसला
Tehri Uttarakhand marriage mehndi ceremony will not in weddings, decision of 11 villages Nainbagh garhwal: उत्तराखण्ड में दिखावे के झंझट से जूझते शादी समारोह की अलग-अलग रस्मों के बीच एक अच्छी खबर सामने आ रही है। जी हां पहाड़ की सादगी और सामूहिक सोच ने एक बार फिर समाज को दिशा देने का काम किया है। दरअसल टिहरी गढ़वाल जिले के नैनबाग क्षेत्र के 11 सिलवाड़ गांवों ने शादी-ब्याह में बढ़ते दिखावे और अनावश्यक खर्च पर सख्त रुख अपनाते हुए मेहंदी समारोह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। आपको बता दें कि ग्रामीणों द्वारा यह निर्णय क्षेत्र में आयोजित महापंचायत में सर्वसम्मति से लिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बीते शनिवार को लोक निर्माण विभाग नैनबाग परिसर में हुई 11 गांवों द्वारा महापंचायत का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता जिला पंचायत सदस्य जोत सिंह रावत और नैनबाग क्रीड़ा समिति के अध्यक्ष डॉ. बिरेंद्र सिंह रावत ने की। पंचायत में मौजूद ग्रामीणों ने साफ कहा कि शादी समारोह अब सामाजिक बोझ बनते जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
क्या-क्या तय हुआ पंचायत में
महापंचायत के निर्णय के अनुसार अब सिलवाड़ क्षेत्र के गांवों में होने वाली शादियों में मेहंदी की रस्म पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। मामा पक्ष की ओर से केवल एक बकरा और सामूहिक पिठाई की परंपरा ही मान्य होगी। इसके अलावा किसी भी तरह की फिजूलखर्ची वाली रस्मों को प्रोत्साहन नहीं दिया जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी तय किया कि अप्रैल के बाद शादी सीजन समाप्त होने पर दोबारा बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें अन्य खर्चीले और दिखावटी रीति-रिवाजों पर भी रोक लगाने की रणनीति तैयार की जाएगी।
इन गांवों ने लिया सामूहिक निर्णय
महापंचायत में टटोर, चिलामू, फफरोग, कोटीपाब, जयद्वार तल्ला, जयद्वार मल्ला, मसोन, सड़ब तल्ला, सड़ब मल्ला, मौगी, मसरास और थुरेटी गांवों के लोगों ने भाग लिया और फैसले का समर्थन किया। बैठक में ग्रामीणों ने खुलकर कहा कि बढ़ते दिखावे, खर्चीली शादियों और प्रतिस्पर्धा की भावना ने समाज में कुरीतियों को जन्म दिया है। इसका असर युवाओं पर भी दिख रहा है, जहां नशे की प्रवृत्ति बढ़ रही है और लोग अपनी मूल संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। पंचायत ने इसे समय रहते रोकने को जरूरी बताया।
सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश
महापंचायत में बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिनमें कुंदन सिंह पंवार, विक्रम सिंह कैंतुरा, सोवत सिंह कैंतुरा, पूर्व प्रधान गंभीर सिंह रावत, सुरेश कैंतुरा, बचन सिंह रावत, चैन सिंह, धीरेंद्र पंवार, प्यारे लाल सेमवाल, सरदार सिंह, सोहन लाल बहुगुणा, मोहन लाल निराला, महेश तोमर, शेखर मनवीर, अर्जुन सिंह और अनूप पंवार शामिल रहे। नैनबाग के सिलवाड़ गांवों का यह फैसला सिर्फ एक रस्म पर रोक नहीं है, बल्कि सादगी, समानता और सामाजिक जिम्मेदारी की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम है। ग्रामीणों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बदलाव के लिए कानून से पहले सामूहिक चेतना की जरूरत होती है।
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