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Uttarakhand buransh news: flower blossomed in January month due to climate change threat to future breaking update
Image : social media ( Uttarakhand buransh news)

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UTTARAKHAND NEWS देहरादून

Uttarakhand buransh: जनवरी में ही खिल उठा बुरांश, भविष्य के लिए खतरा बना जलवायु परिवर्तन

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Uttarakhand buransh news: बदलते जलवायु के कारण जनवरी में ही खिल उठा बुरांश, मध्य हिमालय के लिए संकट का संदेश

Uttarakhand buransh news: flower blossomed in January month due to climate change threat to future breaking update: उत्तराखंड में लगातार हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण मार्च अप्रैल में खिलने वाला बुरांश का फूल जनवरी में ही खिल गया है। इतना ही नहीं बल्कि बुरांश के फूल से वृक्ष लकदक हो गए है जिनमे बुरांश की लाली छा गई है। हालांकि बुरांश का इतनी जल्दी खिलना मध्य हिमालय के लिए अच्छे संकेत नहीं है क्योंकि यह पर्यावरण संतुलन और तेजी से बदल रहे जलवायु की गंभीर चेतावनी है।

यह भी पढ़े :उत्तराखंड : बुरांश खिला जनवरी में ही जलवायु परिवर्तन को लेकर वैज्ञानिक भी चिंतित

बता दें उत्तराखंड का राज्य वृक्ष बुरांश 1500 से 3600 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाने वाला सदाबहार वृक्ष माना जाता है, जो अपने लाल फूलों और औषधीय गुणो के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बुरांश के खिलने का समय मार्च अप्रैल होता है लेकिन जिस तरह से जलवायु में लगातार परिवर्तन हो रहा है उसी का परिणाम है कि बुरांश इस बार जनवरी में खिल गया। बताते चलें रुद्रप्रयाग जिले के रानीगढ़ के लाटू देवता वन रेंज में समय से पहले बुरांश के पेड़ लाल फूलों से भर गए हैं। इसके साथ ही नैनीताल जिले के कुछ क्षेत्रों में भी बुरांश खिल चुका है। विशेषज्ञों की माने तो इसका प्रमुख कारण मध्य हिमालय में लगातार बढ़ रहा तापमान और नवंबर से बारिश का ना होना तथा शीतकालीन ठंड में लगातार गिरावट को माना जा रहा है। पिछले एक दशक में सर्दियों के औसत तापमान में लगातार जो वृद्धि दर्ज की गई है उसे विंटर वार्मिंग ट्रेंड कहा जाता है उसी का असर है कि प्रदेश की जलवायु में बदलाव हो रहा है।

समय से पहले बुरांश का खिलना शुभ संकेत नहीं (Uttarakhand buransh news)

समय से पहले बुरांश के फूल का आना फिनोलॉजिकल मिसमैच की स्थिति को दर्शाता है ,जिसका अर्थ है पौधों के जीवन चक्र और उनसे जुड़े जीव मधुमक्खियां तितलियां के जीवन में तालमेल टूटना। जनवरी में फूल खिलने की स्थिति में परागण करने वाले जीव सक्रिय नहीं होते जिससे यह विसफल हो जाता है। यानी इसका सीधा असर बीजों की गुणवत्ता अंकुरण और प्राकृतिक पुनर्जनन पर पड़ता है। वायुमंडल में बढ़ती कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा पौधों में प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ा देती है, जिससे असामान्य वृद्धि और समय से पहले प्रजनन की प्रवृत्ति देखी जा रही है।

जनवरी मे बुरांश का खिलना भविष्य के लिए खतरा

जनवरी में खिले बुरांश को केवल एक प्राकृतिक घटना नहीं माना जा सकता है। क्योंकि यह हिमालय पारिस्थितिकी के लिए वैज्ञानिक अलार्म है जो भविष्य में और अधिक गर्म सर्दियों की अनियमित वर्षा और विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं को न्योता दे सकता है। यदि समय रहते वैज्ञानिक निगरानी वन संरक्षण और जलवायु अनुकूल नीतियां लागू नहीं की गई तो मध्य हिमालय का यह महत्वपूर्ण वृक्ष विलुप्त भी हो सकता है। बुरांश जैसे महत्वपूर्ण पादपों पर दिसंबर और जनवरी में फूल आने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही है जो प्राकृतिक पुनर्जनन को कमजोर कर रहा है।

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