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Uttarakhand electricity bill unit rate: उत्तराखंड में महंगी हुई बिजली, UPCL ने बढ़ाए दाम
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Uttarakhand electricity bill unit rate price increase by UPCL feb 2026 breaking news today: उत्तराखंड में बिजली का नया झटका, फरवरी में प्रति यूनिट दरें फिर बढ़ीं
Uttarakhand electricity bill unit rate price increase by UPCL feb 2026 breaking news today: महंगाई से पहले ही जूझ रहे उत्तराखंड के बिजली उपभोक्ताओं को एक और झटका लगा है। दरअसल ऊर्जा निगम ने फरवरी माह के लिए बिजली की संशोधित दरें जारी कर दी हैं, जिसके तहत फ्यूल एंड पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) में चार पैसे से लेकर 15 पैसे प्रति यूनिट तक की बढ़ोतरी की गई है। इस बढ़ी हुई दर का असर उपभोक्ताओं को होली के आसपास आने वाले बिजली बिलों में साफ तौर पर महसूस होगा।
आपको बता दें कि उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की ओर से यह नई दरें प्रबंध निदेशक अनिल कुमार की स्वीकृति के बाद लागू की गई हैं। एफपीपीसीए को मासिक आधार पर वसूले जाने की व्यवस्था लागू होने के बाद से उपभोक्ताओं पर लगातार अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। बीते एक साल के आंकड़े देखें तो राहत के मुकाबले महंगाई का पलड़ा भारी रहा है।
इस बार बढ़ोतरी अलग-अलग श्रेणियों में अलग स्तर पर की गई है। बीपीएल और निजी ट्यूबवेल उपभोक्ताओं पर चार पैसे प्रति यूनिट का अतिरिक्त भार पड़ेगा, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह बढ़ोतरी 10 पैसे प्रति यूनिट तय की गई है। कमर्शियल श्रेणी में 14 पैसे, सरकारी संस्थानों के लिए 13 पैसे और कृषि उपभोक्ताओं के लिए सात पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। उद्योगों पर 13 पैसे, मिक्स लोड और रेलवे पर 12-12 पैसे, ईवी चार्जिंग स्टेशनों पर 12 पैसे और अस्थाई कनेक्शनों पर सबसे अधिक 15 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी लागू होगी।
पिछले महीनों का लेखा-जोखा देखें तो बिजली दरों में उतार-चढ़ाव लगातार जारी रहा है। दिसंबर 2025, नवंबर और जुलाई में कुछ राहत जरूर दी गई थी, लेकिन इसके विपरीत जनवरी, फरवरी, जून, अगस्त, सितंबर और अक्तूबर में बार-बार दरें बढ़ाई गईं। कुल मिलाकर उपभोक्ताओं को 10 महीनों में अधिकतर समय महंगी बिजली का ही सामना करना पड़ा। ऊर्जा निगम पहले यह दावा कर चुका था कि मासिक समायोजन प्रणाली लागू होने के बाद वार्षिक दरों में अतिरिक्त वृद्धि नहीं होगी, लेकिन इसके बावजूद एक अप्रैल 2025 से 5.6 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी लागू कर दी गई। इससे उपभोक्ताओं पर दोहरा आर्थिक भार पड़ रहा है—एक ओर मासिक एफपीपीसीए और दूसरी ओर वार्षिक दरों की बढ़ोतरी।
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