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Uttarakhand guest teacher news: No adjustment even after 10 years of service
सांकेतिक फोटो Uttarakhand guest teacher news

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UTTARAKHAND NEWS नैनीताल

उत्तराखंड के 200 गेस्ट टीचर संकट में 10 साल की सेवा के बाद भी नहीं मिला समायोजन

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Uttarakhand guest teacher news: No adjustment even after 10 years of service: 10 साल पढ़ाया, आज पहचान के लिए संघर्ष: उत्तराखंड के गेस्ट टीचरों का भविष्य अधर में

Uttarakhand guest teacher news: No adjustment even after 10 years of service: एक तरफ जहां उत्तराखण्ड सरकार संविदा कर्मचारियों को नियमित करने और उपनल कर्मचारियों को समान वेतन देने की दिशा में कदम बढ़ा रही है वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड के दुर्गम और अतिदुर्गम विद्यालयों में वर्ष 2015 से लगातार सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों की ज़िंदगी आज भी सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। एक दशक तक बच्चों को शिक्षित करने वाले ये शिक्षक अब चार महीने से अधिक समय से बिना नियुक्ति के घर बैठे हैं। घर-परिवार की जिम्मेदारियां, आर्थिक तंगी और भविष्य की अनिश्चितता ने इन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है।

दरअसल, वर्ष 2025 में राज्य सरकार ने एलटी शिक्षकों की नियमित नियुक्ति की। इस प्रक्रिया में करीब 200 अतिथि शिक्षक प्रभावित हुए, जिनका समायोजन 16 अक्टूबर 2025 से लेकर 20 जनवरी 2026 तक भी नहीं हो पाया। हैरानी की बात यह है कि नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट कहा था कि एलटी शिक्षकों की नियुक्ति से कोई भी अतिथि शिक्षक बेरोजगार नहीं होगा। लेकिन यह आश्वासन कागज़ों से बाहर नहीं निकल सका।

आज स्थिति यह है कि कला, व्यायाम और हिंदी विषय के लगभग 200 अतिथि शिक्षक प्रभावित हैं। इन्हें न तो समायोजन मिला और न ही कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था। कई शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने विभाग में 10 साल पूरे कर लिए हैं और अब नियमित भर्ती की आयु सीमा भी पार कर चुके हैं। सवाल यह है कि जीवन का इतना लंबा समय शिक्षा को देने के बाद अब वे कहां जाएं और क्या करें?

अतिथि शिक्षकों का कहना है कि राज्य के अन्य विभागों में 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले संविदा, दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्स कर्मचारियों को समान कार्य-समान वेतन और नियमितीकरण का लाभ दिया जा रहा है। इसके विपरीत, शिक्षा विभाग में अतिथि शिक्षक आज भी अस्थायी पहचान के साथ संघर्ष कर रहे हैं। सरकार की यह उदासीनता उन्हें भीतर तक आहत कर रही है।

कुमाऊं मंडल की बात करें तो यहां करीब 2270 गेस्ट टीचर कार्यरत हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की है, जो समायोजित न हो पाने के कारण घर बैठने को मजबूर हैं। व्यायाम और संगीत शिक्षकों की संख्या सबसे अधिक प्रभावित वर्ग में है। आंकड़ों के अनुसार, समायोजन के लिए कुमाऊं में व्यायाम के 57 और कला के 33 अतिथि शिक्षक अब भी प्रतीक्षा में हैं। कई शिक्षक तीन-तीन साल से बेरोजगार हैं और बढ़ती उम्र उनके सामने सबसे बड़ी बाधा बन चुकी है। लगभग ऐसा ही कुछ हाल गढ़वाल मंडल के अतिथि शिक्षकों का भी है।

इस संबंध में अतिथि शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश धामी कहते हैं, “हमें तो कुछ माना ही नहीं जा रहा। आधी उम्र पढ़ाते-पढ़ाते निकल गई। अगर सरकार अब भी हमारा हित नहीं करती, तो हमारे सामने रास्ता क्या बचेगा?” उन्होंने याद दिलाया कि पिछली धामी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में अतिथि शिक्षकों के समायोजन और किसी को बेरोजगार न होने देने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब सरकार के दूसरे कार्यकाल में भी हालात जस के तस हैं।

अतिथि शिक्षक सरकार से मांग कर रहे हैं कि जब तक विद्यालयों में स्थायी पद रिक्त न हों, तब तक प्रभावित शिक्षकों को अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों में सरप्लस के रूप में तैनाती दी जाए, ताकि छात्रहित भी प्रभावित न हो और शिक्षकों का जीवन भी पटरी पर लौट सके। अब सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हो रहा है। सवाल सिर्फ नौकरी का नहीं, बल्कि उस भरोसे का है जो इन शिक्षकों ने सालों तक सिस्टम पर किया। अब देखना यह है कि सरकार इस आवाज़ को कब तक अनसुना करती है, या फिर उन शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाती है, जिन्होंने अपने जीवन के कीमती वर्ष उत्तराखंड की शिक्षा व्यवस्था को समर्पित कर दिए।
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