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उत्तराखण्ड : तीन केमू बसों को मिले सिर्फ 18 यात्री, कारण क्या रहा कोरोना या ज्यादा किराया??

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Uttarakhand Kemu Bus: ढूंढे नहीं मिल रहे हैं यात्री, पांच-सात सवारियों को लेकर चल रही केमू की बसें..

बेशक कुमाऊं की लाइफलाइन कुमाऊं मंडल आनर्स युनियन (केएम‌ओयू)(Uttarakhand Kemu Bus) की बसें करीब पौने तीन माह बाद पहाड़ की घुमावदार सड़कों पर दौड़ने लगी हो परन्तु बसों को सवारियां ढूंढे नहीं मिल रही है। एक तो कोरोना की मार, ऊपर से बढ़े हुए किराए का बोझ केमू में यात्रियों को घुसने नहीं दे रहा है। हाल यह कि केमू की ज्यादातर बसें पांच-सात यात्रियों को लेकर सफर पूरा करने को मजबूर हैं। ताज़ा उदाहरण हल्द्वानी में ही देखने को मिला है जहां से बुधवार को केमू की तीन बसें दो अल्मोड़ा-बागेश्वर वाया गरुड़ के लिए जबकि एक बस अल्मोड़ा के लिए चली परंतु तीनों बसों में यात्रियों की संख्या महज 18 थी। यही हाल बृहस्पतिवार को भी देखने को मिला।‌ हल्द्वानी से बागेश्वर के चली तीन बसों में केवल 20-25 यात्रियों ने ही सफ़र किया। यात्री न मिलने से न केवल केमू के चालक-परिचालक परेशान हैं बल्कि केमू प्रबंधन के माथे पर भी चिंता की रेखाए उमड़ रही है। बता दें कि सार्वजनिक परिवहन के अन्य साधनों की तरह ही केमू की बसों में भी कुल क्षमता के केवल 50 फीसदी यात्रियों को सफर करने की अनुमति है और इस दौरान यात्रियों को मास्क सेनेटाइजर का प्रयोग करना भी अनिवार्य किया गया है।
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रोडवेज की बसों के हाल भी है बेहाल, रोजाना बढ़ रहा घाटा, तेल का खर्चा निकालना भी हुआ मुश्किल:-

केएम‌ओयू (केमू) की बसों की तरह ही रोडवेज की बसों को भी यात्री नहीं मिल रहे हैं। बेशक इन दिनों उत्तराखण्ड रोडवेज का किराया केमू की अपेक्षा काफी कम हो फिर भी यात्री रोडवेज की बसों में यात्रा करने को कतरा रहे हैं। आलम यह है कि रोडवेज की कुछ बसें तो एक दो सवारियों के साथ सफर करने को मजबूर हैं। ऐसे में तेल का खर्चा निकलना तो दूर उल्टा रोडवेज को रोजाना हजारों रूपए का घाटा उठाना पड़ रहा है। अल्मोड़ा डिपो से संचालित हो रही छः बसों में मंगलवार को केवल 50 सवारियां बैठी। कुल मिलाकर केमू हो या रोडवेज दोनों में ही यात्रियों का टोटा पड़ा है जो इस बात की ओर भी संकेत करता है कि दूसरे राज्यों में लोग भले ही सामान्य जीवन व्यतीत करने लगे हो परंतु पहाड़ों में अभी भी कोरोना का भय बरकरार है। कारण चाहे जो भी हो परन्तु सवारियों की कमी से उत्तराखण्ड परिवहन निगम का प्रबंधन भी खासा चिंतित हैं।

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