UTTARAKHAND SELF EMPLOYMENT रानीखेत
अल्मोड़ा: रानीखेत की किरन का ऐपण कला का हुनर, बनाती हैं एक से बढ़कर एक खूबसूरत उत्पाद
1 min read
kiran aipan art ranikhet almora news today kiran bhagat uttarakhand self employment news पहाड़ की लोककला को नई उड़ान: रानीखेत की किरन भगत बना रहीं ऐपण को आत्मनिर्भरता का माध्यम
kiran aipan art ranikhet almora news today kiran bhagat uttarakhand self employment news: कुछ समय पहले तक विलुप्त प्राय हो चुकी उत्तराखण्ड के कुमाऊं मंडल की पारंपरिक ऐपण कला अब केवल घर की चौखटों और पूजा स्थलों तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि पहाड़ की बेटियां इस लोककला को नए रूप में देश-दुनिया तक पहुंचा रही हैं। आज कुमाऊं की पहाड़ की बेटियां न केवल ऐपण कला को प्रचारित प्रसारित कर रही बल्कि इसे स्वरोजगार का जरिया बना कर आत्मनिर्भरता की ओर भी कदम बढ़ा रही हैं।
आए दिन हम आपको राज्य की ऐसी प्रतिभावान बेटियों से रूबरू कराते रहते हैं। इसी कड़ी में आज हम आपको मूल रूप से राज्य के अल्मोड़ा जिले के रानीखेत की किरन भगत से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिन्होंने साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर ऐपण को अपनी पहचान और रोजगार का माध्यम बनाया है।
यह भी पढ़ें- नैनीताल की किरन बिष्ट की ऐपण कला छा गई सोशल मीडिया में दिल्ली अजमेर से आ रहे आर्डर
देवभूमि दर्शन से खास बातचीत kiran aipan art ranikhet almora news today uttarakhand self employment news
देवभूमि दर्शन से खास बातचीत में किरन भगत बताती है कि वह मूल रूप से राज्य के अल्मोड़ा जिले के रानीखेत तहसील की रहने वाली हैं और बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं। दरअसल उनके पिता सतीश चंद्र भगत का लम्बे समय से स्वास्थ्य खराब है जिस कारण उनकी मां भगवती देवी, दूध बेचकर अपने परिवार का गुजारा करती हैं। परिवार की इन विषम परिस्थितियों के बावजूद कड़ी मेहनत और आत्मनिर्भरता उनके परिवार की पहचान रही हैं।
यही कारण है कि किरन ने भी अब अपने परिवार को आर्थिक संबंल प्रदान करने के लिए ऐपण कला को अपने स्वरोजगार का जरिया बनाया है। आपको बता दें कि ऐपण कला की बारीकियों को सीखने के लिए किरन ने किसी संस्थान या प्रशिक्षण केंद्र का सहारा नहीं लिया। उन्होंने घर की देहरी, कपड़े और अन्य सतहों पर ऐपण बनाने की तकनीकें यूट्यूब वीडियो देखकर स्वयं सीखीं। निरंतर अभ्यास और प्रयोग से उनकी कला निखरती चली गई और धीरे-धीरे उन्होंने इसे व्यावसायिक रूप देना शुरू किया।
यह भी पढ़ें- अल्मोड़ा: बग्वालीपोखर की कविता कैड़ा का ऐपण हुनर देखिए बनाती हैं एक से एक खूबसूरत उत्पाद…
रानीखेत से ही प्राप्त की शिक्षा, अहमदाबाद दिल्ली तक जा रहे ऐपण उत्पाद kiran bhagat aipan art ranikhet almora news today
किरन बताती है कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा आदर्श बालिका इंटर कॉलेज, रानीखेत से हुई, जबकि उच्च शिक्षा उन्होंने राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत से प्राप्त की। ऐपण कला की बारिकियों में महारत हासिल करने के बाद वह पिछले एक- दो वर्षों से किरन ऐपण कला को स्वरोजगार का जरिया बनाकर व्यावसायिक रूप में प्रयोग कर रही हैं, हालांकि सोशल मीडिया पर उन्होंने केवल पिछले चार महीनों से ही अपने काम के वीडियो साझा करने शुरू किए हैं, लेकिन कम समय में ही उनकी कला को अच्छी पहचान मिलने लगी है।
उनके तैयार किए गए ऐपण उत्पाद उत्तर प्रदेश, अहमदाबाद, दिल्ली, देहरादून के साथ-साथ कुमाऊं के स्थानीय ग्रामीण क्षेत्रों तक भेजे जा चुके हैं।
यह भी पढ़ें- हल्द्वानी की निर्मला जोशी का हुनर बनाती हैं एक से बढ़कर एक खूबसूरत ऐपण उत्पाद….
पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के उत्पाद तैयार कर रही किरन kiran bhagat aipan art ranikhet almora self employment uttarakhand news
किरन भगत पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के ऐपण उत्पाद तैयार कर रही हैं। उनके काम में ऐपण तोरण (दरवाज़े और बाइक के लिए), दीवार सजावट, वुडन फ्रेम ऐपण, कैनवास पेंटिंग, पारंपरिक फर्श ऐपण (चौक), पूजा चौकी, लक्ष्मी पगचिन्ह, शुभ-लाभ, गणेश और देवी-देवताओं के ऐपण शामिल हैं। इसके अलावा वह दीया स्टैंड, पूजा थाली, करवा चौथ ऐपण थाली, गृह प्रवेश और विवाह विशेष ऐपण भी बनाती हैं।
आधुनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किरन कस्टमाइज़्ड ऐपण गिफ्ट, नाम और मंत्र लिखे ऐपण, शादी और गृह प्रवेश के उपहार, ऐपण डिज़ाइन की डायरी, नोटबुक कवर, मोबाइल कवर और नेम प्लेट जैसे उत्पाद भी तैयार कर रही हैं। किरन का कहना है कि ऐपण केवल परंपरा निभाने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मजबूत कदम भी हो सकता है। उनका प्रयास है कि युवा पीढ़ी लोककला से जुड़े और इसे सम्मान के साथ अपनाए। उनका यह संघर्षपूर्ण सफर यह साबित करता है कि सीमित संसाधन भी मजबूत इच्छाशक्ति के आगे बाधा नहीं बन सकते।
किरन के ऐपण कला उत्पाद खरीदने के लिए संपर्क करें👇
उत्तराखंड की सभी ताजा खबरों के लिए देवभूमि दर्शन के WHATSAPP GROUP से जुडिए।
👉👉TWITTER पर जुडिए।
