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Uttarakhand: lokansha Daughter of CM Tirath Rawat said "father should take concrete steps to end unemployment"

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उत्तराखण्ड देहरादून

उत्तराखण्ड: मुख्यमंत्री तीरथ की बेटी ने कहा बेरोजगारी खत्म के लिए ठोस कदम उठाए पापा

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Uttarakhand: नवनियुक्त मुख्यमंत्री (CM) तीरथ रावत (Tirath Rawat) की बेटी लोकांशा ने कही बेरोजगार युवाओं की दिल की बात..

9 नवंबर 2000 को गठित हुए उत्तराखण्ड (Uttarakhand) राज्य ने भले ही पिछले बीस वर्षों में दस मुख्यमंत्री (CM) देख लिए हों परन्तु राज्य में हालात अभी भी जस के तस बने हुए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ ही बढ़ती बेरोजगारी ऐसे मुद्दे हैं जिन पर कोई भी सरकार अच्छे से काम नहीं कर पाई है। बात बेरोजगारी की करें तो राज्य में बनने वाली हर नई सरकार से युवा रोजगार की आस लगाते रहते हैं परन्तु अभी तक उनकी यह हसरत पूरी होनी बाकी है। राज्य के नवनियुक्त मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत (Tirath Rawat) इस दिशा में क्या कर पाते हैं ये तो समय बितने के बाद ही पता चल पाएगा परंतु बेरोजगार युवाओं का न‌ए मुख्यमंत्री से इस बात की सर्वाधिक आस लगाना कि मुख्यमंत्री राज्य में बेरोजगारी को कम करने के लिए कदम उठाएंगे, इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि खुद तीरथ की बेटी ने उनसे इस पर सर्वाधिक फोकस करने को कहा है। बता दें कि मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की बेटी लोकांशा सेंट जोजफ्स स्कूल में 10वीं की छात्रा है। पिता के मुख्यमंत्री बनने से काफी खुश लोकांशा ने यह बात बीते रोज पत्रकारों से बातचीत में कही।
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बता दें कि उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की बेटी लोकांक्षा पापा के सीएम बनने पर बेहद खुश हैं। पिता के मुख्यमंत्री बनने के बाद जीएमएस रोड पर भागीरथी पुरम स्थित निवास पर मुख्यमंत्री की बेटी लोकांशा रावत ने पत्रकारों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों के एक प्रश्न का गंभीरतापूर्वक ज़बाब देते हुए कहा कि ‘अगर मुझे पापा को कोई एक काम बताना हो तो मैं कहूंगी कि प्रदेश में बेरोजगारी को खत्म कर रोजगार बढ़ाने के दिशा में काम करें’। उन्होंने इस बारे में आगे कहा कि प्रदेश में रोजगार की स्थिति बेहतर नहीं है। सभी सरकारों को इस पर फोकस करना चाहिए। अन्य लोगों की तरह जब वह भी अपने आसपास बड़ी संख्या में बेरोजगार युवाओं को चूमते देखती हैं, तो उन्हें अच्छा‌ भी नहीं लगता। उन्होने स्पष्ट किया कि प्रदेश में हर व्यक्ति को उतना काम मिलना ही चाहिए, जितना उसकी जरूरत और क्षमता हो।

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