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Uttarakhand: वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर विवादित बयान विधायक दिलीप रावत ने मांगी माफी…
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वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर बयान देकर घिरे विधायक दिलीप रावत, सार्वजनिक माफी मांगकर दी सफाई |Dilip Rawat Statement Controvers|| lansdown MLA Dilip Rawat Apologises After Remarks on Veer Chandra Singh Garhwali|
|Dilip Rawat Statement Controvers|| lansdown MLA Dilip Rawat Apologises After Remarks on Veer Chandra Singh Garhwali|
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के लैंसडाउन विधानसभा से विधायक दिलीप सिंह रावत अपने हालिया बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर दिए गए उनके बयान के बाद प्रदेशभर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रिया देखने को मिली। बढ़ते विवाद के बीच विधायक ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि उनका उद्देश्य कभी भी महान स्वतंत्रता सेनानी और पेशावर कांड के महानायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के सम्मान, स्वाभिमान या योगदान को ठेस पहुंचाना नहीं था। यदि उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए खेद व्यक्त करते हैं और सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हैं।
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क्या था पूरा मामला? (Peshawar Kand Controversy)
कोटद्वार में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान विधायक दिलीप सिंह रावत ने बताया कि कुछ दिन पहले देहरादून में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि यदि वीर चंद्र सिंह गढ़वाली अधिक पढ़े-लिखे होते तो शायद वे ब्रिटिश शासन के आदेश का तत्काल विरोध नहीं करते। उनका कहना था कि अधिक शिक्षित व्यक्ति किसी बड़े निर्णय से पहले उसके नफा-नुकसान और संभावित परिणामों पर अधिक विचार करता है, जबकि क्रांतिकारी फैसले अक्सर बिना व्यक्तिगत लाभ-हानि की चिंता किए लिए जाते हैं। विधायक का दावा है कि उनके इस बयान का उद्देश्य वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के साहस और बलिदान को कमतर आंकना नहीं था, बल्कि उसे अलग संदर्भ में रखा गया था।
बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करने का लगाया आरोप (Political Reaction)
दिलीप सिंह रावत ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया और इंटरनेट मीडिया पर उनके बयान को संदर्भ से हटाकर तोड़-मरोड़कर प्रसारित किया गया, जिससे गलत संदेश गया और विवाद खड़ा हो गया। उन्होंने कहा कि उनके शब्दों का वास्तविक अर्थ कुछ और था, लेकिन उसे अलग तरीके से प्रस्तुत किया गया।
कांग्रेस पर भी साधा निशाना (Congress Attack)
पत्रकार वार्ता के दौरान विधायक ने कांग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि 11 मई 1979 को कोटद्वार के मालवीय उद्यान में आयोजित कांग्रेस के एक कार्यक्रम के दौरान वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार और धक्का-मुक्की की गई थी। उनके अनुसार, इस घटना के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और बाद में उनका निधन हो गया। विधायक ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम का उल्लेख कोटद्वार से प्रकाशित एक पत्रिका में किया गया है, जिसमें पूर्व कांग्रेस नेता स्वर्गीय कुंवर सिंह कर्मठ ने भी इसका जिक्र किया था।
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कांग्रेस से भी मांगा जवाब (Uttarakhand Politics)
दिलीप सिंह रावत ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का सम्मान करती है, तो उसे 1979 की उस घटना पर भी अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल से पूछा कि क्या कांग्रेस उस कथित घटना के लिए भी सार्वजनिक रूप से माफी मांगेगी। फिलहाल विधायक की सफाई और सार्वजनिक माफी के बावजूद यह मामला उत्तराखंड की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
