UTTARAKHAND NEWS पिथौरागढ़
पिथौरागढ़: 7 बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कंधा, फौजी बेटी ने कराया मुंडन दी चिता को मुखाग्नि
1 min read
Kiran Gangolihat Pithoragarh news : सात बेटियों ने अपने पिता की अर्थी को दिया कंधा, रूढ़िवादी सोच को तोड़कर फौजी बेटी ने कराया मुंडन, पिता की चिता को दी मुखाग्नि..
Kiran Gangolihat Pithoragarh news 7 daughter father ex army kishan kanyal died, military kiran shaved head uttarakhand :हिंदू धर्म में अक्सर देखा जाता है कि पिता की मौत के बाद उसके बेटे ही उसकी चिता को मुखाग्नि देते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योकि पुत्र को वंश चलाने और माता-पिता को मोक्ष दिलाने वाला माना जाता है। हिंदू धर्म में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, हालांकि इस रूढ़िवादी परंपरा को बेटियां अब तोड़कर लोगों की सोच बदल रही है। ऐसी ही कुछ भावुक और प्रेरणा देने वाली घटना पिथौरागढ़ जिले से सामने आई है ,जहां पर 7 बेटियों ने अपने रिटायर्ड सैनिक पिता के निधन पर न केवल उनकी अर्थी को कंधा दिया बल्कि शमशान घाट पर उनकी चिता को भी मुखाग्नि देकर बेटे का फर्ज निभाया।
यह भी पढ़े :Pithoragarh: बेरीनाग दीवाली पर घर लौट रहे पिता की गई जिंदगी नाबालिग बेटी ने दी चिता को मुखाग्नि
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट से करीब 8 किलोमीटर दूर सिमलकोट उकाला गांव के निवासी पूर्व सैनिक किशन कन्याल का बीते सोमवार को अचानक स्वास्थ्य खराब हो गया था। इसके बाद उनके परिजन उन्हें गंगोलीहाट स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां पर उनकी स्थिति गंभीर होने पर उन्हें हायर सेंटर हल्द्वानी रेफर किया गया। हालांकि बीच रास्ते में ही किशन ने दम तोड़ दिया, जिससे परिजनों को गहरा सदमा लगा। तभी इस बीच किशन के निधन के बाद उनके परिजन और ग्रामीणों में अंतिम संस्कार की रस्मों को पूरा करने को लेकर विकट स्थिति उत्पन्न हो गई।
फौजी बेटी किरन ने मुंडन कराया सभी बहनों ने मिलकर पिता की चिता को दी मुखाग्नि ( pithoragarh news today)
पिता के अंतिम संस्कार की रस्मे निभाने के लिए उनकी सातों बेटियां रूढ़िवादी सोच को तोड़ते हुए आगे आई और उन्होंने अपने पिता की अंतिम संस्कार की रस्मों को पूरा करने का निर्णय लिया। मृतक किशन की 7 बेटियों में तीसरे नंबर की बेटी किरन ने मुंडन कराया और अपनी वर्दी में ही पिता किशन की अर्थी को कंधा दिया। किशन की बेटी किरन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल सीआईएसएफ मे तैनात है जिन्होंने बेटे का फर्ज निभाया। बेटियों के इस साहस को देखकर हर किसी की आँखे भर आई।
बहनों ने पेश की मिसाल ( pithoragarh sisters news)
किरन अपनी अन्य 6 बहनों के साथ रामेश्वर श्मशान घाट के लिए पहुंची, जहां पर किरन के अलावा उनकी बहन शोभा चांदनी, नेहा बबली दिव्यांशी ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। हालांकि अन्य बहन मंजू किसी कारण से श्मशान घाट नहीं पहुंच सकी लेकिन उन्होंने पिता की अर्थी को कंधा जरूर दिया।
उत्तराखंड की सभी ताजा खबरों के लिए देवभूमि दर्शन के व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़िए।।
