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deepak goswami pahari paneer self employment garur Bageshwar Uttarakhand News Today
Image : social media ( deepak goswami pahari paneer)

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Uttarakhand News: बागेश्वर: दिल्ली छोड़कर गांव लौटे दीपक गोस्वामी श…

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deepak goswami pahari paneer: दिल्ली छोड़कर गांव लौटे दीपक गोस्वामी ने किया कड़ा संघर्ष, पनीर को बनाया अपनी पहचान…

deepak goswami pahari paneer self employment garur Bageshwar Uttarakhand News Today: एक ओर उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों के गांव पलायन की मार झेल रहे हैं ,वहीं दूसरी ओर प्रदेश में कुछ ऐसे युवा भी मौजूद है जो देश विदेशों में रोजगार करने के बाद वापस अपने घर लौटकर स्वरोजगार को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसी ही कुछ कहानी है बागेश्वर जिले के दीपक गोस्वामी की जिन्होंने स्वरोजगार के क्षेत्र में न सिर्फ अपना अहम योगदान दिया बल्कि स्वरोजगार ही अब उनकी सामूहिक आमदनी का मजबूत आधार बन चुका है जिसके जरिए उन्हें अच्छी खासी आमदनी अर्जित हो रही है।

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deepak goswami pahari paneer self employment garur Bageshwar: बता दें बागेश्वर जिले के गरुड़ के अयारतोली गांव के निवासी दीपक गोस्वामी की कहानी बेहद संघर्ष भरी रही है। दरअसल वर्ष 2013 में दीपक के पिता का निधन होने के बाद महज 18 साल की उम्र में दीपक के कंधों पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ गई थी। बावजूद इसके दीपक के हौसले कभी टूटे नहीं और उन्होंने रोजगार की तलाश में वर्ष 2015 में दिल्ली का रुख किया। कई साल तक दीपक ने दिल्ली में नौकरी की लेकिन कोरोना काल के बाद 2021 में दीपक ने अपने गांव लौटने का फैसला किया। इस दौरान दीपक ने सरकारी सहायता के बिना अपनी मां की पेंशन खाते से लोन लेकर पनीर का बिजनेस शुरू किया जिनका छोटा सा प्रयास रंग लाया। शुरू में दीपक ने 6 गाय खरीद कर दूध बेचने के बजाय पनीर बनाने का निर्णय लिया ताकि बेहतर आमदनी हो सके और उनके इसी फैसले ने उनके जीवन की दशा को बदल दिया।

दीपक की मां और पत्नी भी लगी मेहनत करने मे

धीरे-धीरे दीपक के बने हुए पनीर की मांग बढ़ने लगी जिसे देखते हुए उनके साथ आसपास के गांव के पशुपालक भी जुड़ते गए। वर्तमान में दीपक अपनी 18 गायो के साथ अन्य ग्रामीणों की 30 से अधिक गायों का दूध बेच रहे हैं। इस दूध से तैयार पनीर की रोजाना 20 किलो से अधिक आपूर्ति गरुड़ बाजार में हो रही है। इस पूरे काम में दीपक की मां हंसी देवी और पत्नी चंपा देवी भी अपनी सक्रिय भूमिका निभा रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती

कोठूं गांव की लक्ष्मी देवी, जानकी देवी, हेमा देवी, बिमला देवी और अयारतोली की रेखा देवी, शांति देवी, बसंती देवी बताती हैं कि दीपक के पनीर कारोबार से जुड़ने के बाद उन्हें घर से ही दूध बेचने का मौका मिल रहा है। इस दौरान उन्हे न तो बाजार जाने की परेशानी है और न ही अतिरिक्त मेहनत की। इतना ही नही बल्कि दूध के अच्छे दाम मिलने से उनकी आय बढ़ी है और परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।

बैंक ने लोन देने से कर दिया था मना ( bageshwar news today)

दीपक बताते हैं कि सरकार की योजनाएं खूब है लेकिन लोगों तक उनकी पहुंच को सरल बनाने की जरूरत है। काम शुरू करने के लिए दीपक मुख्यमंत्री योजना से लोन लेने बैंक में गए लेकिन बैंक ने इसे जोखिम बताते हुए ऋण देने से मना कर दिया। इसके बाद से उन्होंने किसी सरकारी योजना का लाभ लिए बिना अपना काम आगे बढ़ाया। दीपक का कहना है कि वह सुबह 4:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक निरंतर कार्य करते हैं तथा दो घंटे भोजन विश्राम के बाद 4:00 बजे से शाम से रात तक काम करते हैं। दीपक की मेहनत की बदौलत ही आज उनके पनीर के स्वरोजगार को अच्छी खासी पहचान मिली है।

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